गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

*कर्ज लेना व कर्ज देना*

*कर्ज लेना व कर्ज देना*
1.आशलेषा मूल नक्षत्र में संक्रांति मावस रविवार व मंगलवार को कर्ज लेना निषेध है,क्योंकि इनमें लिया हुआ कर्ज किठनाई 
से उतरेगा,नुक्सान होगा।किन्तु इनमें कर्ज देना ठीक होगा,लाभ लेकर लौटेगा।
2.मूल ज्येष्ठा मावस पूर्णमासी बुधवार को कर्ज देना ठीक नहीं,क्योंकि इनमें गया हुआ पैसा जाम होगा,झगड़ा चलेगा,मूल ब्याज दोनों को खतरा होगा।
3.मावस पूर्णमासी मंगलवार को कर्ज उतारना ठीक है एवं शनिवार को लेना देना दोनों गलत है।...

केतु ग्रह शांति, मंत्र एवं उपाय

केतु ग्रह शांति, मंत्र एवं उपाय
वैदिक ज्योतिष में राहु की तरह केतु ग्रह को भी क्रूर ग्रह माना गया है। इसे तर्क, कल्पना और मानसिक गुणों आदि का कारक कहा जाता है। केतु ग्रह शांति के लिए अनेक उपाय बताये गये हैं। इनमें केतु यंत्र, केतु मंत्र, केतु जड़ी और भगवान गणेश की आराधना करना प्रमुख उपाय है। केतु हानिकारक और लाभकारी दोनों तरह के प्रभाव देता है। एक ओर जहां यह हानि और कष्ट देता है वहीं दूसरी ओर व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति के शिखर तक लेकर जाता है। यदि आप केतु के अशुभ प्रभाव से पीड़ित हैं या कुंडली में केतु की स्थिति कमजोर है, तो केतु ग्रह शांति के लिए यह उपाय अवश्य करें। इन कार्यों को करने से केतु से शुभ फल की प्राप्ति होगी।
वेश-भूषा एवं जीवन शैली से जुड़े केतु ग्रह शांति के उपाय
ग्रे, भूरा या विविध रंग का प्रयोग करें।
पुत्र, भतीजा एवं छोटे लड़कों के साथ अच्छे संबंध बनाए।
शॉवर में स्नान करें।
कुत्तों की सेवा करें।
विशेषतः सुबह किये जाने वाले केतु ग्रह के उपाय
गणेश जी की पूजा करें।
मतस्य देव की पूजा करें।
श्री गणपति अथर्वशीर्ष का जाप करें।
केतु शांति के लिये दान करें
केतु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए केतु से संबंधित वस्तुओं को बुधवार के दिन बुध के नक्षत्र (अश्विनी, मेघा, मूल) में देर शाम को दान किया जाना चाहिए।
दान की जाने वाली वस्तुएँ- केला, तिल के बीज, काला कंबल, लहसुनिया रत्न एवं काले पुष्प आदि।
केतु के लिए रत्न
ज्योतिष में केतु ग्रह के लिए लहसुनिया रत्न को बताया गया है। यह रत्न केतु के बुरे प्रभावों से रक्षा करता है।
केतु यंत्र
व्यापार लाभ, शारीरिक स्वास्थ्य व पारिवारिक मामले आदि के लिए केतु यंत्र के साथ माँ लक्ष्मी और गणपति की अराधना करें। केतु यंत्र को बुधवार के दिन केतु के नक्षत्र में धारण करें।
केतु के लिये जड़ी
केतु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए बुधवार को बुध के नक्षत्र में अश्वगंधा अथवा अस्गंध मूल धारण करें।
केतु ग्रह के लिये रुद्राक्ष
केतु ग्रह के लिये 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभदायक होता है।
नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र:
ॐ ह्रीं हूं नमः।
ॐ ह्रीं व्यं रूं लं।।
केतु मंत्र
केतु की अशुभ दशा से बचने के लिए केतु बीज मंत्र का जाप करें। मंत्र - ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः!
केतु मंत्र का 17000 बार उच्चारण करें। देश-काल-पात्र सिद्धांत के अनुसार कलयुग में इस मंत्र को 68000 बार जपने के लिए कहा गया है।
आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं - ॐ कें केतवे नमः!
वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह शांति के उपाय को बड़ा महत्व है। दरअसल, केतु ग्रह का कोई भौतिक स्वरूप नहीं है। बल्कि यह एक छाया ग्रह है। इसके स्वभाव के कारण इसे पापी ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। हालाँकि ऐसा नहीं है कि केतु के कारण जातकों को सदैव परेशानी का सामना करना पड़ता है। बल्कि इसके शुभ प्रभावों से जातकों को मोक्ष भी प्राप्त हो सकता है। मिथुन राशि में यह नीच भाव में होता है और नीच भाव में होने के कारण जातकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे जातक के जीवन में अचानक कोई बाधा आ जाती है, पैरों और जोड़ों में दर्द, रीड़ की हड्डी से संबंधित परेशानी आदि रहती हैं। इन सबसे बचने के लिए केतु दोष के उपाय बहुत ही कारगर हैं। केतु मंत्र का जाप करने से जातक को केतु से संबंधित बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है। वहीं केतु यंत्र की स्थापना करने से जातकों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।
जय महाकाल
जय श्रीराम

कर्ज बढ़ा देती हैं घर में रखी ये चीजें

कर्ज बढ़ा देती हैं घर में रखी ये चीजें
वास्तु शास्त्र के मताबिक घर में रखी ऐसी कई चीजें होती है जो सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती है। नकरारात्मक ऊर्जा वाली चीजें आपको गरीब बनाकर कर्ज में डुबा सकती है। इसलिए ऐसी चीजों को तुरंत घर से हटा देना चाहिए। यहां हम आपको ऐसी ही चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं।
देवी-देवताओं की टूटी मूर्ति या फटे चित्र :
घर में देवी-देवताओं की टूटी मूर्ति या फटे चित्र नहीं रखना चाहिए। इससे आर्थिक नुकसान होता है। इन्हें जल्द किसी नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। एक ही देवी या देवता की 3-3 मूर्तियां या तस्वीर रखने से भी हानि होती है।
पुराने या फटे कपड़ों की पोटली :
अक्सर लोगों के घर में फटे-पुराने कपड़ों की पोटली होती है। फटे-पुराने कपड़ों या चादरों से भी घर में नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इस तरह के कपड़ों को दान कर देना चाहिए या इसका किसी और काम में उपयोग करना चाहिए।
टूटी-फूटी वस्तुएं :
घर में किसी भी तरह की टूटी-फूटी वस्तु न रखें। आपके घर में टूटी हुई चेयर या टेबल पड़ी है तो उसे तुरंत घर से हटा दें। ये पैसों और तरक्की को रोक देती है। सोफा भी फटा या टूटा हुआ नहीं होना चाहिए। उस पर बिछाई चादर भी गंदी न हो।
इन तस्वीरों को भी हटाएं :
ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल, डूबता जहाज, फव्वारे, जंगली जानवरों के चित्र और कांटेदार पौधों के चित्र से मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लगातार इन चित्रों को देखते रहने से जीवन में अच्छी घटनाएं बंद हो जाती हैं।
टूटी या खुली अलमारी :
घर या दुकान की कोई भी अलमारी टूटी न हो। इसके अलावा काम न होने पर अलमारी को हमेशा बंद रखें। अलमारी को बेवजह खुला रखने से धन पानी की तरह बह जाता है।
हटाएं अनावश्यक ताबीज :
लोग अनावश्यक पत्थर, नग, अंगूठी, ताबीज या अन्य सामान घर में कहीं रख देते हैं। कौनसा नग फायदा पहुंचा रहा है और कौन-सा नुकसान पहुंचा इसकी जानकारी किसी को नहीं होती। इसलिए ऐसे सामान को जल्द निकाल दें।
मकड़ी का जाला :
घर में बनने वाले मकड़ी के जाले घर-दुकान में कई तरह के वास्तु दोष पैदा करते हैं। इसलिए इसका होना अशुभ माना जाता है।
घर की छत :
घर की छत पर पड़ी गंदगी तंगी को बढ़ सकती है। घर की छत पर कबाड़ा या फालतू सामान बिल्कुल न रखें। इससे पितृ दोष भी उत्पन्न होता है

मानशिकता =

मानशिकता =
★★★★★★
आज हम बात करते है मानशिक शक्ति तो इन सब का कारक चन्द्रमा है और चन्द्रमा कुंडली मे जहाँ स्तिथ होता है वो ही हमारी जन्म राशि होती है चन्द्रमा की राशि है कर्क जो कि छाती फेफड़ो की कारक होता है और साथ साथ चन्द्रमा को मन का कारक भी बताया गया है जब चन्द्रमा हमारा कमजोर होता है तो हमें खासी , सर्दी , ज़ुकाम , टिब्बी निमोनिया आदि की शिकायत रहती है रहती है जिन बच्चों का चन्द्रमा कमजोर है उन बच्चो को सर्दी , ज़ुकाम बहुत जल्द होता है पर दूसरा पहलू यह भी है की वो मन का कारक है और मानशिकता का भी कारक है जब चन्द्रमा कुंडली मे कमजोर होता है पाप ग्रहों से पीड़ित होता है तो स्वभाव बहुत ही क्रूर और क्रोधी हो जाता है और मन की स्तिथि बहुत ही खराब हो जाएगी , एक बात को हजार बार बोलेगा , एक काम की टेंशन लेगा , ऐसा हो गया तो क्या होगा , मेरे साथ यह होगा वो होगा आदि आदि राहु आदि पाप ग्रहों का प्रभाव अधिक होगा तो अनजाना भय बना रहेगा , 8 भाव मे यह युति मूर्छा रोग आदि भी हो सकता है चन्द्रमा एक लग्न होता तो लग्न का काम करता है जब यह शुभ हो तो धन और मान समान आदि खूब देता है और इसके विपरीत जब यह असूभ होगा तो अपमानित कराएगा , चन्द्रमा जहाँ शुभ मान समान की वृद्धि करेगा , धन आदि देगा और स्वभाव सौम्य बनाएगा , असूभ मानशिक रोग विकार आदि पक्का देगा ,यह वैसे भी जितना अधिक सूर्य से दूर होगा उतना ही शुभ होगा , सूर्य के पास हो तो यह असूभ फल दाता हो जाता है चन्द्रमा की शांति के उपाय यही है कि सबसे पहले तो हमें पूर्णिमा का व्रत करना चाहिए , और साथ मे हमे सफेद चीजे , दूध चावल , चाँदी आदि का दान करना चाहिए , और साथ साथ मे भोले नाथ की पूजा से विशेष लाभ होता है जब चन्द्रमा पीड़ित हो तो जीवन मानशिक रूप से बहुत दुखी हो जाता है जिन लोगो को यह दिक्कत होती है उनको यह उपाय जरूर करने चाहिए राम राम 

ॐ उच्चारण के 11 शारीरिक, मानसिक एवं स्वास्थ्यगत लाभ :

ॐ उच्चारण के 11 शारीरिक, मानसिक एवं स्वास्थ्यगत लाभ :
ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।
ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।
ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।
जानीए
ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...
● *उच्चारण की विधि*
प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।
01) *ॐ और थायराॅयडः*
ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
*02) *ॐ और घबराहटः-*
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।
*03) *..ॐ और तनावः-*
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
*04) *ॐ और खून का प्रवाहः-*
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।
*5) ॐ और पाचनः-*
ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।
*06) ॐ लाए स्फूर्तिः-*
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।
*07) ॐ और थकान:-*
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।
*08) .ॐ और नींदः-*
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।
*09) .ॐ और फेफड़े:-*
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।
*10) ॐ और रीढ़ की हड्डी:-*
ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।
*11) ॐ दूर करे तनावः-*
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।
आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे । साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे जिनकी आपको फिक्र है ।
अपना ख्याल रखिये, खुश रहें । 

नवग्रह के प्रभाव

नवग्रह के प्रभाव
अगर आपकी जन्म तारीख पता नही है, तो लक्षण से पता करें।कि कौन सा ग्रह के कारण बीमारी या परेशानी है।
【1】सूर्य-
सूर्य की अशुभता से नेत्र रोग, उदर विकार, हृदय रोग ये रोग के लक्षण है।
मान सम्मान मे कमी आती है।धन का नाश होता है।
कर्ज यानि ऋण लेने को मजबूर या कर्ज में डूब जाना।
झूठे अभियोग लगते है।
【2】चंद्र-
चन्द्रमा के अशुभता में मानसिक दुर्बलता, मानसिक तनाव, चिंता माता की बीमारी, फेफड़ों के रोग,
और धन की कमी होती है।
【3】मंगल-
मंगल की अशुभता से होंठ और जिगर के रोग होता है।
कर्ज से परेशान और अपना घर बनाने का सपना अधूरा ही रह जाता है।
【4】बुध-
बुध की अशुभता से दांत एवं स्नायु रोग होता है।
वाणी का दोष और माता से अनबन भी मिलता है।
【5】गुरु-
गुरु की अशुभता से गले के रोग होते है।
पुत्र से कष्ट मिलता है, अधूरी शिक्षा, दाम्पत्य में कष्ट, और विवाह में बाधा मिलता है।
【6】शुक्र-
शुक्र की अशुभता से वैवाहिक सुख में कमी और सुखों का अभाव होता है।
【7】शनि-
शनि की अशुभता से दुर्घटना, अग्नि कांड, आरोग्य संतान, आंखों के रोग तथा पिता से वैमनस्या प्राप्त होती है।
【8】राहु-
राहु की अशुभता से सिर पर चोट लगती है, मानसिक रोग होता है।
राजकोप का शिकार होता हैं।और हर कार्य मे अड़चन पैदा होता है।
【9】केतु-
केतु की अशुभता से घुटनों मे दर्द, मूत्र विकार, होता है।
पुत्र संकट, विश्वासघात का शिकार होता है।पुत्र के द्वारा दुर्व्यवहार होता है।
उपाय:-
दस मुखी रुद्राक्ष धारण करे, दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से, नवग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
कहते है, इस रुद्राक्ष के धारण करता पर श्री हरि के दशावतार की पूर्ण कृपा रहती है।और साथ जी माँ लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती हैं।
यह उपाय सर्वग्रह बाधा शांतहोती है।
दशो दिशाओ में उसका प्रभाव रहता है, इसके प्रभाव से धारक को चहुँ ओर सफलता मिलती है।
यहाँ तक कि भूत प्रेत और किसी भी तरह की ऊपरी हवा का भय नही रहता तथा शत्रु से भी रक्षा होती है।
जिन लोगों की किसी प्रकार से वैवाहिक जीवन में समस्या आ रही है तो यह दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से ठीक हो जाता है।
रुद्राक्ष धारण मंत्र-” ॐ ह्रीं नमः “
धारण दिन- शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को।
मंत्र रुद्राक्ष की माला से 10 माला जप करना है।
दश मुखी रुद्राक्ष पिला और लाल धागा में धारण करने से पहले किसी भी शिव मंदिर में पहले शिव लिङ्ग में पहना कर तब धारण करे।
अत्यंत जरूरी बात,
की प्रति दिन श्री शिवरामाष्टक स्त्रोत्रं का पाठ करना बहुत ही लाभ दायक रहेगा।
हर हर महादेव, जय श्री हरि।

मनोकामना पूर्ति उपाय


गुरुवार के दिन एक हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में लेकर किसी भी पीपल के पेड़ के बांध आये उस पर खुशबू दर इतर छिड़क आये वहां पर ये बोल आये की है वरक्षराज में इस हल्दी की गांठ को 7 दिन के लिए आपको सौपकर जा रहा हु आप अपनी कृपा दृष्टि इस पर बनाये में इसको आज से 7 दिन बाद लेकर जाऊंगा प्रत्येक दिन गाठ के पास जाए इत्तर छिड़ककर ये ही बात बोले जैसे जैसे दिन कम हो वैसे वैसे बोलते जाए जैसे दूसरे दिन बोले कि आज से 6 दिन बाद ले जाऊंगा तीसरे दिन बोले कि आज से 5 दिन बाद ले जाऊंगा जाना रोजाना एक समय पर ही है
जब अगला बुधवार आये तो इतर छिड़ककर बोले कि में कल इसको लेकर जाऊंगा है हल्दी की गाठ आप तैयार रहे दूसरे दिन लाने से पहले एक लोटा पानी का डालकर एक दूध से बनी मिठाई वहां रखकर आये फिर हल्दी की गाठ को ले आये अपना जो भी कार्य हो उस हल्दी की गाठ की स्याही बनाकर कागज पर लिखे उस कागज को पीपल के पेड़ के पास पत्थर से दबाकर रख आएं अनुभूत प्रयोग है आपका उचित कार्य अवश्य होगा
जय महाकाल
जय श्रीराम