शनिवार, 11 अप्रैल 2015

कब्ज का आयुर्वेद उपचार

कब्ज का आयुर्वेद उपचार
(Constipation Treatment by Ayurveda)
कब्ज का उपचार करने के लिए त्रिफला को 3 Grams से 5 Grams की मात्रा रात को सोते Time गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
कब्ज के कारण शरीर कई प्रकार के रोग हो जाता है वैसे कहा जाए तो यह ही किसी रोग के उत्पन्न होने का मूल कारण होता है। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि कब्ज क्या होता हैं ? कब्ज (Constipation) का संबंध Digestive Work से है। जब शरीर की Digestive Work खराब जाता है, अर्थात् जो भोजन (Food) हम खाते हैं, वह सही ढंग से जब नहीं पचता और आंतों में रूक जाता तो इस कारण से गैस बनना, मिचली आना, पेट में दर्द रहना, शौच जाने में Time लगना और सुबह पेट साफ न होना, दिन में तीन चार Time शौच जाना, बदबूदार गैस निकलना, पेट गुडगुडा़ना और खट्टी डकारें आना आदि अनेकों समस्यां पैदा हो जाता हैं, जिससे नये-नये रोगों उत्पन्न हो जाते है। कब्ज यानि Constipation से बचने के लिए हम आपको कुछ नुस्खे बताने जा रहे हैं-
कब्ज रोग का उपचार:
1- कब्ज का उपचार करने के लिए त्रिफला को 3 Grams से 5 Grams की मात्रा रात को सोते Time गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इसे कुछ कुछ दिनों तक लगातार लें। इस उपचार के साथा ही रात के समय में तांबे के बर्तन में पानी रख लें और सुबह इसे पी लें। फिर इसके 15 मिनट बाद शौच करने जायें। ऐसा करने से पेट साफ हो जायेगा। यदि इस प्रकार से रोज जब आप अपना उपचार करते हैं तो आपको इस रोग से छुटकार हो जायेगा।
2- कब्ज के उपचार के लिए Daily कम से कम 2 या 3 हरड़ अवश्य चूसें। लगातार जब आप कुछ दिनों तक अपना उपचार इस प्रकार से करते हैं तो कब्ज (Constipation) की समस्यां दूर हो जाती है।
3- त्रिफला 25 Grams, सौंफ25 Grams, सोंठ 5 Grams, बादाम 50 Grams, मिश्री 20 Grams लें और गुलाब के फूल 50 Grams भी लें। सभी को कूट तथा पीसकर एक शीशी में भर लें। रात में सोते Time 5 से 7 Grams तक दूध या शहद के साथ लें। इस प्रकार से रोजाना उपचार करने से कब्ज ठीक हो जाता है।
कब्ज रोग में परहेज:
जिन्हें कब्ज अथार्त Constipation की Problem हो, वे लोग ध्यान दें कि कभी भी गरिष्ठ भोजन, तली चीजें तथा उरद आदि का सेवन न करें। गेहूं को ज्यादा बरीक न पिसायें और चोकर न निकालें। भोजन पकाने के लिए ऐसे ही आटे का उपयोग करें। Daily थोड़ा मेहनत और योग करें। पानी ज्यादा पियें। इस प्रकार रोज उपचार करें

सफेद बालों को काला करने के घरेलू नुस्खे

धन और उन्नति के लिए श्मशान में करें यह काम
श्मशान का नाम सुनते ही मन में एक भय उभरने लगता है। लेकिन लाल किताब में एक ऐसा उपाय है जो श्मशान भूमि में जाकर करना होता है। हलांकि यह उपाय ऐसा है जिसके लिए आपको किसी तंत्र मंत्र की जरूरत नहीं है। बस करना यह है कि आप एक छोटा सा मिट्टी का बर्तन लेकर श्मशान जाइये।
इस बर्तन में श्मशान में स्थित जल के स्रोत जैसे नल, हैंडपंप आदि से पानी भरकर अपने घर ले आएं। इसमें चांदी का एक चौरस टुकड़ा रखकर घर के पूर्व दिशा में इस प्रकार स्थापित कर दें ताकि कोई इसके साथ छेड़-छाड़ नहीं करे।
इस उपाय से आर्थिक मामलों में आने वाली बाधाएं एवं कार्य में बार-बार आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। चन्द्रमा के अष्टम भाव में होने पर यह उपाय बहुत ही लाभकारी होता है।


  सफेद बालों को काला करने के घरेलू नुस्खे
वर्तमान समय में भाग दौड़ भरी जिंदगी में, बालों की ठीक से देखभाल न हो पाने और प्रदूषण के कारणहमारे बाल असमय ही सफेद हो जाते है।हालांकि बाल तनाव, प्रदूषण कोई बीमारी या‍ फिर अनुवांशिकता के कारण से भी सफेद हो सकते हैं।बालों को कलर करना इस समस्या का कोई उपचार नहीं हैं। लेकिन आप कुछ घरेलू उपचार आजमा अपने बालों को सफेद होने से अवश्य ही रोक सकते हैं। आइए हम कुछ ऐसे ही आसान घरेलू उपचार बता रहे है जिन्हे आजमा कर आप अपने सफेद बालों को पुन: काला बना पाएंगे। *कुछ दिनों तक, नहाने से 1/2 घंटा पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। इससे बाल काले होने लगेंगे। *सप्ताह में कम से कम 3 दिन दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी और बाल काले भी होने लगेंगे । *भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट नारियल के तेल के साथ बालों की जड़ों में लगाएं और 1 घंटे बाद गुनगुने पानी से अच्छीं तरह से बाल धो लें। इससे भी बाल काले होते है। *नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर उसे सिर पर लगाने से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं। *प्रतिदिन शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है । *अदरक को कद्दूकस कर शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का सफ़ेद होना कम हो जाएगा। *दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे। *1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिला कर इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी, बाल भी काले रहेंगे। *आंवले के पाउडर में नींबू का रस मिलाकर उसे नियमित रूप से लगाएं । शैंपू के बाद आंवला पाउडर पानी में घोलकर लगाने से भी बालों की कंडीशनिंग होती है, और बाल भी काले होते है । आंवला किसी ना किसी रुप मे सेवन भी अवश्य करते रहे । *जाड़े में तिल अधिक से अधिक खाएं। तिल का तेल भी बालों को काला करने में मदद करता है। *आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से फिर से काले होने लगेंगे। *एक कटोरी मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच नीबू का रस, दो चम्मच दही, शिकाकाई व रीठा पावडर, एक अंडा (अगर आप लेना चाहे तो ), आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा-सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्ट बनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए।फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एक बार अवश्य ही करें Show less
वर्तमान समय में भाग दौड़ भरी जिंदगी में, बालों की ठीक से देखभाल न हो पाने और प्रदूषण के कारणहमारे बाल असमय ही सफेद हो जाते है।हालांकि बाल तनाव, प्रदूषण कोई बीमारी या‍ फिर अनुवांशिकता के कारण से भी सफेद हो सकते हैं।बालों को कलर करना इस समस्या का कोई उपचार नहीं हैं। लेकिन आप कुछ घरेलू उपचार आजमा अपने बालों को सफेद होने से अवश्य ही रोक सकते हैं। आइए हम कुछ ऐसे ही आसान घरेलू उपचार बता रहे है जिन्हे आजमा कर आप अपने सफेद बालों को पुन: काला बना पाएंगे। *कुछ दिनों तक, नहाने से 1/2 घंटा पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। इससे बाल काले होने लगेंगे। *सप्ताह में कम से कम 3 दिन दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी और बाल काले भी होने लगेंगे । *भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट नारियल के तेल के साथ बालों की जड़ों में लगाएं और 1 घंटे बाद गुनगुने पानी से अच्छीं तरह से बाल धो लें। इससे भी बाल काले होते है। *नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर उसे सिर पर लगाने से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं। *प्रतिदिन शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है । *अदरक को कद्दूकस कर शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का सफ़ेद होना कम हो जाएगा। *दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे। *1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिला कर इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी, बाल भी काले रहेंगे। *आंवले के पाउडर में नींबू का रस मिलाकर उसे नियमित रूप से लगाएं । शैंपू के बाद आंवला पाउडर पानी में घोलकर लगाने से भी बालों की कंडीशनिंग होती है, और बाल भी काले होते है । आंवला किसी ना किसी रुप मे सेवन भी अवश्य करते रहे । *जाड़े में तिल अधिक से अधिक खाएं। तिल का तेल भी बालों को काला करने में मदद करता है। *आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से फिर से काले होने लगेंगे। *एक कटोरी मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच नीबू का रस, दो चम्मच दही, शिकाकाई व रीठा पावडर, एक अंडा (अगर आप लेना चाहे तो ), आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा-सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्ट बनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए।फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एक बार अवश्य ही करें Show less


AMZING ....NUSKHA

लाल किताब के टोटके लाल किताब के टोटके

लाल किताब के टोटके
सुबह उठ कर सबसे पहले घर की मालकिन अगर एक लोटा पानी घर के मुख्य द्वार पर डालती है तो घर में लक्ष्मी देवी के आने का रास्ता खुल जाता हैं।
अगर आप चाहते हैं की घर में सुख शान्ति बनी रहे तो हर एक अमावास के दिन घर की अच्छी तरह सफाई करके (बेकार सामान घर में न रखें) कच्ची लस्सी का छिट्टा देकर ५ अगरबत्ती जलाइए।
महीने में २ बार किसी भी दिन घर में उपला जलाकर लोबान व गूगल की धुनी देने से घर में उपरी हवा का बचाव रहता हैं तथा बीमारी दूर होती है।
आपके घर में अगर अग्नि कोण में पानी की टंकी रखी हो तो घर में कर्जा व बीमारी कभी समाप्त नही होती है इससे बचने के लिए इस कोने में एक लाल बल्ब लगा दें जो हर वक्त जलता रहे।
नमक को कभी भी खुला न रखें।
घर में सुख-शान्ति न हो तो पीपल पर सरसों के तेल का दीया जलाना और जला कर काले माह (उड़द ) के तीन दाने दीये में डालना चाहिए, ऐसा तीन शनिवार शाम को करें।
दुर्घटना या सर्जरी का भय हो तो तांबें के बर्तन में गुड़ हनुमान जी के मन्दिर में देने से बचाव होता है और अगर सरसों के तेल का दीया वहीं जलाये और वहीं बैठ कर हनुमान चालीसा पढ़े और हलवा चढाये तो काफ़ी बचाव होता है, ऐसा चार मंगलवार रात्रि करें।
बहन भाईओं से कोई समस्या हो तो सवा किलो गुड़ जमीन में दबाने से समझौता होता है, ऐसा मंगलवार को करें।
बच्चों की पढ़ाई के लिए सवा मीटर पीले कपडें में २ किलो चने की दाल बांधकर लक्ष्मी-नारायण जी के मन्दिर में चढाये, ऐसा पाँच शाम वीरवार को करें।
कमर, गर्दन में तकलीफ रहती हो तो दोनों पैरों के अंगूठे में काला सफ़ेद धागा बांधें।
घर में पैसा रखने वाली अलमारी का मुंह उत्तर की तरफ़ रखे, ऐसा करने से घर में लक्ष्मी बदती है।
किसी भी रोज़ संध्याकाल में गाय को कच्चा ढूढ़ मिटटी के किसी बर्तन में भरकर बाएँ हाथ से नज़र लगे बच्चे के सर से सात बार उतारकर चौराहे पर रख आयें या किसी कुत्ते को पिला दे, नज़र दोष दूर हो जायेगा।
घर के किसी भी कार्य के लिए निकलते समय पहले विपरीत दिशा में ४ पग जावें, इसके बाद कार्य पर चले जाएँ, कार्य जरूर बनेगा।
परिवार में सुख-शान्ति और सम्रद्धि के लिए प्रतिदिन प्रथम रोटी के चार बराबर भाग करें, एक गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौए को और चौथा चौराहे पर रख दें।
हल्दी की ७ साबुत गाठें ७ गुड़ की डलियाँ, एक रूपये का सिक्का किसी पीले कपड़े में वीरवार को बांधकर रेलवे लाईन के पार फेंक दें, फेंकते समय अपनी कामना बोलें, इच्छा पूर्ण होने की सम्भावना हो जायेगी।
घर में सुख-शान्ति के लिए मिट्टी का लाल रंग का बन्दर, जिसके हाथ खुले हो, घर में सूर्य की तरफ़ पीठ करके रखें, ऐसा रविवार को करें।
चांदी के बर्तन में केसर घोल कर माथे पर टीका लगाना, सुख-शान्ति सम्रद्धि और प्रसद्धि देता है, यह प्रयोग वीरवार को करें।
शादी न हो रही हो या पढ़ाई में दिक्कत हो तो पीले फूलों के दो हार लक्ष्मी-नारायण के मन्दिर में चढाये, आपका काम जरूर होगा, यह प्रयोग वीरवार शाम को करें।
कंजकों को बुधवार के दिन साबुत बादाम, जो मन्दिर के बाहर बैठीं हों, देना चाहिए इससे घर की बीमारी दूर होती है।
अगर किसी को अपनी नौकरी में तबादले या स्थानांतर को लेकर कोई समस्या है तो ताम्बे की गडवी/ लोटे में लाल मिर्ची के बीज डालकर सूर्य को चढाने से समस्या दूर होती है। सूर्य को यह जल लगातार २१ दिनों तक चढाये।

गेहूँ के ज्वारे

इसे ग्रीन ब्लड कहने का एक कारणयह भी है कि रासायनिक संरचना पर ध्यानाकर्षण किया जाए तो गेहूँ के ज्वारे के रस और मानव मानव रुधिर दोनों का ही पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अभिशोषण शीघ्र हो जाता है, जिससे रक्ताल्पता(एनीमिया) और पीलिया(जांडिस)रोगी के लिए यह ईश्वर प्रदत्त अमृत हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे के रस का नियमित सेवन और नाड़ी शोधन प्रणायाम से मानव शारीर के समस्त नाड़ियों का शोधन होकर मनुष्य समस्त प्रकार के रक्तविकारों से मुक्त हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे में पर्याप्त मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है जो तेजी से रक्त बनता है इसीलिए तो इसे प्राकृतिक परमाणु की संज्ञा भी दी गयी है. गेहूँ के पत्तियों के रस में विटामिन बी.सी. और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
गेहूँ घास के सेवन से कोष्ठबद्धता, एसिडिटी , गठिया, भगंदर, मधुमेह, बवासीर, खासी, दमा, नेत्ररोग,म्यूकस, उच्चरक्तचाप, वायु विकार इत्यादि में भी अप्रत्याशित लाभ होता है. इसके रस के सेवन से अपार शारीरिक शक्ति कि वृद्धि होती है तथा मूत्राशय कि पथरी के लिए तो यह रामबाण है. गेहूँ के ज्वारे से रस निकालते समय यह ध्यान रहे कि पत्तियों में से जड़ वाला सफेद हिस्सा काट कर फेंक दे. केवल हरे हिस्से का ही रस सेवन कर लेना ही विशेष लाभकारी होता है. रस निकालने के पहले ज्वारे को धो भी लेना चाहिए. यह ध्यान रहे कि जिस ज्वारे से रस निकाला जाय उसकी ऊंचाई अधिकतम पांच से छः इंच ही हो.
आप १५ छोटे छोटे गमले लेकर प्रतिदिन एक-एक गमलो में भरी गयी मिटटी में ५० ग्राम गेहू क्रमशः गेहू चिटक दे, जिस दिन आप १५ गमले में गेहू डालें उस दिन पहले दिन वाला गेहू का ज्वारा रस निकलने लायक हो जायेगा. यह ध्यान रहे की जवारे की जड़ वाला हिस्सा काटकर फेक देंगे पहले दिन वाले गमले से जो गेहू उखाड़ा उसी दिन उसमे दूसरा पुनः गेहू बो देंगे.यह क्रिया हर गमले के साथ होगी ताकि आपको नियमित ज्वारा मिलता रहे.

अंक ज्योतिष में मूलांक जन्म तारीख के अनुसार 1 से 9 माने जाते हैं।



जय शंकर
अंक ज्योतिष में मूलांक जन्म तारीख के अनुसार 1 से 9 माने जाते हैं।
प्रत्येक अंक व्यक्ति का मूल स्वभाव दिखाता है। बच्चे का मूल स्वभाव जानकर ही माता-पिता उसे सही तालीम दे सकते हैं। आइए, जानें कैसा है आपके बच्चे का स्वभाव।
मूलांक 1 (1, 10 19, 28) : ये बच्चे क्रोधी, जिद्‍दी व अहंकारी होते हैं। अच्छे प्रशासनिक अधिकारी बनते हैं। ये तर्क के बच्चे हैं अत: डाँट-डपट नहीं सहेंगे। इन्हें तर्क से नहीं, प्यार से समझाएँ।
* मूलांक 2 (2, 11, 20, 29) : ये शांत, समझदार, भावुक व होशियार होते हैं। माता-पिता की सेवा करते हैं। जरा सा तेज बोलना इन्हें ठेस पहुँचाता है। इनसे शांति व समझदारी से बात करें।
* मूलांक 3 (3, 12, 21,30 ) : ये समझदार, ज्ञानी व घमंडी होते हैं। अच्‍छे सलाहकार बनते हैं। इन्हें समझाने के लिए पर्याप्त कारण व ज्ञान होना जरूरी है।
* मूलांक 4 (4, 13, 22) : बेपरवाह, खिलंदड़े व कारस्तानी होते हैं। रिस्क लेना इनका स्वभाव होता है। इन्हें अनुशासन में रखना जरूरी है। ये व्यसनाधीन हो सकते हैं।
* मूलांक 5 (5, 14, 23) : बुद्धिमान, शांत, आशावादी होते हैं। रिसर्च के कामों में रूचि लेते हैं। इनके साथ धैर्य से व शांति से बातचीत करें।
* मूलांक 6 (6, 15, 24) : हँसमुख, शौकीन मिजाज व कलाप्रेमी होते हैं। ‘खाओ पियो ‍मस्त रहो’ पर जीते हैं। इन्हें सही संस्कार व सही दिशा-निर्देश जरूरी है।
* मूलांक 7 (7, 16, 25) : भावुक, निराशावादी, तनिक स्वार्थी मगर तीव्र बुद्धि के होते हैं। व्यसनाधीन जल्दी होते हैं। कलाकार हो सकते हैं। इन्हें कड़े अनुशासन व सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है।
* मूलांक 8 (8, 17, 26) : तनिक स्वार्थी, भावुक, अति व्यावहारिक, मेहनती व व्यापार बुद्धि वाले होते हैं। जीवन में देर से गति आती है। इन्हें सतत सहयोग व अच्छे साथियों की जरूरत होती है।
* मूलांक 9 (9, 18, 27) : ऊर्जावान, शैतान व तीव्र बुद्धि के विद्रोही होते हैं। माता-पिता से अधिक बनती नहीं है। प्रशासन में कुशल होते हैं। इनकी ऊर्जा को सही दिशा देना व इन्हें समझना जरूरी होता है।

ग्रहो मे सबसे प्रभावशाली ग्रह शनी देव ही है

ग्रहो मे सबसे प्रभावशाली ग्रह शनी देव ही है इनसे लोग डरते भी है और लोगो को डराया भी जाता है ऐ सच है कि शनी देव अशुभ फल मे हो तो एक रात मे आसमान से जमीन मे पटक देते है गलत तरीके से कमाया धन इनके ही असुभ फल मे साथ छोड देता है जिदंगी भर कमाया लेकिन काम नि आता या डूब जाएगा या कोई और भोग कर जाएगा । जातक को कर्म की शिक्षा शनि देव ही देते है पीतल से सोना बनाते है इनकी दशा और साढे साती मे जातक को हर उस चीज से वाकिफ कराते है जो आगे जाकर गलतिया नही करता । फिलहाल कैसे छोटी बातो से जाने की वो खराब हालाद मे है
शनि की गति धीमी है। इसके दूषित होने पर अच्छे से अच्छे काम में गतिहीनता आ जाती है। कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव में होने पर मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता या क्षतिग्रस्त हो जाता है। अंगों के बाल झड़ जाते हैं। शनिदेव की भी दो राशिया है, मकर और कुम्भ। शारीर में विशेषकर निचले हिस्से में ( कमर से नीचे ) हड्डी या स्नायुतंत्र से सम्बंधित रोग लग जाते है। वाहन से हानि या क्षति होती है। काले धन या संपत्ति का नाश हो जाता है। अचानक आग लग सकती है या दुर्घटना हो सकती है।
नेत्र रोग और खाँसी की बीमारी।
उपाय है----;-;-हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलाना, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड का पाठ और ॐ हन हनुमते नमः का १०८ बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है। नाव की कील या काले घोड़े की नाल धारण करे। यदि कुंडली में शनि लग्न में हो तो भिखारी को ताँबे का सिक्का या बर्तन कभी न दें यदि देंगे तो पुत्र को कष्ट होगा। यदि शनि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला आदि न बनवाएँ।कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएँ। तेल में अपना मुख देख वह तेल दान कर दें (छाया दान करे ) । लोहा, काली उड़द, कोयला, तिल, जौ, काले वस्त्र, चमड़ा, काला सरसों आदि दान दें|
११ दिन तक बहते पानी में रोजाना नारियल बहाएँ। शनि के दिन पीपल पर तेल का दिया जलाये ,या किसी बर्तन में तेल लेकर उसमे अपना क्षाया देखें और बर्तन तेल के साथ दान करे. क्योंकि शनि देव तेल के दान से अधिक प्रसन्ना होते है, या हनुमान जी की पूजा करे और बजरंग बाण का पथ करे, शनि के लिए काले साबुत उड़द एवं लोहे की वस्तु का दान करें

वास्तु दोष निवारक यंत्र -

ॐ नमः शिवाय ... मित्रों !!
आज का दिन आप सभी के लिए शुभ हो ....
प्रकृति को नदी मान लिया जाये ...
यदि हम नदी के बहाव के साथ तैरते हैं , तो कम समय और कम ऊर्जा खर्च किए अधिक दूरी तय कर लेंगे , 
और यदि , नदी के बहाव की विपरीत दिशा मे तैरेंगे तो समय अधिक लगेगा , ऊर्जा अधिक खर्च होगी और दूरी भी कम तय होगी ।
" वास्तु " भी एक प्रकार से प्रकृति रूपी नदी ही है ,
वास्तु शास्त्र कला, विज्ञान, खगोल विज्ञान और ज्योतिष का मिश्रण है।
वास्तु का शाब्दिक अर्थ निवासस्थान होता है।
इसके सिद्धांत वातावरण में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों के बीच एक सामंजस्य स्थापित करने में मदद करते हैं।
मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जब हमारे मित्र ग्रह बलवान होते हैं , तब दोषपूर्ण घर भी अनर्थ नहीं कर पाता ,
किन्तु जब शत्रु ग्रह बलवान होते हैं तब सबसे बड़ा शत्रु हमारा दोषयुक्त घर होता है , क्यूंकि हम कम से कम 12 घंटे उसी दोषयुक्त घर मे बिताते हैं।
इसलिए कभी भी भवन का निर्माण वास्तु अनुरूप ही करवाना श्रेयस्कर है ,
यदि भवन निर्माण हो चुका है , और उसमे वास्तु दोष है तो आप इस यंत्र - विधान द्वारा अपने भवन को दोषमुक्त कर सकते हैं -
वास्तु दोष निवारक यंत्र -
यदि आप पूजा पाठ या मंत्र जप करने मे स्वयं को असक्षम समझते हैं तो बिना तोड़ फोड़ किए इस वास्तु महायन्त्र से अपने घर / दुकान / कार्यालय को दोष मुक्त कर सकते हैं।
किसी साफ सफ़ेद कागज पर ,
भोजपत्र पर ,
तांबे , चांदी या अष्टधातु से बनी प्लेट पर , बनवा लीजिये।
किसी योग्य पंडित से शुभ मुहूर्त मे इस यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करवायें ,
पंचामृत से यंत्र को स्नान करायें ,
पंचोचार पूजन कर गंगाजल के छीटें मारते हुये 21 बार इस मंत्र का पाठ करें –
“ ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाये नमः ! “
इसके बाद यंत्र को पीले या भगवे रंग के कपड़े मे लपेटकर अपने घर / दुकान / कार्यालय के पूजाघर मे स्थापित करें।
ध्यान रहे ... यंत्र की नित्य पूजा अर्चना होती रहनी चाहिये ,
इस विधान से भवन का वास्तुदोष , एक बार मे ही समाप्त हो जाता है।
!! ॐ नमः शिवाय !!