गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

तांबे के बर्तन का पानी पीने से दूर होते हैं ये रोग

तांबे के बर्तन का पानी पीने से दूर होते हैं ये रोग, पूजा में इसलिए करते हैं USE...
सोना, चांदी धातुएं महंगी है, जबकि तांबा इन दोनों की तुलना में सस्ता होने के साथ ही मंगल की धातु मानी गई। माना जाता है कि तांबे के बर्तन का पानी पीने से खून साफ होता है। इसलिए जब पूजा में आचमन किया जाता है तो अचमनी तांबे की ही रखी जाती है, क्योंकि पूजा के पहले पवित्र क्रिया के अंर्तगत हम जब तीन बार आचमन करते हैं तो उस जल से कई तरह के रोग दूर होते हैं और रक्त प्रवाह बढ़ता है। इससे पूजा में मन लगता है और एकाग्रता बढ़ती है। तांबे के इन्हीं गुणों के कारण इस धातु के बर्तनों को उपयोग करना बहुत अच्छा माना जाता है।
कहते हैं रात को तांबे के पात्र में पानी रख दें और सुबह इस पानी को पीने से अनेक फायदे होते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि यह पानी शरीर के कई दोषों को शांत करता है। साथ ही, इस पानी से शरीर के जहरीले तत्व बाहर निकल जाते हैं। रात को इस तरह तांबे के बर्तन में संग्रहित पानी को ताम्रजल के नाम से जाना जाता है। ये ध्यान रखने वाली बात है कि तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है। जिन लोगों को कफ की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें इस पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। बहुत कम लोग जानते हैं कि तांबे के बर्तन का पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में...
थायराइड को करता है नियंत्रित- 
थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण थायराइड की बीमारी होती है। थायराइड के प्रमुख लक्षणों में तेजी से वजन घटना या बढऩा, अधिक थकान महसूस होना आदि हैं। थायराइड एक्सपर्ट मानते है कि कॉपर के स्पर्श वाला पानी शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन को बैलेंस कर देता है। यह इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है। तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से रोग नियंत्रित हो जाता है।
स्किन को बनाए स्वस्थ- 
अधिकतर लोग हेल्दी स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स का उपयोग करते हैं। वो मानते हैं कि अच्छे कॉस्मेटिक्स यूज करने से त्वचा सुंदर हो जाती है, लेकिन ये सच नहीं है। स्किन पर सबसे अधिक प्रभाव आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसीलिए अगर आप अपनी स्किन को हेल्दी बनाना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में रातभर पानी रखें और सुबह उस पानी को पी लें। नियमित रूप से इस नुस्खे को अपनाने से स्किन ग्लोइंग और स्वस्थ लगने लगेगी।
हमेशा दिखेंगे जवान- 
कहते हैं, जो पानी ज्यादा पीता है उसकी स्किन पर अधिक उम्र में भी झुर्रियां दिखाई नहीं देती हैं। ये बात एकदम सही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप तांबे के बर्तन में जल को रखकर पिएं तो इससे त्वचा का ढीलापन आदि दूर हो जाता है। डेड स्किन भी निकल जाती है और चेहरा हमेशा चमकता हुआ दिखाई देता है।
गठिया में होता है फायदेमंद- 
आजकल कई लोगों को कम उम्र में ही गठिया और जोड़ों में दर्द की समस्या सताने लगती हैं। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो रोज तांबे के पात्र का पानी पिएं। गठिया की शिकायत होने पर तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीने से लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में ऐसे गुण आ जाते हैं, जिनसे बॉडी में यूरिक एसिड कम हो जाता है और गठिया व जोड़ों में सूजन के कारण होने वाले दर्द में आराम मिलता है।
पाचन क्रिया को ठीक करता है- 
एसिडिटी या गैस या पेट की कोई दूसरी समस्या होने पर तांबे के बर्तन का पानी अमृत की तरह काम करता है। आयुर्वेद के अनुसार, अगर आप अपने शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे रखा हुआ जल पिएं। इससे राहत मिलेगी और पाचन की समस्याएं भी दूर होंगी।
खून की कमी करता है दूर- 
एनीमिया या खून की कमी एक ऐसी समस्या है जिससे 30 की उम्र से अधिक की कई भारतीय महिलाएं परेशान हैं। कॉपर के बारे में यह तथ्य सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक है कि यह शरीर की अधिकांश प्रक्रियाओं में बेहद आवश्यक होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने का काम करता है। इसी कारण तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से खून की कमी या विकार दूर हो जाते हैं।
दिल को बनाए हेल्दी - 
तनाव आजकल सभी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसीलिए
दिल के रोग और तनाव से ग्रसित लोगों की संख्या तेजी बढ़ती जा रही है। यदि आपके साथ भी ये परेशानी है तो तो तांबे के जग में रात को पानी रख दें। सुबह उठकर इसे पी लें। तांबे के बर्तन में रखे हुए जल को पीने से पूरे शरीर में रक्त का संचार बेहतरीन रहता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है और दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।
कैंसर से लडऩे में सहायक- 
कैंसर होने पर हमेशा तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीना चाहिए। इससे लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल वात, पित्त और कफ की शिकायत को दूर करता है। इस प्रकार के जल में एंटी-ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो इस रोग से लडऩे की शक्ति प्रदान करते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, कॉपर कई तरीके से कैंसर मरीज की हेल्प करता है। यह धातु लाभकारी होती है।
सूक्ष्मजीवों को खत्म करता है-
तांबे की प्रकृति में ऑलीगोडायनेमिक के रूप में ( बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव) माना जाता है। इसीलिए इसके बर्तन में रखे पानी के सेवन से हानिकारक बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट किया जा सकता है।
इसमें रखे पानी को पीने से डायरिया, दस्त और पीलिया जैसे रोगों के कीटाणु भी मर जाते हैं, लेकिन पानी साफ और स्वच्छ होना चाहिए।
वजन घटाने में मदद करता है- कम उम्र में वजन बढऩा आजकल एक कॉमन प्रॉब्लम है। अगर कोई भी व्यक्ति वजन घटाना चाहता है तो एक्सरसाइज के साथ ही उसे तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीना चाहिए। इस पानी को पीने से बॉडी का एक्स्ट्रा फैट कम हो जाता है। शरीर में कोई कमी या कमजोरी भी नहीं आती है।

" राहू - केतू "

" राहू - केतू "
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप की पुत्री सिंहिका का विवाह विप्रचिर्ती नामक दानव के साथ हुआ था।
इन दोनों के योग से राहु का जन्म हुआ।
जन्मजात शूर-वीर, मायावी राहु प्रखर बुद्धि का था।
कहा जाता है कि उसने देवताओं की पंक्ति में बैठकर समुद्र मंथन से निकले अमृत को छल से प्राप्त कर लिया।
किन्तु इस सारे घटनाक्रम को सूर्यदेव तथा चंद्रदेव देख रहे थे।
उन्होंने सारा घटनाक्रम भगवान विष्णु को बता दिया।
तब क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु का मस्तक धड़ से अलग कर दिया ... किंतु राहु अमृतपान कर चुका था, इसलिए मरा नहीं, बल्कि अमर हो गया। उसके सिर और धड़ दोनों ही अमरत्व पा गए।
उसके धड़ वाले भाग का नाम केतु रख दिया गया।
इसी कारण राहु और केतु , सूर्य और चंद्र से शत्रुता रखते हैं और दोनों छाया ग्रह बनकर सूर्य व चंद्र को ग्रहण लगाकर प्रभावित करते रहते हैं।
राहू केतू कोई खगोलीय पिंड नहीं हैं, इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है।
मानव जीवन पर इन दोनों छाया ग्रहों का अत्यंत ही प्रभाव रहता है।
छाया ग्रह होने के कारण इन्हें किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है, किन्तु कुछ ज्योतिषी कन्या राशि को राहु और मीन को केतु की राशि मानते हैं।
राहु और केतु के द्वारा अनेक योगों का निर्माण होता है। इनमें काल सर्प योग सर्वाधिक चर्चित है।
सूर्य और राहु की युति के कारण पितृ दोष का निमार्ण होता है, जिससे जातक के कुटुंब की हानि होती है या उसे विषेष कष्ट का सामना करना पड़ता है।
चार ग्रह राहु से युत हों तो माला नानाप्रद योग का निर्माण होता है, इससे जातक को राजकीय वैभव और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
राहु व गुरु की युति से गुरु चांडाल योग बनता है जिसके फलस्वरूप जातक कपटी व अविश्वासी होता है।
शुक्र व राहु की युति से अभोत्वक योग,
बुध व राहु की युति से जड़त्व,
शनि व राहु की युति से नंदी,
मंगल व राहु की युति से अंगारक एवं
सूर्य और चंद्र के साथ राहु या केतु की युति से ग्रहण योग का निर्माण होता है।
- राहु ग्रह ... धोखेबाजों, सुखार्थियों, विदेशी भूमि में संपदा विक्रेताओं, ड्रग विक्रेताओं, विष व्यापारियों, निष्ठाहीन और अनैतिक कृत्यों, आदि का प्रतीक रहा है।
यह अधार्मिक व्यक्ति, निर्वासित, कठोर भाषणकर्त्ताओं, झूठी बातें करने वाले, मलिन लोगों का ध्योतक भी रहा है।
इसके द्वारा पेट में अल्सर, हड्डियों और स्थानांतरण की समस्याएं आती हैं।
राहु व्यक्ति के शक्तिवर्धन तथा शत्रुओं को मित्र बनाने में महत्वपूर्ण रूप से सहायक रहता है।
अनचाही समस्याएं राहू से आती हैं।
घर का दक्षिणी- पश्चिमी कोना राहू का है ... इस कोने में कभी गंदगी नहीं रहनी चाहिए। घर के दक्षिणी पूर्वी कोने में आवश्यक रूप से हरियाली का वास रखना चाहिए।
परिवार का जो सदस्य राहू से पीड़ित हो उसे हरियाली के पास रखें।
अंधेरे और गंदगी वाले कोनों में राहू का वास होता है, यदि प्रत्येक कोने को साफ और उजला रखेंगे तो राहू के खराब प्रभाव से दूर रहेंगे।
सात्विक खाने में यदि नियमित रूप से हींग का प्रयोग किया जाए तो राहू के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
चौके में बैठकर खाना खाने से राहू की दशा का खराब प्रभाव तक कम हो सकता है।
- केतु ग्रह ... अच्छी व बुरी आध्यात्मिकता एवं प्राकृतिक प्रभाव को भी दर्शाता है।
केतु हानिकर और लाभदायक, दोनों ही ओर माना जाता है,
क्योंकि ये जहां एक ओर दुःख एवं हानि देता है, वहीं दूसरी ओर एक व्यक्ति को देवता तक बना सकता है।
यह व्यक्ति को आध्यात्मिकता की ओर मोड़ने के लिये भौतिक हानि तक करा सकता है।
यह ग्रह तर्क, बुद्धि, ज्ञान, वैराग्य, कल्पना, अंतर्दृष्टि, मर्मज्ञता, विक्षोभ और अन्य मानसिक गुणों का कारक है।
मान्यता है कि केतु भक्त के परिवार को समृद्धि दिलाता है, सर्पदंश या अन्य रोगों के प्रभाव से हुए विष के प्रभाव से मुक्ति दिलाता है।
ये अपने भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, विदेश यात्राएं ,धन-संपदा व पशु-संपदा दिलाता है।
मनुष्य के शरीर में केतु अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
केतु स्वभाव से मंगल की भांति ही एक क्रूर ग्रह हैं तथा मंगल के प्रतिनिधित्व में आने वाले कई क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व केतु भी करता है।
जोड़ों का दर्द और पेशाब की बीमारी मुख्य रूप से केतू की समस्या के कारण आते हैं। कान बींधना, कुत्ता पालना केतू के खराब प्रभाव को कम करता है।
संतान को कष्ट होने और रोजगार की समस्या होने पर काला-सफेद कंबल साधु को देने से कष्ट दूर होता है।
चूंकि राहू और केतु छाया ग्रह हैं , ये दुर्गा-पूजन से शांत होते हैं क्योंकि देवी दुर्गा को ‘‘छायारूपेण’’ भी कहा गया है।
श्रावण मास में प्रतिदिन भगवान शंकर का जलाभिषेक करने से राहु-केतु , जातक का अनिष्ट नहीं कर पाते।
श्रावण के सोमवार का व्रत एवं सोलह सोमवार का व्रत दोनों राहु-केतु की शांति हेतु समान रूप से लाभकारी माने गए हैं।
पीड़ा कारक राहु-केतु को प्रसन्न करने के लिए उनके बीज मंत्रों का रात्रि में नियमित रूप से जप करें।
शिव सहस्रनाम और हनुमत् सहस्रनाम का नित्य पाठ करने से अनेक प्रकार की ग्रह पीड़ाएं शांत हो जाती हैं।
कन्यादान करने से राहु और कपिला गौ दान केतु के कोप की शांति होती है।
राहु के लिए हल्के नीले और केतु के लिए हल्के गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना और दान करना शांतिदायक होता है।
राहु-केतु की शांति के लिए 18-18 शनिवार राहु-केतु की पूजा करनी चाहिए और उपवास रखना चाहिए।
राहु की शांति के लिए श्वेत मलयागिरी चंदन का टुकड़ा नीले रेशमी वस्त्र में लपेटकर बुधवार को धारण करना चाहिए।
बुधवार या गुरुवार को अश्वगंध की जड़ का टुकड़ा आसमानी रंग के कपड़े में धारण करने से केतु पीड़ा का शमन होता है।
200 ग्राम चाय पत्ती 18 बुधवार दान करने से रोग कारक अनिष्टकारी राहु स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
यदि केतु रोग कारक हो तो रोग ग्रस्त जातक स्वयं अपने हाथों से कम से कम 7 बुधवार भिक्षुकों को हलुआ वितरण करे तो लाभ होगा।
राहु-केतु के अशुभत्व-निवारण के लिए उनके प्रिय रत्न गोमेद और लहसुनिया का दान करना चाहिए तथा धरण भी कारण चाहिये।
राहु दोष के लक्षण -
- मोटापे के कारण परेशानी
- अचानक दुर्घटना, लड़ाई-झगड़े की आशंका
- हर तरह के व्यापार में घाटा
उपाय -
- मां सरस्वती की आराधना करें।
- " ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः " मंत्र का 1 माला जप नित्य करें।
- तांबे के बर्तन में गुड़, गेहूं भरकर बहते जल में प्रवाहित करें।
- माता से संबंध मधुर रखें।
- 400 ग्राम धनिया, बादाम जल में प्रवाहित करें।
- घर की दहलीज के नीचे चांदी का पत्ता लगायें।
- सीढ़ियों के नीचे रसोईघर का निर्माण न करवायें।
- रात में पत्नी के सिर के नीचे 5 मूली रखें, सुबह मंदिर में दान कर दें।
- मां सरस्वती के चरणों में लगातार 6 दिन तक नीले पुष्प की माला चढ़ायें,
- चांदी की गोली हमेशा जेब में रखें।
- लहसुन, प्याज, मसूर के सेवन से परहेज करें.
केतु दोष के लक्षण -
- बुरी संगत के कारण धन का हानि।
- जोड़ों के दर्द से परेशानी।
- संतान का भाग्योदय न होना, स्वास्थ्य के कारण तनाव ।
उपाय-
- भगवान गणेश की आराधना करें।
- " श्रीं ॐ गं " मंत्र का 1 माला जप नित्य करें।
- गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
- कुंवारी कन्याओं का पूजन करें, पत्नी का अपमान न करें।
- घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ तांबे की कील लगायें।
- पीले कपड़े में सोना, गेहूं बांधकर कुल पुरोहित को दान करें।
- दूध, चावल, मसूर की दाल का दान करें।
- बाएं हाथ की अंगुली में सोना पहनने से लाभ।
- 43 दिन तक मंदिर में लगातार केला दान करें।
- काले व सफेद तिल बहते जल में प्रवाहित करें।
राहू मंत्र -
" ॐ अर्धकायं महावीर्य चंद्रादित्य विमर्दनम्
सिंहिका गर्भ संभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ! "
" ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: "
" ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहु प्रचोदयात् "
केतु मंत्र-
" ॐ पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम्
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम "
" ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम: "
" ॐ पद्मपुत्राय विद्‍महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो केतु: प्रचोदयात् "
!! ॐ नमः शिवाय !!

ज्ञान की बातें.....

ज्ञान की बातें.....
१. घर में कुछ देर भजन अवश्य लगाएं। 
२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर न लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरें अन्यथा घर में लाभ में कमी हो जाती है, झाड़ू हमेशा छुपाकर रखें। 
३. बिस्तर पर बैठकर भोजन न करें, इससे दुःस्वप्न आते हैं। 
४. घर में जूते चप्पल इधर-उधर बिखेरकर या उल्टे करके नहीं रखने चाहिए, इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है। 
५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठकर करनी चाहिए। पूजा का आसन जूट अथवा कुश का हो तो उत्तम है।
६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है।
७. पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें, जो जितना संभव हो, ईशान कोण के हिस्से में हो।
८. आरती, दीप, पूजा, अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवनकुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में।
१०. घर के मुख्यद्वार पर दांयी तरफ स्वास्तिक बनाएं।
११. घर में कभी भी जाले न लगने दें अन्यथा भाग्य व कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है।
१२. सप्ताह में एक बार अवश्य समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोंछा लगाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है।
१३. कोशिश करें कि सुबह के प्रकाश की किरणें सबसे पहले आपके पूजाघर तक जरूर पहुंचे।
१४. पूजाघर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ति है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करें।



90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज
नहीं रहना चाहिए।


अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेंगे ।
- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1
घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
- 80 रोग चाय पीने से होते हैं ।
- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ीआंत सिकुड़ जाती है।
- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द
हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल
पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम
हो जाती है और
शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से
आँखें कमजोर हो जाती हैं।
- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।
- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़
की हड्डी को हानि होती है।
- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप
(ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय
(टीबी) होने का डर रहता है।
- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है
मलेरिया नहीं होता है।
- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी,
पुदीना, मौसमी,
सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज
औशधियां हैं।
- भोजन के पश्चात् गुड़ या सौंफ खाने से पाचन
अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर
होती है।
- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएं
आदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज)
पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के
रोग) तथा हैजा से बचाता है।
- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल
नहीं पीना चाहिए।
- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके
पश्चात्
उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं
के खाने लायक भी नहीं रहता है।। - मिट्टी के बर्तन में
भोजन पकाने से पोशकता 100% कांसे के बर्तन में 97%
पीतल के बर्तन में 93% अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर
कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा,
मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग
करना चाहिए।
- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके बाद
काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान
होता है।
- सरसों, तिल,मूंगफली या नारियल का तेल
ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए । रिफाइंड
तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से
आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20
मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है।
- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची)
चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर
होता है।
-बर्तन मिटटी के ही परयोग करन चाहिए।
- टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर
दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे।
(आँखों के रोग में दातून नहीं करना)

मूक पशुएं और सौदर्य प्रसाधन

मूक पशुएं और सौदर्य प्रसाधन
फैशन और सौंदर्य के दिखावे के कारण आज मानव इतना निर्दयी हो गया है कि उसको किसी भी प्राणी को बेरहमी से मारने में कोई हिचक नहीं होती.‘फर’ और ‘मखमली’ कोटों,सुगंधित शैम्पू,खाल से बने पर्स आदि की मांग लगातार बढ़ती जा रही है.यह सब अनेक मूक प्राणियों को बर्बरतापूर्वक वध करके प्राप्त किया जाता है.आख़िर इन मूक और बेजुबान पशुओं का कसूर क्या है?
खरगोश,लोमड़ी आदि को फार्मों में तब तक पाला जाता है जब तक कि इनकी खाल उतरने लायक न हो जाए.इनको क्लोरोफॉर्म युक्त एयरटाइट चैम्बरों में रखा जाता है.साँस न ले पाने के कारण यह धीरे-धीरे मर जाते हैं और फिर इनसे फर कोट तैयार किया जाता है.पानी में रहने वाला ‘मिंक’ नामक जानवर, कभी-कभी बाहर आते ही अपनी नरम और मुलायम खाल के कारण मौत का शिकार हो जाता है.दक्षिण अफ्रीका में पाया जाने वाला ‘चिनचिल’ नामक जानवर भी अकारण मौत का शिकार होता है.इनकी खालों से कोट बनाया जाता है.
‘फर’ उद्योग में काफी मूल्यवान समुद्री ‘सील’ मछली लगभग 450 कि.ग्रा. तक की होती है,लेकिन इसके छोटे –छोटे बच्चों का ‘फर’ काफी मुलायम तथा मूल्यवान होता है.इसके दो हफ्ते के बच्चे को माँ से अलग कर दिया जाता है.उसको डंडों से तब तक मारा जाता है जब तक कि वह मर न जाए.फिर एक सलाख बच्चे के सिर में घुसा दी जाती है.
चमड़ा ख़राब होने के डर से इसको गोली नहीं मारी जाती.कभी-कभी तो मरने से पहले बेहोशी की हालत में ही तुरंत खाल उतारने के लिए उसको चीर दिया जाता है.बेबस और लाचार सील अपने बच्चे का करूण क्रंदन सुनती और देखती रहती है.खाल उतारने के बाद खून से लथपथ मांस के लोथड़े को सूंघती है.लेकिन उसी के ‘फर से बना कोट कितने शौक से पहना जाता है.एक ‘फर’ कोट के लिए 5-6 सील,4-5 चीते,35 मिंक,उदबिलाव या खरगोश,10 बनविलाव,40 अमेरिकी रेकुम भालू चाहिए.
उदबिलाव को पकड़ने के लिए नुकीले दांतों वाला लोहे का पिंजरा होता है.ये पिंजरे काफी मात्रा में जंगल में बिछा दिये जाते हैं.इन पिंजरों मरण पैर फंसने पर उदबिलाव छोटने के लिए तड़पते रहते हैं.इसी हालत में लगभग 15-20 दिन भूखे-प्यासे रहते हैं.मरने पर उनके शरीर की खाल उधेड़ कर ‘फर’ कोट बनाये जाते हैं.
इसी प्रकार व्हेल मछली का शिकार एक ऐसे ‘हार्पून ग्रिनेड’ की मदद से किया जाता है जो इसके शरीर में जाकर फटते हैं.मरते समय अत्यधिक वेदना की वजह से एक विचित्र सी चीख की आवाज आती है.कुछ लोग इसका मांस खाते हैं.इसकी खाल से निकलने वाला तेल मिसाइल के पुर्जों में डाला जाता है.
सुगंधित तेल एवं अन्य प्रसाधन सामग्री के लिए कछुओं को भी नहीं छोड़ा जाता.समुद्र और नदियों से पकड़कर उन्हें बोरों में भरकर ट्रकों और ट्रेनों में लाड दिया जाता है.जीवित हालत में ही इनका मांस निकल लिया जाता है और वे बहुत धीरे-धीरे मरते हैं.इससे ‘टार्टिल ओडल’ बनता है जो मास्चराइजर्स के काम आता है.कछुओं की तस्करी भी की जाती है.दुनियां का तमाम हिस्स्नों में वन्य जीव अधिनियम लागू होने के बाद भी इन पधुओं का अवैध कारोबार चलता रहता है.
शैम्पू के लिए खरगोशों को मारा जाता है.शैम्पू की दो-तीन बूंदें खरगोश की आँखों में डाली जाती हैं,जिससे पता चल जाए कि उसको कितनी जलन एवं खुजली होती है.कुछ देर तक वह यों ही पड़ा रहता है.उसकी आँखों में छाले पड़ जाते हैं और वह पूरी तरह अँधा हो जाता है.इसके बाद वह मर जाते हैं.यह सब सिर्फ शैम्पू के परीक्षण के लिए किया जाता है जिससे इंसानों के बाल मुलायम और चमकीले रह सकें.इसी प्रकार आफ्टर शेव लोशन का भी सूअर पर परीक्षण किया जाता है.सुअरों के बालों का प्रयोग विविध प्रकार की वस्तुएं बनाने में किया जाता है.
जंगलों में रहने वाले साँपों को भी जिंदा मारा जाता है.सांप के सर पर एक बड़ी कील रखकर हथौड़े से वार किया जाता है.कुछ ही क्षणों में सांप तड़पने लगता है.तब एक आदमी सांप की पूँछ को पैर से दबाकर ब्लेड से चीरता है.एक चीरा गले पर लगाया जाता है.सांप की खाल जिंदा रहते ही उतार ली जाती है.सांप के लोथड़े से प्राण उसके बाद भी नहीं निकलते.कुत्ते या अन्य जानवर उसे जिंदा नोच-नोचकर खाते रहते हैं,सिर्फ इसलिए कि इससे आकर्षक लेडीज बैग,पर्स आदि बनाया जा सके.
नेवला,जो साधारणतया किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता,इसे भी लोहे की गरम चदों से पीत-पीटकर अधमरा किया जाता है या फिर बिल से बाहर आते ही शिकंजे में इसकी गर्दन फंसाकर जरा सी मोड़ दी जाती है और वह मर जाता है.यह सब इसकी खाल के लिए किया जाता है.
कंगारू के मरते ही,उसके मृत शरीर के सारे अंग काम में ले लिए जाते हैं.सिर्फ अंडकोष वाला हिस्सा बेकार रहता है.
आस्ट्रेलिया के इयान बर्ट्स ने इससे पर्स बनाकर बेचने का इरादा किया और ऐसी विधि विकसित कर ली कि इसे रेजगारी रखने के पारंपरिक बटुओं के रूप में लोकप्रियता मिल गई. इन बटुओइन बटुओं को खरीदने वाले जापानी पर्यटक इसे सुख और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं.इसलिए जापानी लोग उर्वरता की देवी की पूजा करने की सारी सामग्री इन्हीं बटुओं में रखने लगे.
धीरे-धीरे इयान के बटुए ने उन्हें करोड़पति बना दिया.अपनी दौलत तथा समृद्धि को जापानियों की कृपा मानने वाले इयान ने जापान में कंगारू फार्म खोला और कंगारू की दुम का सूप बेचने लगा.अनेक कंगारू असमय ही कालकवलित होने लगे.
हाथी दांत को प्राप्त करने के लिए प्रतिवर्ष कितने हाथी मारे जाते थे.हालाँकि वन्य जीव अधिनियम का कड़ाई से पालन होने पर इनकी मौतों पर रोक लगी है लेकिन दुनियां के कई हिस्सों में उस सिलसिला बदस्तूर जारी है.जानवरों में सबसे वफादार कुत्ता है.हंगरी के ‘शेफर्ड’ एवं ‘डलमेशियन’,’मास्टिफ’,विश्व का सबसे विशालकाय कुत्ता ‘जोरबा’,आस्ट्रेलियन कुत्ता ‘जोरबा’ जैसी कई नस्लें हैं.लेकिन इंसान ने इसे भी नहीं छोड़ा.एक विशेष नस्ल के कुत्तों को एक साथ खड़ा करके करेंट प्रवाहित कराया जाता है और भयंकर पीड़ा से छटपटाते कुत्तों का झुंड दम तोड़ देता है.इनके कानों का उपयोग पर्स बनाने के लिए होता है.
खाल के लालच में बाघ,कस्तूरी के लिए प्रति वर्ष कई हजार कस्तूरी मृग मारे जाते हैं.कस्तूरी एक सुगंधित पदार्थ है जो नर कस्तूरी मृग के पेट में लटक रहे अंडे के आकार की एक गिल्टी से प्राप्त होती है.ऐसा समझा जाता है कि वह अपने शरीर में पाए जाने वाली कस्तूरी की सुगंध से बेचैन पूरे जंगल में इसको खोजता रहता है.यह मृग इतना संगीत प्रेमी होता है कि बांसुरी या किसी सुरीली आवाज से मुग्ध होकर एकांत में खड़ा हो जाता है और शिकारी इस तन्मयता का लाभ उठाकर इसे मार डालते हैं.
स्वेटरों के लिए ऊन भेड़ के बालों से बनाया जाता है,लेकिन कराकुल भेड़ के बाल काफी बड़े और नरम तथा घुंघराले होते हैं.मेमने के जन्म लेते ही उस भेड़ के बाल कम मुलायम रह जाते हैं.इसलिए मादा भेड़ पर गर्भावस्था में ही लाठी-डंडों से तब तक प्रहार किया जाता है जबतक कि वह मर न जाए.मरते ही उसके पेट से मेमने को बाहर निकाल लिया जाता है.कभी-कभी तो मरने का इंतजार किये बिना ही उसके शरीर से खाल उतार ली जाती है जिससे कपड़े,टोपी आदि तैयार होती है.
एक स्वस्थ पर्यावरण के लिए मानव समाज के साथ पशुओं का होना भी जरूरी है.कई जानवरों की संख्या में आई कमी के मद्देनजर इनकी सुरक्षा के लिए कार्यक्रम लागू किये गए हैं.लेकिन पर्याप्त जागरूकता,मूक पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के अभाव के कारण बेजुबान पशुओं का मारा जाना बदस्तूर जारी है,यह चिंता का विषय है.
राजीव कुमार झा
'मूक पशुएं और सौदर्य प्रसाधन
फैशन और सौंदर्य के दिखावे के कारण आज मानव इतना निर्दयी हो गया है कि उसको किसी भी प्राणी को बेरहमी से मारने में कोई हिचक नहीं होती.‘फर’ और ‘मखमली’ कोटों,सुगंधित शैम्पू,खाल से बने पर्स आदि की मांग लगातार बढ़ती जा रही है.यह सब अनेक मूक प्राणियों को बर्बरतापूर्वक वध करके प्राप्त किया जाता है.आख़िर इन मूक और बेजुबान पशुओं का कसूर क्या है?
खरगोश,लोमड़ी आदि को फार्मों में तब तक पाला जाता है जब तक कि इनकी खाल उतरने लायक न हो जाए.इनको क्लोरोफॉर्म युक्त एयरटाइट चैम्बरों में रखा जाता है.साँस न ले पाने के कारण यह धीरे-धीरे मर जाते हैं और फिर इनसे फर कोट तैयार किया जाता है.पानी में रहने वाला ‘मिंक’ नामक जानवर, कभी-कभी बाहर आते ही अपनी नरम और मुलायम खाल के कारण मौत का शिकार हो जाता है.दक्षिण अफ्रीका में पाया जाने वाला ‘चिनचिल’ नामक जानवर भी अकारण मौत का शिकार होता है.इनकी खालों से कोट बनाया जाता है.
‘फर’ उद्योग में काफी मूल्यवान समुद्री ‘सील’ मछली लगभग 450 कि.ग्रा. तक की होती है,लेकिन इसके छोटे –छोटे बच्चों का ‘फर’ काफी मुलायम तथा मूल्यवान होता है.इसके दो हफ्ते के बच्चे को माँ से अलग कर दिया जाता है.उसको डंडों से तब तक मारा जाता है जब तक कि वह मर न जाए.फिर एक सलाख बच्चे के सिर में घुसा दी जाती है.
चमड़ा ख़राब होने के डर से इसको गोली नहीं मारी जाती.कभी-कभी तो मरने से पहले बेहोशी की हालत में ही तुरंत खाल उतारने के लिए उसको चीर दिया जाता है.बेबस और लाचार सील अपने बच्चे का करूण क्रंदन सुनती और देखती रहती है.खाल उतारने के बाद खून से लथपथ मांस के लोथड़े को सूंघती है.लेकिन उसी के ‘फर से बना कोट कितने शौक से पहना जाता है.एक ‘फर’ कोट के लिए 5-6 सील,4-5 चीते,35 मिंक,उदबिलाव या खरगोश,10 बनविलाव,40 अमेरिकी रेकुम भालू चाहिए.
उदबिलाव को पकड़ने के लिए नुकीले दांतों वाला लोहे का पिंजरा होता है.ये पिंजरे काफी मात्रा में जंगल में बिछा दिये जाते हैं.इन पिंजरों मरण पैर फंसने पर उदबिलाव छोटने के लिए तड़पते रहते हैं.इसी हालत में लगभग 15-20 दिन भूखे-प्यासे रहते हैं.मरने पर उनके शरीर की खाल उधेड़ कर ‘फर’ कोट बनाये जाते हैं.
इसी प्रकार व्हेल मछली का शिकार एक ऐसे ‘हार्पून ग्रिनेड’ की मदद से किया जाता है जो इसके शरीर में जाकर फटते हैं.मरते समय अत्यधिक वेदना की वजह से एक विचित्र सी चीख की आवाज आती है.कुछ लोग इसका मांस खाते हैं.इसकी खाल से निकलने वाला तेल मिसाइल के पुर्जों में डाला जाता है.
सुगंधित तेल एवं अन्य प्रसाधन सामग्री के लिए कछुओं को भी नहीं छोड़ा जाता.समुद्र और नदियों से पकड़कर उन्हें बोरों में भरकर ट्रकों और ट्रेनों में लाड दिया जाता है.जीवित हालत में ही इनका मांस निकल लिया जाता है और वे बहुत धीरे-धीरे मरते हैं.इससे ‘टार्टिल ओडल’ बनता है जो मास्चराइजर्स के काम आता है.कछुओं की तस्करी भी की जाती है.दुनियां का तमाम हिस्स्नों में वन्य जीव अधिनियम लागू होने के बाद भी इन पधुओं का अवैध कारोबार चलता रहता है.
शैम्पू के लिए खरगोशों को मारा जाता है.शैम्पू की दो-तीन बूंदें खरगोश की आँखों में डाली जाती हैं,जिससे पता चल जाए कि उसको कितनी जलन एवं खुजली होती है.कुछ देर तक वह यों ही पड़ा रहता है.उसकी आँखों में छाले पड़ जाते हैं और वह पूरी तरह अँधा हो जाता है.इसके बाद वह मर जाते हैं.यह सब सिर्फ शैम्पू के परीक्षण के लिए किया जाता है जिससे इंसानों के बाल मुलायम और चमकीले रह सकें.इसी प्रकार आफ्टर शेव लोशन का भी सूअर पर परीक्षण किया जाता है.सुअरों के बालों का प्रयोग विविध प्रकार की वस्तुएं बनाने में किया जाता है.
जंगलों में रहने वाले साँपों को भी जिंदा मारा जाता है.सांप के सर पर एक बड़ी कील रखकर हथौड़े से वार किया जाता है.कुछ ही क्षणों में सांप तड़पने लगता है.तब एक आदमी सांप की पूँछ को पैर से दबाकर ब्लेड से चीरता है.एक चीरा गले पर लगाया जाता है.सांप की खाल जिंदा रहते ही उतार ली जाती है.सांप के लोथड़े से प्राण उसके बाद भी नहीं निकलते.कुत्ते या अन्य जानवर उसे जिंदा नोच-नोचकर खाते रहते हैं,सिर्फ इसलिए कि इससे आकर्षक लेडीज बैग,पर्स आदि बनाया जा सके.
नेवला,जो साधारणतया किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता,इसे भी लोहे की गरम चदों से पीत-पीटकर अधमरा किया जाता है या फिर बिल से बाहर आते ही शिकंजे में इसकी गर्दन फंसाकर जरा सी मोड़ दी जाती है और वह मर जाता है.यह सब इसकी खाल के लिए किया जाता है.
कंगारू के मरते ही,उसके मृत शरीर के सारे अंग काम में ले लिए जाते हैं.सिर्फ अंडकोष वाला हिस्सा बेकार रहता है.
आस्ट्रेलिया के इयान बर्ट्स ने इससे पर्स बनाकर बेचने का इरादा किया और ऐसी विधि विकसित कर ली कि इसे रेजगारी रखने के पारंपरिक बटुओं के रूप में लोकप्रियता मिल गई. इन बटुओइन बटुओं को खरीदने वाले जापानी पर्यटक इसे सुख और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं.इसलिए जापानी लोग उर्वरता की देवी की पूजा करने की सारी सामग्री इन्हीं बटुओं में रखने लगे.
धीरे-धीरे इयान के बटुए ने उन्हें करोड़पति बना दिया.अपनी दौलत तथा समृद्धि को जापानियों की कृपा मानने वाले इयान ने जापान में कंगारू फार्म खोला और कंगारू की दुम का सूप बेचने लगा.अनेक कंगारू असमय ही कालकवलित होने लगे.
हाथी दांत को प्राप्त करने के लिए प्रतिवर्ष कितने हाथी मारे जाते थे.हालाँकि वन्य जीव अधिनियम का कड़ाई से पालन होने पर इनकी मौतों पर रोक लगी है लेकिन दुनियां के कई हिस्सों में उस सिलसिला बदस्तूर जारी है.जानवरों में सबसे वफादार कुत्ता है.हंगरी के ‘शेफर्ड’ एवं ‘डलमेशियन’,’मास्टिफ’,विश्व का सबसे विशालकाय कुत्ता ‘जोरबा’,आस्ट्रेलियन कुत्ता ‘जोरबा’ जैसी कई नस्लें हैं.लेकिन इंसान ने इसे भी नहीं छोड़ा.एक विशेष नस्ल के कुत्तों को एक साथ खड़ा करके करेंट प्रवाहित कराया जाता है और भयंकर पीड़ा से छटपटाते कुत्तों का झुंड दम तोड़ देता है.इनके कानों का उपयोग पर्स बनाने के लिए होता है.
खाल के लालच में बाघ,कस्तूरी के लिए प्रति वर्ष कई हजार कस्तूरी मृग मारे जाते हैं.कस्तूरी एक सुगंधित पदार्थ है जो नर कस्तूरी मृग के पेट में लटक रहे अंडे के आकार की एक गिल्टी से प्राप्त होती है.ऐसा समझा जाता है कि वह अपने शरीर में पाए जाने वाली कस्तूरी की सुगंध से बेचैन पूरे जंगल में इसको खोजता रहता है.यह मृग इतना संगीत प्रेमी होता है कि बांसुरी या किसी सुरीली आवाज से मुग्ध होकर एकांत में खड़ा हो जाता है और शिकारी इस तन्मयता का लाभ उठाकर इसे मार डालते हैं.
स्वेटरों के लिए ऊन भेड़ के बालों से बनाया जाता है,लेकिन कराकुल भेड़ के बाल काफी बड़े और नरम तथा घुंघराले होते हैं.मेमने के जन्म लेते ही उस भेड़ के बाल कम मुलायम रह जाते हैं.इसलिए मादा भेड़ पर गर्भावस्था में ही लाठी-डंडों से तब तक प्रहार किया जाता है जबतक कि वह मर न जाए.मरते ही उसके पेट से मेमने को बाहर निकाल लिया जाता है.कभी-कभी तो मरने का इंतजार किये बिना ही उसके शरीर से खाल उतार ली जाती है जिससे कपड़े,टोपी आदि तैयार होती है.
एक स्वस्थ पर्यावरण के लिए मानव समाज के साथ पशुओं का होना भी जरूरी है.कई जानवरों की संख्या में आई कमी के मद्देनजर इनकी सुरक्षा के लिए कार्यक्रम लागू किये गए हैं.लेकिन पर्याप्त जागरूकता,मूक पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के अभाव के कारण बेजुबान पशुओं का मारा जाना बदस्तूर जारी है,यह चिंता का विषय है.

18 लाख करोड़ का है इस बार का बजट !



18 लाख करोड़ का है इस बार का बजट !
वैसे तो 17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ का है
लेकिन हम मोटा-मोटा 18 लाख करोड़ मान लेते है
लेकिन ये बजट होता क्या है ??
आखिर क्या अर्थ है इस 18 लाख करोड़ रूपये का ??
तो मित्रो साधारण व्यक्ति की भाषा मे समझो बजट को !
_____________________________
आपका परिवार है परिवार चलाने वाले मुख्या को महीने की पहली तारीक को पगार मिलती
फिर वो तय करता है की इसे कहाँ-कहाँ और कितना कितना खर्च करना है !
ऐसे ही देश भी एक परिवार है देश चलाने वाली केंद्र सरकार को आम जनता tax के रूप मे पैसा देती है जिससे सरकार बजट बनाती है ! और तय करती है इसे कहाँ-कहाँ और कितना कितना धन खर्च करना है !
देश मे 28 फरवरी को केंद्र सरकार द्वारा बजट पेश किया जाता है
तो बजट है 18 लाख करोड़ का !
आप ऐसा समझ लीजिये की 28 फरवरी 2015 से अगले वर्ष 27 फरवरी 2016
तक ( एक वर्ष मे ) भारत की केंद्र सरकार देश मे 18 लाख करोड़ रूपये खर्च करेगी !
अगर 18 लाख करोड़ सरकार खर्च करेगी ,तो हम पहले ये जान ले की ये
18 लाख करोड़ सरकार ने कहाँ से जुटाया ??
तो मित्रो 18 लाख करोड़ मे से 1141575 ( 11 लाख 41 हजार 575 ) करोड़
रूपये इस देश की जनता ने सरकार को tax दिया है !!
tax थोड़ा विस्तार से जान लीजिये ! (आंखड़े करोड़ मे )
_________________________
निगम कर -( Corporation Tax )--------> 470628 करोड़
आय कर - ( Taxes on Income )-------> 327367 करोड़
सीमा शुल्क ( Customs )-------------> 208336 करोड़
केंद्रीय उत्पाद ( Union Excise Duties ) ----> 229808 करोड़
शुल्क
सेवा कर Service Tax) -----------------> 209774 करोड़
संघ राज्य क्षेत्रों के कर ( Taxes of union )-----> 3577 करोड़
__________________________________
तो ये कुल सकल कर (Gross Tax Revenue frown emoticon 14,49,490 करोड़
फिर इसमे राष्ट्रीय आपदा (NCCD ) घटा दिया जाता है --> 5690 - करोड़
और फिर थोड़ा राज्यो का हिस्सा घटाया जाता है ----------> 523958 - करोड़
और अंत भिन्न कर जोड़ा जात है------------------------> + 221733 करोड़
और अंत कुल घटा कर और जोड़ कर सरकार के पास पहुंचा 11,41,575 करोड़ !
तो 18 लाख करोड़ मे से 1141575 ( 11 लाख 41 हजार 575 ) करोड़ तो सरकार ने राजस्व जनता से tax से जुटाया !
________________________
इसके अतिरिक्त सरकार सरकारी उदमों को कुछ कर्ज देती है .उसकी वसूली करती है
और कुछ public sector जैसे coal india ,NHPC ,BHEL आदि मे हिस्सेदरी बेच कर धन कमाती है जो Non-debt Receipts मे आता है
तो वहाँ से आया है = 80,253 करोड़ !
तो मित्रो tax का हो गया 1141575 ( 11 लाख 41 हजार 575 ) करोड़
और उसमे आप Non-debt Receipts जोड़ लीजिये 80,253 करोड़
तो कुल सरकार ने धन जुटाया 12,21,828 करोड़ !! जिसमे जनता ने tax दिया है
( 11 लाख 41 हजार 575 ) करोड़ !
____________________________
लेकिन क्या आप जानते है? सरकार ने 13,12,200 ( 13 लाख 12 हजार 200 ) करोड़
रूपये Non-Plan Expenditure ( आयोजना भिन्न व्यय ) पर खर्च कर दिया ? frown emoticon frown emoticon
अर्थात आपका सारा tax का पैसा तो Non-Plan Expenditure
मे ही खर्च हो गया frown emoticon frown emoticon
___________________
ये Non-Plan Expenditure क्या होता है ???
Non-Plan Expenditure अर्थात व्यवस्था (system ) को चलाने का
खर्चा ?
कैसी व्यवस्था ?
पुलिस की व्यवस्था ,सेना की व्यवस्था कानून की व्यवस्था ,न्याय की व्यवस्था ,प्रशासन की व्यवस्था ,संसद की व्यवस्था , 543 MP की पगारे ,प्रधानमंत्री राष्ट्रपति ,उप राष्ट्रपतियों की पगारे,उनके महंगाई भत्ते ,सुरक्षा के खर्चे ,फोन के बिल ,हवाई जहाज के खर्चे ,अस्तपातालों के खर्चे , विदेशी यात्राओ के खर्चे , बिजली के बिल ,
(पिछले कर्जे के लिए व्याज पर खर्चा) , सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र बैंको मे काम करने वाले ,बीमा कंपनियो मे काम करने वाले ,डाक विभाग मे काम करने वाले ,आयकर विभाग मे काम करने उनकी मोटी-मोटी पगारे ,ऐसे अन्य public sector ! साल मे दो बार बढ़ता महंगाई भत्ता ,रिटायर्ड कर्मचरियों की पैनश्नों मे हर साल वृद्धि !!
और तो और सरकारी कर्मचारी तो 60 साल की आयु मे रिटायर्ड होता ! जबकि मंत्री एक बार चुनाव लड़े जीत जाए अगली बार लड़े हार जाए ,तो उसकी पेंशन लग जाती है सारी ज़िंदगी की ! चाहे कभी दुबारा चुनाव लड़े ना लड़े ! और सरकार के खजाने से मुंह मारते रहते है ये नेता !
तो मित्रो आप समझ लीजिये इस देश की दुर्दशा की आपके द्वारा सारा साल मे दिया गया direct tax और सुबह से शाम तक आप जो कुछ भी खरीदते उसके माध्यम से दिया गया indirect tax सरकार द्वारा जुटाया गया कुल राजस्व 12,21,828 ( 12 लाख 21 हजार 828 ) करोड़ है उससे भी 90372 करोड़ ज्यादा ( 13 लाख 12 हजार 200) ज्यादा सरकार ने तो Non-Plan Expenditure अर्थात व्यवस्था (system ) को चलाने मे खर्च कर डाला !
आपके लिए देश के विकास के लिए तो सरकार के पास फूटी-कोड़ी भी नहीं है ??
प्रभु श्री राम रामायण मे बोलकर गए है की व्यवस्था चलाने का खर्च कुल बजट का 5 %
से अधिक नहीं होना चाहिए ! और यहाँ राम राज्य के सबसे बड़े ठेकेदार हमारे नेता
कुल बजट का 75 से 80% व्यवस्था चलाने मे खर्च कर रहे है ! और कह रहे है हम राम राज्य
लाएँगे !
तो मित्रो अब आपके मन मे ये सवाल आएगा की बजट मे जो इतनी सारी घोषनाए हुई है
जो मीडिया मे भी दिखाई गई है की 100 करोड़ यहाँ खर्च होंगे,200 करोड़ वहाँ खर्च होंगे
500 crore यहाँ होंगे ,900 करोड़ वहाँ खर्च होंगे तो ये सब क्या है ??
तो इसके बारे मे भी आराम से जान लीजिये मित्रो ये क्या है ?
______________________________
जैसा की आप जानते है की कुल बजट है 18 लाख करोड़ का है !
वैसे तो 17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ का है
जिसमे से 1141575 ( 11 लाख 41 हजार 575 करोड़ तो सरकार ने जनता से tax से जुटाया ! इसके अतिरिक्त Non-debt Receipts से जो आया था = 80,253 करोड़
दोनों को जोड़ के तो कुल सरकार ने जो धन जुटाया वो
12,21,828 (12 लाख 21 हजार 828 ) करोड़ है !! जो लगभग सारा का सारा non plan expendture मे गया !
लेकिन बजट मे सरकार को जो खर्च करना है वो है
17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ !
तो 17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ मे से
12,21,828 (12 लाख 21 हजार 828 ) करोड़ घटा दीजिये
तो बाकी 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 ) करोड़ कहाँ से आया ??
तो ये मित्रो 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 ) करोड़ सरकार ने
नया कर्ज लिया है !!
जी हाँ पूरे 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 ) का नया कर्ज !
आपकी जानकारी के लिए कह दूँ पिछले बजट से पहले हमारा देश पर 56 लाख करोड़ के कर्जे मे डूबा हुआ था फिर पिछले बजट मे मोदी सरकार ने 531177 ( 5 लाख 31 हजार 177 ) करोड़ का नया कर्ज लिया और कुल कर्जा 62 लाख करोड़ को पार कर गया !
और इस बजट मे मोदी सरकार 531177 ( 5 लाख 31 हजार 177 ) करोड़ कर्ज और नया कर्ज लेगी जिससे कुल कर्जा 68 लाख करोड़ को पार कर जाएगा !!
मुझे आशा है अब आपको सारी बात समझ मे आ गई होगी !
की बजट मे कुल खर्चा सरकार को करना है वो है !
17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ !
सरकार ने जो कुल धन जुटाया था वो था 12,21,828 करोड़ उससे भी ज्यादा सरकार ने Non-Plan Expenditure अर्थात व्यवस्था (system ) को चलाने मे ही खर्च कर डाला !
विकास के लिए फूटी-कोडी नहीं बची तो उसके लिए 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 )करोड़ कर्ज ले लिया !
और ऐसे बन गया 17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ करोड़ का बजट !
अर्थात मोटा मोटा 18 लाख करोड़ का बजट !
___________________________
और मित्रो अब जो मैं बात लिखने जा रहा हूँ शायद पढ़ते ही आपके
रोंगटे खड़े हो जाए और हो सकता है पहली बार मे आप विश्वास ही ना कर पाये !
तो मित्रो जैसा की मैंने ऊपर बताया 17,77,477 (17 लाख 77 हजार 477 ) करोड़ के
खर्चो को पूरा करने के लिए सरकार ने 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 करोड़
नया कर्ज तो ले लिया लेकिन पुराना जो 60 लाख करोड़ का कर्ज है तो उसका व्याज भी तो भरना है ??
तो मित्रो इस बार के बजट मे जो सबसे अधिक धन खर्च हुआ है
वो पिछले कर्जे का ब्याज भरने मे खर्च हुआ है ??
जैसे की आपने ऊपर पढ़ा की Non-Plan Expenditure मे पिछले कर्जे का ब्याज भी
आता है तो मित्रो इस बार सरकार ने आपके मेरे tax का 456145( 4 लाख 56 हजार 145 करोड़ ) तो पिछले कर्जे का ब्याज भरने मे खर्च कर दिया !!
सिर्फ ब्याज भरने मे 456145( 4 लाख 56 हजार 145 करोड़ )!
अर्थात मूलधन वही का वही खड़ा है और 456145( 4 लाख 56 हजार 145 करोड़ )
ब्याज मे चला गया !
और 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 )करोड़ करोड़ का नया कर्ज ले लिया !!
देश किस विकास की और बढ़ रहा है आप खुद अनुमान लगाइए मित्रो !!
_________________________
456145( 4 लाख 56 हजार 145 करोड़ ) एक वर्ष का ब्याज भरना
आप इसका अर्थ समझते हैं मित्रो ??
456145 करोड़ को 12 से भाग (divide) करिये
तो जवाब आएगा 38012 करोड़ ( 38 हजार 12 करोड़ ) एक महीने का ब्याज !
एक महीने मे 30 दिन !
अब इस 38012 करोड़ ( 38 हजार 12 करोड़ ) 30 से भाग (divide) करिये !
तो आ जाएगा 1267 करोड़ ब्याज (एक दिन का ब्याज) !
अब इस 1267 करोड़ को 24 से से भाग (divide) कर दीजिये
तो आएगा 52 करोड़ (एक घंटे का ब्याज )!
एक घंटे मे 60 मिनट ! तो कर दीजिये 52 करोड़ को 60 से भाग (divide) !!
तो आ जाएगा 86,66,666 ( 86 लाख रूपये एक मिनट का ब्याज ) !
एक मिनट मे 60 सेकेंड ! तो कर दीजिये 86 लाख को 60 से फिर भाग (divide) !
तो आ जाएगा 143000 ( 1 लाख 43 हजार रूपये ) 1 सेकेंड का ब्याज !
__________________________________
सोचिए मित्रो सोचिए !जो देश प्रति सेकेंड 1 लाख 43 हजार रूपये का पुराने कर्जे का ब्याज भर रहा है वो किस विकास की और बढ़ रहा है ??
गंभीरता से सोचिए ! क्यों बिना कुछ जाने आप सरकारो की अंधभक्ति करने मे लगे है !
क्योंकि आपके लिए देश पीछे छूट गया है ? और सरकारे और नेता आपके लिए बड़े हो गए हैं
क्यों कल तक जो चीज आपको विनाश दिखती थी आज आपको विकास दिख रही है ??
आप सब जानते है की आप मे से बहुत से लोगो को बजट का अर्थ तक नहीं मालूम
तो फिर क्यों मात्र मीडिया मे दिखाई योजनाओ को ही बजट समझते है ??
और क्यों सिर्फ उन योजनाओ की घोषणाओ का ही गुणगान करते जा रहे है ???
जबकि वास्तविकता मे कुछ भी नहीं बदला है !
__________________________________
अगर आप पिछले 2 मिनट से मेरी ये post पढ़ रहे तो समझ लीजिये
प्रति मिनट 86 लाख रूपये ब्याज के हिसाब से 1 करोड़ 72 हजार रूपये तो
पिछले कर्जे के ब्याज मे चला गया frown emoticon frown emoticon
किस भारत मे जी रहे है हम कल्पना करिए ?
क्यों इस देश की सरकारे विनाश को विकास बता रही है ?
गंभीरता से विचार करिये मित्रो गंभीरता से !!
_____________________________________
अब जो 555649 ( 5 लाख 55 हजार 649 करोड़ का नया कर्ज लेकर विकास
की योजनाओ की घोषणा हुई है उसमे भी देश को क्या मिलने वाला आपको एक उदाहरण से स्पष्ट कर देता हूँ !!
देश की कुल आबादी 120 करोड़ है जिसमे 52 % संख्या किसानो की है !
अर्थात आधी आबादी 62 करोड़ देश मे किसान है खेती से जुड़े है !!
इस बजट मे Agriculture and Allied Activities ( कृषि और सम्बद्ध क्रियाकलापों )
के लिए मात्र 11657 करोड़ रूपये रखे गए है !!
अर्थात 62 करोड़ किसानो के लिए 11657 करोड़ रूपये !
11657 करोड़ को 62 करोड़ किसानो मे बांटो !
अर्थात 188 रूपये प्रति किसान सरकार बजट मे से खर्च करेगी वो भी एक वर्ष मे !!
वैसे तो 11657 करोड़ भी सरकार द्वारा बजट मे लिए गए नए कर्जे के ही है !!
तो सोचिए मित्रो मात्र 188 रूपये प्रति वर्ष एक किसान के लिए frown emoticon frown emoticon
और वो भी तब अगर बिना किसी भ्रष्टाचार के खर्च किए जाए !!
एक वर्ष मे मात्र 188 रूपये एक किसान के ऊपर खर्च करके सरकार किसानो की
क्या हालत सुधारेगी किसानो का क्या विकास करेगी ?
आप कल्पना कर सकते हैं मित्रो frown emoticon frown emoticon
जो किसान पूरे देश का पेट भरता है वो खुद भूख से मरता है
आत्मह्त्या करता है ! frown emoticon frown emoticon
जिसके घर की छत टपकती है वो खुद बारिश का इंतजार करता है !!
ऐसी ही सरकार ने सिंचाई (Irrigation and Flood Control )की व्यवस्था के लिए
772 करोड़ खर्च करेगी !!
बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्ष्ण की रिपोर्ट का एक हिस्सा पढ़िये !!
देश 12 करोड़ हेकटियर ऐसी जमीन है जहां अभी खेती होती है 2007 तक ये
17 करोड़ हेकटियर थी !
तो आप कहेंगे 5 करोड़ हेकटियर कृषि जमीन कहाँ गई ??
ये 5 करोड़ हेकटियर जमीन सरकार ने SEZ ( special economic zone )
नाम पर बड़ी- बड़ी कंपनियो को देदी ! और कुछ यूरिया ,DAP डालने से बिलकुल
बंजर हो गई ! ऊपर से वितमंत्री ने इस बार के बजट मे स्पष्ट कर दिया SEZ जारी रहेंगे !
अर्थात आने वाले दिनो मे और जमीन कम होने वाली है बहुत सी किसानो की जमीन बुलेट ट्रेन के लिए जापानी कंपनियो को दी जानी है !अब 12 करोड़ हेकटियर जमीन ही बची है कृषि के लिए !
उसमे से मात्र 5 करोड़ हेकटियर जमीन पर ही सिंचाई की व्यवस्था है !
बाकी 7 करोड़ हेकटियर आधी से अधिक जमीन पर खेती सिर्फ भगवान भरोसे है
अर्थात बारिश हो गई तो फसल आ जाएगी ,बारिश नहीं होगी तो फसल मर जाएगी !!
और अगर एक महीना देरी से बारिश हुई तो बीज जो खेत मे डाला हुआ है पूरी तरह खराब हो जाएगा तो ऐसे हालत है देश मे सिंचाई की !! आजादी के 67 साल बाद भी हम देश के किसानो के लिए सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं कर पाये है ! आज भी हमारे किसान सिंचाई के लिए पानी के लिए आसमान की तरफ उम्मीद लगाए देखते रहते हैं !
ऐसे मे सरकार ने मात्र 772 करोड़ रूपये सिंचाई के लिए रखे !
अर्थात प्रति किसान 12 रूपये प्रति वर्ष सिंचाई के लिए सरकार खर्च करेगी !!
आप खुद अनुमान लगा लीजिये मात्र 12 रूपये प्रति वर्ष एक किसान के खेत मे सरकार
क्या सिंचाई की व्यवस्था कर पाएगी ?? frown emoticon frown emoticon क्या उसका विकास कर पाएगी ?
हर वर्ष 1 करोड़ 80 लाख नये बच्चे देश मे जन्म ले रहे है एक देश है उसका नाम है नीदरलैंड उसकी आबादी 1 करोड़ 70 लाख है अर्थात हर वर्ष 1 नीदरलैंड हमारे बीच जुड़ जाता है !
1 करोड़ 80 लाख ने नये मुंह प्रति वर्ष रोटी के लिए खुल जाते है ! ऐसे मे आज हम
बजट मे किसानो के लिए कृषि की व्यवस्था नहीं करेंगे सिंचाई की व्यवस्था नहीं करेंगे खेती की जमीन SEZ के नाम पर देते जाएंगे तो कल अनाज के लिए फिर हमको विदेशियों से भीख मांगनी पड़ेंगी !! जैसे किसी समय अमेरिका से PL 49 के नाम से सड़ा हुआ गेहूं आता था जिसे अमेरिका मे सूअर भी नहीं खाते थे वो हम भारतीयो को खाना पड़ता था ! वो तो भला हो शास्त्री जी का जिनहोने इसे रुकवाया देश मे अन्न उत्पादन बढ़ाया !
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तो मित्रो देश की जनता के लिए चल रही ये सारी व्यवस्था,प्रशासन अपने ऊपर 13 लाख करोड़ रूपये खर्च कर रही और देश की आधी आबादी 62 करोड़ किसानो के लिए मात्र 11657 करोड़ रूपये वो भी कर्जा लेकर ! और वो भी 187 रूपये प्रति किसान frown emoticon
ये विकास हो रहा है या विनाश गंभीरता से सोचना मित्रो गंभीरता से !
ये तो खेती और सिंचाई का हाल बताया ऐसा ही हाल सड़क ,स्वास्थ्य ,शिक्षा ,ग्रामीण विकास आदि योजनाओ आदि का है !
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सरकार एक और बात कहती है की प्रतिवर्ष लगभग 70 हजार करोड़ की सबसिडी
किसानो के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है !
सुनने मे कितना अच्छा लगता है किसानों को
70 हजार करोड़ की सबसिडी !
लेकिन दी कैसे जाती है वो जान लीजिये !
दरअसल सबसिडी यूरिया ,डीएपी ,जैसे जहरीले खाद और कीटनाशक बनाने वाली कंपियों को दी जाती ताकि वो किसानों को जहर सस्ते मे बेचे ,जिसे वो अपने खेतो मे डाले ,कर्जे मे दबे, खुद आत्महत्या करे बाद मे वो फल सब्जियाँ खाकर लोग बीमार पड़े ,फिर विदेशी दवा
कंपनियो को फाइदा हो और फिर देश की आम जनता भी मरे !
आपके ही tax का पैसा आपको मारने के लिए किसान को मारने के लिए
खर्च होता है frown emoticon frown emoticon frown emoticon
लेकिन ये 70 हजार करोड़ किसानों को गाय के गोबर-गौ मूत्र से खेती करने
के लिए नहीं खर्च किया जा सकता !! उल्टा पिछले बजट मे मोदी सरकार ने
कत्ल करने वाली मशीनों पर उत्पादन शुल्क 10 % कम कर 6 % कर दिया
गौ ह्त्या रोकना तो दूर आपके tax के पैसे से कत्लखानो को सबसिडी दी जाती है !
इससे अधिक शर्मनाक ,और नीच बात क्या होगी frown emoticon frown emoticon
ये विकास हो रहा है या विनाश गंभीरता से सोचना मित्रो गंभीरता से !
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आर्थिक सर्वेक्ष्ण की रिपोर्ट मे कहा गया है हर वर्ष 60 से 65 लाख बच्चे
ग्रेजुएशन करके निकल रहे है और 30 से 35 लाख हाई सेकेन्डरी करके निकल रहे है
ऐसे मे प्रति वर्ष 1 करोड़ नए रोजगार चाहिए ! जबकि इसके उल्टा 30 लाख रोजगार खत्म हो
रहे है ऐसे मे नए रोजगार की व्यवस्था कैसे होगी ??
पैसा कर्जे का ब्याज भरने और व्यवस्था चलाने मे खर्च हो गया है !!
ये विकास की तरफ हम बढ़ रहे है या विनाश की तरफ ??
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रक्षा बजट मे सरकार ने 24 हजार करोड़ और बड़ा दिये !
हथियारो की खरीद के लिए मात्र 12 करोड़ ही बढ़ा है ! बाक़ी 12 हजार अन्य खर्चो के
लिए बढ़ा है !
क्या होगा मात्र 12000 करोड़ बढ़ाने से ???
एक अग्नि 5 मिसाईल जो भारत ने बनाई है जो 5000 किलो मीटर तक मार
कर सकती है उसकी लागत 2500 करोड़ रूपये प्रति मिसाईल है !
तो सोच लीजिये 12000 हजार करोड़ से साल मे गिनती की 5 मिसाईल बनेगी frown emoticon frown emoticon
वो भी तब जब 5 हजार करोड़ पूरी ईमानदारी से खर्च किया जाएगा !
ऊपर से रक्षा क्षेत्र मे 49% FDI की मंजूरी दे दी गई है
26% मनमोहन सिंह ने दी थी इनहोने बढ़ा कर 49 % कर दी !
आपकी जानाकारी के लिए कह दूँ ये 49 % FDI technology transfer मे नहीं
मात्र पूंजी निवेश आ रही है !
तो क्यों बुला रहे है विदेशियों को पूंजी निवेश के लिए ??
क्योंकि हमारे पास पूंजी नहीं है !
कहाँ गई पूंजी ??? 1 लाख 43 हजार रूपये प्रति सेकेंड को कर्जे
का ब्याज भरा जा रहा है वहाँ चली गई frown emoticon
13 लाख करोड़ व्यवस्था चलाने मे जा रहा है तो वहाँ चली गई !!
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तो मित्रो देश की सरकारे तो पुराने कर्जे का ब्याज भरने और व्यवस्था चलाने मे आपके tax का सब धन खर्च कर रही है किसानो और सीमा पर खड़े जवानो को क्या मिल रहा है
आप खुद अनुमान लगा लीजिये !
ये विकास हो रहा है या विनाश फिर गंभीरता से सोचना मित्रो गंभीरता से !!
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बजट 18 लाख करोड़ का है पैसा सरकार ने लगभग 12 लाख करोड़ जुटाया !
5 -6 लाख करोड़ कर्ज लिया (जो राजकोषीय घाटा है ) अभी उसे पूरा करने या
कम करने के प्रयास मे सरकार इधर-उधर मुंह मारती रहती है और योजना बनाती रहती है की लोगो से और ज्यादा tax कैसे वसूला जाए !इसीलिए service tax 12 से 14 %कर दिया है ! service tax सीधा बोझ आपकी जेब पर पड़ेगा !! सरकार को मात्र 5 से 6 हजार करोड़ अगले बर्ष ज्यादा मिलेंगे ! इतने से क्या होगा ? जबकि घाटा 5 लाख 55 हजार करोड़ का है !
सरकार व्यवस्था चलाने का खर्च कम नहीं करेगी !! नेताओ की पगारें ,अपने खर्चे नहीं घटाएगी साल मे 2 -2 बार महंगाई भत्ते बढ़ाएगी ! frown emoticon frown emoticon
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ऐसी ही सरकार बजट का घाटा कम करने के लिए और अन्य हथकंडे अपनाती रहती है
भारत सरकार के पास पिछले 67 साल मे आपके tax से खड़े किए हुए 251 PSU है ! PSU अर्थात public sector undertakings ! जैसे BHEL ( bharat heavy electricals limited )
COAL INDIA
,NHPC,
GAIL INDIA,
AIR INDIA,
Bharat Electronics,
(NTPC) National Thermal Power Corporation ,MMTC ऐसे 251 public sector है !
जो की सरकार की आय का एक बहुत बड़ा स्त्रोत है ! घाटा पूरा करने के लिए सरकार क्या करती है इसमे अपनी हिस्सेदारी कम कर इसे बेचना शुरू कर देती है !
आपने अखबरों मे अक्सर ऐसे खबर पढ़ी होगी disinvestment (विनिवेश ) से सरकार जुटाएगी 35 हजार करोड़ ,40 हजार करोड़ ! तो इस विनिवेश का अर्थ क्या है ? सीधा सा अर्थ है निवेश का उल्टा विनिवेश अर्थात अपना पैसा निकाल लेना अपनी हिस्सेदारी कम देना ,बेच देना !!
साधारण भाषा मे समझिए ! आपकी 10 दुकाने है और आप उसमे 80% के हिस्सेदार है !
एक साल मे आपको उसमे से 10 लाख की कमाई होती है ! 80 % हिस्सेदारी के कारण
आपको 8 लाख रूपये प्रति वर्ष मिल रहा है ! एक दिन आपने क्या करा 10 मे से 5 दुकाने 25 लाख की बेच दी ! और शोर मचा दिया की मैंने तो 25 लाख जुटा लिए ! मैंने तो 25 लाख जुटा लिए !
लेकिन ये नहीं बताया की अपनी जायदाद बेचकर जुटाये है !! आज तो आपने 25 लाख एक साथ जुटा लिए लेकिन हर वर्ष जो 10 दुकानों मे से जो आपको 80 % के हिसाब से 8 लाख की कमाई हो रही थी अब वो भी तो आधी रह जाएगी ! ये आपने बताया नहीं !!
ऐसे ही सरकार बजट घाटा कम करने के लिए 251 PSU (PUBLIC )मे अपनी हिस्सेदारी लगातार प्रति वर्ष कम करती जा रही है बेचती जा रही है और शोर मचा रही है की हमने इतने हजार करोड़ जुटाये ! लेकिन ये नहीं बताया की अपनी आय का स्त्रोत भी तो कम कर लिया !! और उस जुटाये हुए पैसे को कहीं और निवेश नहीं करना बल्कि बजट का घाटा कम करना है !
दुनिया के और देश की सरकारे भी थोड़ा बहुत अपने अपने PSU मे विनिवेश करती है !
लेकिन भारत सरकार ने पूरा एक मंत्रालय बना Department of Disinvestment - Ministry
tongue emoticon ये बताता रहता है की भारत सरकार कहाँ कहाँ से अपनी हिस्सेदारी कम करे ! और Public sector बेचती जाए !
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मित्रो आज 10 ग्राम सोने की कीमत 27000 रु है
हम 30 हजार मान के चलते है !
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10 ग्राम सोना 30 हजार का,
100 ग्राम सोना 3 लाख का ,
और 1 किलो सोना 30 लाख का,
10 किलो सोना 3 करोड़ का,
100 किलो सोना 30 करोड़ का,
1000 किलो सोना 300 करोड़ का,
10,000 किलो सोना 3000 करोड़ का
1,00,000 (एक लाख ) किलो सोना 30000 करोड़ का
1,000,000( 10 लाख) किलो सोना 300000 (तीन लाख ) करोड़ का !
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तो मित्रो 10 लाख किलो सोने की कीमत होगी 300000 (तीन लाख ) करोड़ !
तो 20 लाख किलो सोने की कीमत 600000 (छ लाख ) करोड़ !
तो 40 लाख किलो सोने की कीमत होंगी 1200000( 12 लाख करोड़ )!
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देश की जनता ने अपने खून पसीने की कमाई से 2015-16 के बजट मे केंद्र की मोदी सरकार को 1141575 ( 11 लाख 41 हजार 575 ) का ( लगभग 12 लाख करोड़ ) का tax दिया है !!
अर्थात जितना tax भारत की जनता ने इस बजट मे सरकार को दिया है मोदी सरकार इससे 40 लाख किलो सोना खरीद सकती है ! फिर भी प्रधानमंत्री साहब कटोरा लेकर चीन ,जापान अमेरिका भाग रहे है विदेशी पूंजी के लालच मे ??
क्योंकि अपनी पूंजी व्यवस्था चलाने मे लगा दी ! कर्जे का व्याज भरने मे लगा दी !!
फिर भी पेट नहीं भरा तो service tax और बढ़ा दिया ! रेल बजट मे माल भाड़ा बढ़ा दिया !
80 % माल रेल से आता है सब महंगा !! राजस्थान मे तो कई जिलों मे पानी रेल से आता है सोचिए उन लोगो पर क्या बीतेगी ??
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मित्रो क्या आपने कभी ये खबर सुनी या पढ़ी?? की ये नेता भूख से मर गया ??
एक बात याद रखना मित्रो आजतक कोई भी नेता इस देश मे भूख से नहीं मरा है
भूख से इस देश का किसान ,जवान और आम आदमी ही मरता है !
नेता कभी भूख से नहीं मरा !
अगर ये नेता संकल्प ले ले की जब तक देश की आर्थिक हालत सुधार नहीं जाती तब
तक 3-4 साल पगार नहीं लेंगे तो क्या आफत आ जाएगी ?? वैसे भी तो ये लोग बोलते है
राजनीति सेवा है ! तो सेवा का पैसा कैसा ?
सरकारी कर्मचारी पहले से ही इतनी इतनी पगार पाते है और सरकार साल मे दो बार महंगाई भत्ता क्यों बढ़ा देती है ??
क्या महंगाई सिर्फ 3 साढ़े 3 करोड़ सरकारी कर्मचारियो के लिए ही बढ़ती है ??
120 करोड़ जनता से tax वसूल कर मात्र 2 से 3 करोड़ लोगो के लिए साल मे दो
बार महंगाई भत्ते बढ़ाना कौन सी समझदारी है ???
अगर इन सब फालतू खर्चो को कुछ वर्ष के लिए बंद कर दिया जाए ऐसा करने से इतना भला देश का हो जाएगा आप कल्पना नहीं कर सकते ! बचा हुए पैसे से हम रक्षा बजट बढ़ाएँगे ,किसानो पर लगाएंगे कृषि पर लगाएंगे ,सिंचाई पर लगाएंगे ! पगारे सिर्फ सीमा पर लड़ने वाले सैनिको की ही बढ़ाई जाएँ ! जिसके सर पर हर समय मौत तांडव कर रही है और वो आपके लिए सीमा पर खड़ा है !
गौ ह्त्या को रोक कर किसानो को गाय के गोबर गौ मूत्र से खेती करना सिखाया जाए !
जिससे 70 हजार करोड़ सबसिडी का बचे ! और 5 लाख करोड़ किसानो का बचे जो ये जहर खेतों मे डाल रहे है ! और लाखो करोड़ दवाओ का भी बचेगा क्यों की हमको जहर वाली फल सब्जियाँ नहीं खानी पड़ेगी !!
सरकार विदेशो मे जमा 220 लाख करोड़ का काला धन वापिस लाये और उससे 60 लाख करोड़ का कर्ज उतारे कर्ज उतरते ही इस देश का 1 रुपया 1 डालर बराबर हो जाएगा !!
क्योंकि जब जब आप world BANk,IMF से कर्ज मांगने जाते है आपको अपनी रुपए की
कीमत डालर की तुलना मे कम करनी पड़ती है ! और कितनी गिरानी पड़ेगी ? इसका कोई फार्मूला नहीं है World bank,IMF जितना बोलता है उतना सरकार गिरा लेती है !
1947 को देश आजाद हुआ 1 रुपया 1 डालर बराबर था ! 1952 मे पहला बजट नेहरू ने कर्ज लिया और एक डालर 7 रूपये का हो गया और फिर ये सिलसिला चलता रहा और आज 1 डालर 60 रूपये का हो गया है ! कर्जा बढ़ता गया तो रुपया गिरता जाएगा !!
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और अंत मे सबसे महत्वपूर्ण बात !
मान लीजिये किसी कैलकुलेटर मे किसी ने कुछ गरबड़ी कर दी !
और उस कलकुलेटर मे 2 और 2 जोड़ने पर 5 आ रहा है !
अब उस कलकुलेटर को आप नेहरू के हाथ मे दीजिये तो भी 2 और 2 जोड़ने पर परिणाम 5 आएगा !मनमोहन के हाथ मे दीजिये तो भी परिणाम 5 आएगा और मोदी के हाथ मे दीजिये तो भी परिणाम 5 ही आने वाला है ! केजरीवाल के हाथ मे दे दीजिए तब भी 2 और 2 पाँच ही आने वाला है !
अर्थात कलूलेटर कोई भी चलाये परिणाम एक जैसा ही आने वाला है क्योंकि समस्या कलकुलेटर चलाने वाले मे नहीं बल्कि कलकुलेटर मे ही है ! इसलिए जबतक कलकुलेटर नहीं बदला जाएगा परिणाम वही रहेगा !
67 साल से हम देश मे कलकुलेटर चलाने वाले को बदल रहे है कलकुलेटर नहीं बदल रहे !
67 साल से हम इस देश मे ड्राईवर बदलते है आ रहे है लेकिन गाड़ी नहीं बदल रहे !!
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ये सारी व्यवस्था नीतियाँ और 34735 कानून अंग्रेज़ो ने भारत की लूट करने के लिए लोगो के साथ अन्याय करने के लिए ,शोषण करने के लिए बनाए थे ,अब व्यवस्था मे आप नेहरू को बैठा दो ,मनमोहन सिंह को बैठा दो ,या मोदी को या केजरीवाल को ! बिना व्यवस्था बदले देश की किसी समस्या का समाधान नहीं होने वाला !

4/2015

भगवान राम की वंश परंपरा>>>>>> राम के जीवन से जुड़े ऐसे 10 रहस्य

भगवान राम की वंश परंपरा>>>>>> राम के जीवन से जुड़े ऐसे 10 रहस्य>>>>>>>>
इक्ष्वाकु कुल में जैन और हिन्दुओं के कई महान पुरुषों ने जन्म लिया। उनमें से एक हैं प्रभु श्रीराम। प्रभु श्रीराम को जानना हो तो सिर्फ वाल्मीकि‍ की 'रामायण' से जानो। प्रभु श्रीराम पर बहुत लिखा और कहा गया है। राम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पुरुष थे इसीलिए उन्हें 'पुरुषोत्तम' कहा गया है। प्रभु श्रीराम के जीवन को हम 'लीला' इसलिए कहते हैं कि खुद प्रभु श्रीराम ने वैसा जीवन रचा था। तभी तो कहते हैं प्रभु श्रीराम की लीला। श्रीराम लीला।
राम ने 14 वर्ष वन में रहकर भारतभर में भ्रमण कर भारतीय आदिवासी, जनजाति, पहाड़ी और समुद्री लोगों के बीच सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया। राम के इन 14 वर्षों के वनवास की कोई चर्चा नहीं करता, वह तो बस रावण से हुए उनके युद्ध की ही चर्चा करता है। वनवास के दौरान लक्ष्मण ने रावण की बहन सूर्पणखा की नाक काट दी थी। सीता स्वयंवर में अपनी हार और सूर्पणखा की नाक काटने का बदला लेने के लिए रावण ने सीता का हरण कर लिया। वनवास के दौरान ही राम को सीता से दो पुत्र प्राप्त हुए- लव और कुश। एक शोधानुसार लव और कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए, ‍जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे।
खैर, आओ जानते हैं राम के जीवन से जुड़े ऐसे 10 रहस्य जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। राम की बहन : अब तक आप सिर्फ यही जानते आए हैं कि राम के तीन भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न थे, लेकिन राम की बहन के बारे में कम लोग ही जानते हैं।
विस्तार से जानने के लिए आगे क्लिक करें... प्रभु श्रीराम की बहन
दक्षिण भारत की रामायण के अनुसार राम की बहन का नाम शांता था, जो चारों भाइयों से बड़ी थीं। शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं, लेकिन पैदा होने के कुछ वर्षों बाद कुछ कारणों से राजा दशरथ ने शांता को अंगदेश के राजा रोमपद को दे दिया था।
भगवान राम की बड़ी बहन का पालन-पोषण राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्षिणी ने किया, जो महारानी कौशल्या की बहन अर्थात राम की मौसी थीं। राम का जन्म : राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण हैं। शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म आज से 7128 वर्ष पूर्व अर्थात 5114 ईस्वी पूर्व हुआ था। अन्य विशेषज्ञों के अनुसार राम का जन्म आज से लगभग 9,000 वर्ष (7323 ईसा पूर्व) हुआ था।
विस्तार से पढ़ें...प्रभु श्रीराम की असली जन्म दिनांक
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन राम का जन्म हुआ था। प्रो. तोबायस के अनुसार वाल्मीकि में उल्लेखित ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार राम का जन्म अयोध्या में 10 जनवरी को 12 बजकर 25 मिनट पर 5114 ईसा पूर्व हुआ था। उस दिन चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी थी। आकाशीय ग्रह-नक्षत्रों की यह स्थित वाल्मीकि रामायण के 1/18/89 में वर्णित है। प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर के माध्यम से किसी की भी जन्म तिथि का पता लगाना अब आसान है।
नहीं किया था राम ने सीता का परित्याग : सीता 2 वर्ष तक रावण की अशोक वाटिका में बंधक बनकर रहीं लेकिन इस दौरान रावण ने सीता को छुआ तक नहीं। इसका कारण था कि रावण को स्वर्ग की अप्सरा ने यह शाप दिया था कि जब भी तुम किसी ऐसी स्त्री से प्रणय करोगे, जो तुम्हें नहीं चाहती है तो तुम तत्काल ही मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे अत: रावण किसी भी स्त्री की इच्छा के बगैर उससे प्रणय नहीं कर सकता था।
इस संबंध में विस्तार से पढ़ें...
सीता को मु‍क्त करने के बाद समाज में यह प्रचारित है कि अग्निपरीक्षा के बाद राम ने प्रसन्न भाव से सीता को ग्रहण किया और उपस्थित समुदाय से कहा कि उन्होंने लोक निंदा के भय से सीता को ग्रहण नहीं किया था। किंतु अब अग्निपरीक्षा से गुजरने के बाद यह सिद्ध होता है कि सीता पवित्र है, तो अब किसी को इसमें संशय नहीं होना चाहिए। लेकिन इस अग्निपरीक्षा के बाद भी जनसमुदाय में तरह-तरह की बातें बनाई जाने लगीं, तब राम ने सीता को छोड़ने का मन बनाया। यह बात उत्तरकांड में लिखी है। यह मूल रामायण में नहीं है।
वाल्मीकि रामायण, जो निश्‍चित रूप से बौद्ध धर्म के अभ्युदय के पूर्व लिखी गई थी, समस्त विकृतियों से अछूती है। इसमें सीता परित्याग, शम्बूक वध, रावण चरित आदि कुछ भी नहीं था। यह रामायण युद्धकांड (लंकाकांड) में समाप्त होकर केवल 6 कांडों की थी। इसमें उत्तरकांड बाद में जोड़ा गया।
शोधकर्ता कहते हैं कि हमारे इतिहास की यह सबसे बड़ी भूल थी कि बौद्धकाल में उत्तरकांड लिखा गया और इसे वाल्मीकि रामायण का हिस्सा बना दिया गया। हो सकता है कि यह उस काल की सामाजिक मजबूरियां थीं, लेकिन सच को इस तरह बिगाड़ना कहां तक उचित है? सीता ने न तो अग्निपरीक्षा दी और न ही पुरुषोत्तम राम ने उनका कभी परित्याग ही किया। विपिन किशोर सिन्हा ने एक छोटी शोध पुस्तिका लिखी है जिसका नाम है- 'राम ने सीता-परित्याग कभी किया ही नहीं।' यह किताब संस्कृति शोध एवं प्रकाशन वाराणसी ने प्रकाशित की है। इस किताब में वे सारे तथ्‍य मौजूद हैं, जो यह बताते हैं कि राम ने कभी सीता का परित्याग नहीं किया।
रामकथा पर सबसे प्रामाणिक शोध करने वाले फादर कामिल बुल्के का स्पष्ट मत है कि 'वाल्मीकि रामायण का 'उत्तरकांड' मूल रामायण के बहुत बाद की पूर्णत: प्रक्षिप्त रचना है।' (रामकथा उत्पत्ति विकास- हिन्दी परिषद, हिन्दी विभाग प्रयाग विश्वविद्यालय, प्रथम संस्करण 1950)
तारणहार राम का नाम : 'राम' यह शब्द दिखने में जितना सुंदर है उससे कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण। 'राम' कहने मात्र से शरीर और मन में अलग ही तरह की प्रतिक्रिया होती है, जो हमें आत्मिक शांति देती है। इस शब्द की ध्वनि पर कई शोध हो चुके हैं और इसका चमत्कारिक असर सिद्ध किया जा चुका है इसीलिए कहते भी हैं कि 'राम से भी बढ़कर श्रीरामजी का नाम है'।
श्रीराम-श्रीराम जपते हुए असंख्य साधु-संत मुक्ति को प्राप्त हो गए हैं। प्रभु श्रीराम नाम के उच्चारण से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो लोग ध्वनि विज्ञान से परिचित हैं वे जानते हैं कि 'राम' शब्द की महिमा अपरंपार है।
जब हम 'राम' कहते हैं तो हवा या रेत पर एक विशेष आकृति का निर्माण होता है। उसी तरह चित्त में भी विशेष लय आने लगती है। जब व्यक्ति लगातार 'राम' नाम जप करता रहता है तो रोम-रोम में प्रभु श्रीराम बस जाते हैं। उसके आसपास सुरक्षा का एक मंडल बनना तय समझो। प्रभु श्रीराम के नाम का असर जबरदस्त होता है। आपके सारे दुःख हरने वाला सिर्फ एकमात्र नाम है- 'हे राम।'
राम या मार : 'राम' का उल्टा होता है म, अ, र अर्थात 'मार'। 'मार' बौद्ध धर्म का शब्द है। 'मार' का अर्थ है- इंद्रियों के सुख में ही रत रहने वाला और दूसरा आंधी या तूफान। राम को छोड़कर जो व्यक्ति अन्य विषयों में मन को रमाता है, मार उसे वैसे ही गिरा देती है, जैसे सूखे वृक्षों को आंधियां।
राजा राम या भगवान : हिन्दू धर्म के आलोचक खासकर 'राम' की जरूर आलोचना करते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि 'राम' हिन्दू धर्म का सबसे मजबूत आधार स्तंभ है। इस स्तंभ को गिरा दिया गया तो हिन्दुओं को धर्मांतरित करना और आसान हो जाएगा। इसी नी‍ति के चलते तथाकथित धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ मिलकर 'राम' को एक सामान्य पुरुष घोषित करने की साजिश की जाती रही है। वे कहते हैं कि राम कोई भगवान नहीं थे, वे तो महज एक राजा थे। उन्होंने समाज और धर्म के लिए क्या किया? वे तो अपनी स्त्री के लिए रावण से लड़े और उसे उसके चंगुल से मुक्त कराकर लाए। इससे वे भगवान कैसे हो गए?
भगवान राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा गया है अर्थात पुरुषों में सबसे श्रेष्ठ उत्तम पुरुष। अपने वनवास के दौरान उन्होंने देश के सभी आदिवासी और दलितों को संगठित करने का कार्य किया और उनको जीवन जीने की शिक्षा दी। इस दौरान उन्होंने सादगीभरा जीवन जिया। उन्होंने देश के सभी संतों के आश्रमों को बर्बर लोगों के आतंक से बचाया। इसका उदाहरण सिर्फ रामायण में ही नहीं, देशभर में बिखरे पड़े साक्ष्यों में आसानी से मिल जाएगा।
14 वर्ष के वनवास में से अंतिम 2 वर्ष को छोड़कर राम ने 12 वर्षों तक भारत के आदिवासियों और दलितों को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने का भरपूर प्रयास किया। शुरुआत होती है केवट प्रसंग से। इसके बाद चित्रकूट में रहकर उन्होंने धर्म और कर्म की शिक्षा दीक्षा ली। यहीं पर वाल्मीकि आश्रम और मांडव्य आश्रम था। यहीं पर से राम के भाई भरत उनकी चरण पादुका ले गए थे। चित्रकूट के पास ही सतना में अत्रि ऋषि का आश्रम था।
दंडकारण्य : अत्रि को राक्षसों से मुक्ति दिलाने के बाद वे दंडकारण्य क्षेत्र में चले गए, जहां आदिवासियों की बहुलता थी। यहां के आदिवासियों को बाणासुर के अत्याचार से मुक्त कराने के बाद वे 10 वर्षों तक आदिवासियों के बीच ही रहे। यहीं पर उनकी जटायु से मुलाकात हुई थी, जो उनका मित्र था। जब रावण सीता को हरण करके ले गया था, तब सीता की खोज में राम का पहला सामना शबरी से हुआ था। इसके बाद वानर जाति के हनुमान और सुग्रीव से।
वर्तमान में करीब 92,300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस इलाके के पश्चिम में अबूझमाड़ पहाड़ियां तथा पूर्व में इसकी सीमा पर पूर्वी घाट शामिल हैं। दंडकारण्य में छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं आंध्रप्रदेश राज्यों के हिस्से शामिल हैं। इसका विस्तार उत्तर से दक्षिण तक करीब 320 किमी तथा पूर्व से पश्चिम तक लगभग 480 किलोमीटर है इसी दंडकारण्य क्षेत्र में रहकर राम ने अखंड भारत के सभी दलितों को अपना बनाया। भारतीय राज्य तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, केरल, कर्नाटक सहित नेपाल, लाओस, कंपूचिया, मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा और थाईलैंड आदि देशों की लोक-संस्कृति व ग्रंथों में आज भी राम इसीलिए जिंदा हैं। राम ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने धार्मिक आधार पर संपूर्ण अखंड भारत के दलित और आदिवासियों को एकजुट कर दिया था। इस संपूर्ण क्षेत्र के आदिवासियों में राम और हनुमान को सबसे ज्यादा पूजनीय इसीलिए माना जाता है। लेकिन अंग्रेज काल में ईसाइयों ने भारत के इसी हिस्से में धर्मांतरण का कुचक्र चलाया और राम को दलितों से काटने के लिए सभी तरह की साजिशें कीं, जो आज भी जारी हैं।
राम राजा नहीं भगवान : जब भी कोई अवतार जन्म लेता है तो उसके कुछ चिह्न या लक्षण होते हैं और उसके अवतार होने की गवाही देने वाला कोई होता है। राम ने जब जन्म लिया तो उनके चरणों में कमल के फूल अंकित थे, जैसे कि कृष्ण के चरणों में थे। राम के साथ हनुमान जैसा सर्वशक्तिमान देव का होना इस बात की सूचना है कि राम भगवान थे। रावण जैसा विद्वान और मायावी क्या एक सामान्य पुरुष के हाथों मारा जा सकता है? इन सबको छोड़ भी दें तो ब्रह्मर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र ने इस बात की पुष्टि की कि राम सामान्य पुरुष नहीं, भगवान हैं और वह भी विष्णु के अवतार। इक्ष्वाकु वंश में एक नहीं, कई भगवान हुए उनमें से सबसे पहला नाम ऋ‍षभनाथ का आता है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे। दुनिया में राम पर लिखे गए सबसे ज्यादा ग्रंथ : रामायण को वा‍ल्मीकि ने राम के काल में ही लिखा था इसीलिए इस ग्रंथ को सबसे प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है। यह मूल संस्कृत में लिखा गया ग्रंथ है। रामचरित मानस को गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा जिनका जन्म संवत्‌ 1554 को हुआ था। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना अवधी भाषा में की। कितनी रामायण? एक लिस्ट
तमिल भाषा में कम्बन रामायण, असम में असमी रामायण, उड़िया में विलंका रामायण, कन्नड़ में पंप रामायण, कश्मीर में कश्मीरी रामायण, बंगाली में रामायण पांचाली, मराठी में भावार्थ रामायण।
कंपूचिया की रामकेर्ति या रिआमकेर रामायण, लाओस फ्रलक-फ्रलाम (रामजातक), मलेशिया की हिकायत सेरीराम, थाईलैंड की रामकियेन और नेपाल में भानुभक्त कृत रामायण आदि प्रचलित हैं। इसके अलावा भी अन्य कई देशों में वहां की भाषा में रामायण लिखी गई है। राम के काल के महत्वपूर्ण लोग : गुरु वशिष्ठ और ब्रह्माजी की अनुशंसा पर ही प्रभु श्रीराम को विष्णु का अवतार घोषित किया गया था। राम के काल में उस वक्त विश्‍वामित्र से वशिष्ठ की अड़ी चलती रहती थी। उनके काल में ही भगवान परशुराम भी थे। उनके काल के ही एक महान ऋषि वाल्मीकि ने उन पर रामायण लिखी।
भगवान राम की वंश परंपरा
राम ने सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए संपाति, जटायु, हनुमान, सुग्रीव, विभीषण, मैन्द, द्विविद, जाम्बवंत, नल, नील, तार, अंगद, धूम्र, सुषेण, केसरी, गज, पनस, विनत, रम्भ, शरभ, महाबली कंपन (गवाक्ष), दधिमुख, गवय और गन्धमादन आदि की सहायता ली। राम के काल में पाताल लोक का राजा था अहिरावण। अहिरावण राम और लक्ष्मण का अपहरण करके ले गया था।
राम के काल में राजा जनक थे, जो उनके श्‍वसुर थे। जनक के गुरु थे ऋषि अष्टावक्र। जनक-अष्टावक्र संवाद को 'महागीता' के नाम से जाना जाता है।
राम परिवार : दशरथ की 3 पत्नियां थीं- कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी। राम के 3 भाई थे- लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। राम कौशल्या के पुत्र थे। सुमित्रा के लक्ष्मण और शत्रुघ्न दो पुत्र थे। कैकयी के पुत्र का नाम भरत था। लक्ष्मण की पत्नी का नाम उर्मिला, शत्रुघ्न की पत्नी का नाम श्रुतकीर्ति और भरत की पत्नी का नाम मांडवी था। सीता और उर्मिला राजा जनक की पुत्रियां थीं और मांडवी और श्रुत‍कीर्ति कुशध्वज की पुत्रियां थीं। लक्ष्मण के अंगद तथा चंद्रकेतु नामक 2 पुत्र थे तो राम के लव और कुश।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम : गुरु वशिष्ठ से शिक्षा-दीक्षा लेना, विश्वामित्र के साथ वन में ऋषियों के यज्ञ की रक्षा करना और राक्षसों का वध, राम स्वयंवर, शिव का धनुष तोड़ना, वनवास, केवट से मिलन, लक्ष्मण द्वारा सूर्पणखा (वज्रमणि) की नाक काटना, खर और दूषण का वध, लक्ष्मण द्वारा लक्ष्मण रेखा खींचना, स्वर्ण हिरण-मारीच का वध, सीताहरण, जटायु से मिलन।
इसके अलावा कबन्ध का वध, शबरी से मिलन, हनुमानजी से मिलन, सुग्रीव से मिलन, दुंदुभि और बाली का वध, संपाति द्वारा सीता का पता बताना, अशोक वाटिका में हनुमान द्वारा सीता को राम की अंगूठी देना, हनुमान द्वारा लंकादहन, सेतु का निर्माण, लंका में रावण से युद्ध, लक्ष्मण का मूर्छित होना, हनुमान द्वारा संजीवनी लाना और रावण का वध, पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन।
वनवास के दौरान राम कहां-कहां रहे? : रामायण में उल्लेखित और अनेक अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार जब भगवान राम को वनवास हुआ, तब उन्होंने अपनी यात्रा अयोध्या से प्रारंभ करते हुए रामेश्वरम और उसके बाद श्रीलंका में समाप्त की। इस दौरान उनके साथ जहां भी जो घटा, उनमें से 200 से अधिक घटनास्थलों की पहचान की गई है।
पढ़िए राम के वनवास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों के बारे में जानकारी... 14 वर्ष के वनवास में राम कहां-कहां रहे?

जाने-माने इतिहासकार और पुरातत्वशास्त्री अनुसंधानकर्ता डॉ. राम अवतार ने श्रीराम और सीता के जीवन की घटनाओं से जुड़े ऐसे 200 से भी अधिक स्थानों का पता लगाया है, जहां आज भी तत्संबंधी स्मारक स्थल विद्यमान हैं, जहां श्रीराम और सीता रुके या रहे थे। वहां के स्मारकों, भित्तिचित्रों, गुफाओं आदि स्थानों के समय-काल की जांच-पड़ताल वैज्ञानिक तरीकों से की।
लव और कुश : भरत के दो पुत्र थे- तार्क्ष और पुष्कर। लक्ष्मण के पुत्र- चित्रांगद और चन्द्रकेतु और शत्रुघ्न के पुत्र सुबाहु और शूरसेन थे। मथुरा का नाम पहले शूरसेन था। लव और कुश राम तथा सीता के जुड़वां बेटे थे। जब राम ने वानप्रस्थ लेने का निश्चय कर भरत का राज्याभिषेक करना चाहा तो भरत नहीं माने। अत: दक्षिण कोसल प्रदेश (छत्तीसगढ़) में कुश और उत्तर कोसल में लव का अभिषेक किया गया।
राम के काल में भी कोशल राज्य उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में विभाजित था। कालिदास के रघुवंश अनुसार राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का और कुश को कुशावती का राज्य दिया था। शरावती को श्रावस्ती मानें तो निश्चय ही लव का राज्य उत्तर भारत में था और कुश का राज्य दक्षिण कोसल में। कुश की राजधानी कुशावती आज के बिलासपुर जिले में थी। कोसला को राम की माता कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है। रघुवंश के अनुसार कुश को अयोध्या जाने के लिए विंध्याचल को पार करना पड़ता था इससे भी सिद्ध होता है कि उनका राज्य दक्षिण कोसल में ही था।
राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ जिनमें बर्गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला। इसकी दूसरी शाखा थी सिसोदिया राजपूत वंश की जिनमें बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) वंश के राजा हुए। कुश से कुशवाह (कछवाह) राजपूतों का वंश चला।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार लव ने लवपुरी नगर की स्थापना की थी, जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित शहर लाहौर है। यहां के एक किले में लव का एक मंदिर भी बना हुआ है। लवपुरी को बाद में लौहपुरी कहा जाने लगा। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लाओस, थाई नगर लोबपुरी, दोनों ही उनके नाम पर रखे गए स्थान हैं।
राम के दोनों पुत्रों में कुश का वंश आगे बढ़ा तो कुश से अतिथि और अतिथि से, निषधन से, नभ से, पुण्डरीक से, क्षेमन्धवा से, देवानीक से, अहीनक से, रुरु से, पारियात्र से, दल से, छल से, उक्थ से, वज्रनाभ से, गण से, व्युषिताश्व से, विश्वसह से, हिरण्यनाभ से, पुष्य से, ध्रुवसंधि से, सुदर्शन से, अग्रिवर्ण से, पद्मवर्ण से, शीघ्र से, मरु से, प्रयुश्रुत से, उदावसु से, नंदिवर्धन से, सकेतु से, देवरात से, बृहदुक्थ से, महावीर्य से, सुधृति से, धृष्टकेतु से, हर्यव से, मरु से, प्रतीन्धक से, कुतिरथ से, देवमीढ़ से, विबुध से, महाधृति से, कीर्तिरात से, महारोमा से, स्वर्णरोमा से और ह्रस्वरोमा से सीरध्वज का जन्म हुआ।
कुश वंश के राजा सीरध्वज को सीता नाम की एक पुत्री हुई। सूर्यवंश इसके आगे भी बढ़ा जिसमें कृति नामक राजा का पुत्र जनक हुआ जिसने योग मार्ग का रास्ता अपनाया था। कुश वंश से ही कुशवाह, मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय की स्थापना मानी जाती है।
एक शोधानुसार लव और कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए, ‍जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। यह इसकी गणना की जाए तो लव और कुश महाभारतकाल के 2500 वर्ष पूर्व से 3000 वर्ष पूर्व हुए थे अर्थात आज से 6,500 से 7,000 वर्ष पूर्व।
इसके अलावा शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अन्तरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन, सिद्धार्थ, राहुल, प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए।