शुक्रवार, 28 अगस्त 2015

यदि हमें आर्थिक लाभ प्राप्त करना हो

यदि हमें आर्थिक लाभ प्राप्त करना हो, तो नियम पूर्वक अपने घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए।
अगर हमें शत्रुओं से पीड़ा हो, तो सरसों के तेल का दीपक भैरव जी के सामने जलाना चाहिए।
भगवान सूर्य की प्रसन्नता के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
शनि ग्रह की प्रसन्नता के लिए तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
पति की आयु के लिए महुए के तेल का
और राहु-केतु ग्रह के लिए अलसी के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
किसी भी देवी या देवता की पूजा में शुद्ध गाय का घी या एक फूल बत्ती या तिल के तेल का दीपक आवश्यक रूप से जलाना चाहिए।
दो मुखी घी वाला दीपक माता सरस्वती की आराधना के समय और शिक्षा प्राप्ति के लिए जलाना चाहिए।
भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए तीन बत्तियों वाला घी का दीपक जलाना चाहिए। 


मुख्यद्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे.
सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही या प्याज मागने पर ना दें इससे घर की बरकत समाप्त हो जाती है.
छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं..हाँ सुखा सकते है इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते है
फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन उसके छिलके कूडादान में ना डालें अलग रखें बाद में बाहर दाल सकते है इससे मित्रों से लाभ होगा.
माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है.
माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा..
रात्री में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है.यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखें तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आती है
वृहस्पतिवार के दिन घर कोई भी पीली वस्तु खाएं हरी वस्तु ना खाए तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी.
रात्री को झूठे बर्तन कदापि ना रखे इसे पानी से निकाल कर रख सकते है हानि से बचोगें.
स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सुखा तौलिया हो प्रयोग करें.
कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी.

मंगलवार, 25 अगस्त 2015

नजर उतारने के उपाय



नजर उतारने के उपाय
१॰ बच्चे ने दूध पीना या खाना छोड़ दिया हो, तो रोटी या दूध को बच्चे पर से ‘आठ’ बार उतार के कुत्ते या गाय को खिला दें।
२॰ नमक, राई के दाने, पीली सरसों, मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर से ‘आठ’ बार उतार कर अग्नि में जला दें। ‘नजर’ लगी होगी, तो मिर्चों की धांस नहीँ आयेगी।
३॰ जिस व्यक्ति पर शंका हो, उसे बुलाकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर उससे हाथ फिरवाने से लाभ होता है।
४॰ पश्चिमी देशों में नजर लगने की आशंका के चलते ‘टच वुड’ कहकर लकड़ी के फर्नीचर को छू लेता है। ऐसी मान्यता है कि उसे नजर नहीं लगेगी।
५॰ गिरजाघर से पवित्र-जल लाकर पिलाने का भी चलन है।
६॰ इस्लाम धर्म के अनुसार ‘नजर’ वाले पर से ‘अण्डा’ या ‘जानवर की कलेजी’ उतार के ‘बीच चौराहे’ पर रख दें। दरगाह या कब्र से फूल और अगर-बत्ती की राख लाकर ‘नजर’ वाले के सिरहाने रख दें या खिला दें।
७॰ एक लोटे में पानी लेकर उसमें नमक, खड़ी लाल मिर्च डालकर आठ बार उतारे। फिर थाली में दो आकृतियाँ- एक काजल से, दूसरी कुमकुम से बनाए। लोटे का पानी थाली में डाल दें। एक लम्बी काली या लाल रङ्ग की बिन्दी लेकर उसे तेल में भिगोकर ‘नजर’ वाले पर उतार कर उसका एक कोना चिमटे या सँडसी से पकड़ कर नीचे से जला दें। उसे थाली के बीचो-बीच ऊपर रखें। गरम-गरम काला तेल पानी वाली थाली में गिरेगा। यदि नजर लगी होगी तो, छन-छन आवाज आएगी, अन्यथा नहीं।
८॰ एक नींबू लेकर आठ बार उतार कर काट कर फेंक दें।
९॰ चाकू से जमीन पे एक आकृति बनाए। फिर चाकू से ‘नजर’ वाले व्यक्ति पर से एक-एक कर आठ बार उतारता जाए और आठों बार जमीन पर बनी आकृति को काटता जाए।
१०॰ गो-मूत्र पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पिलाए और उसके आस-पास पानी में मिलाकर छिड़क दें। यदि स्नान करना हो तो थोड़ा स्नान के पानी में भी डाल दें।
११॰ थोड़ी सी राई, नमक, आटा या चोकर और ३, ५ या ७ लाल सूखी मिर्च लेकर, जिसे ‘नजर’ लगी हो, उसके सिर पर सात बार घुमाकर आग में डाल दें। ‘नजर’-दोष होने पर मिर्च जलने की गन्ध नहीं आती।
१२॰ पुराने कपड़े की सात चिन्दियाँ लेकर, सिर पर सात बार घुमाकर आग में जलाने से ‘नजर’ उतर जाती है।
१३॰ झाडू को चूल्हे / गैस की आग में जला कर, चूल्हे / गैस की तरफ पीठ कर के, बच्चे की माता इस जलती झाडू को 7 बार इस तरह स्पर्श कराए कि आग की तपन बच्चे को न लगे। तत्पश्चात् झाडू को अपनी टागों के बीच से निकाल कर बगैर देखे ही, चूल्हे की तरफ फेंक दें। कुछ समय तक झाडू को वहीं पड़ी रहने दें। बच्चे को लगी नजर दूर हो जायेगी।
१४॰ नमक की डली, काला कोयला, डंडी वाली 7 लाल मिर्च, राई के दाने तथा फिटकरी की डली को बच्चे या बड़े पर से 7 बार उबार कर, आग में डालने से सबकी नजर दूर हो जाती है।
१५॰ फिटकरी की डली को, 7 बार बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर आग में डालने से नजर तो दूर होती ही है, नजर लगाने वाले की धुंधली-सी शक्ल भी फिटकरी की डली पर आ जाती है।
१६॰ तेल की बत्ती जला कर, बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर दोहाई बोलते हुए दीवार पर चिपका दें। यदि नजर लगी होगी तो तेल की बत्ती भभक-भभक कर जलेगी। नजर न लगी होने पर शांत हो कर जलेगी।

दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलना उपाय :



दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलना उपाय :
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1- घर के बाहर कुंकुम से स्वस्तिक का चिह्न रोज बनाएं। यह बहुत ही सौभाग्यशाली चिह्न है।
2- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
3- यदि कोई रोग लंबे समय तक न जाए तो एख रूपए का चमकीला सिक्का रात को सिरहाने रखकर सो जाएं। सुबह उसे शमशान की सीमा पर जाकर चुपचाप फेंक आएं। रोग समाप्त हो जाएगा।
4- कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं देती हैं जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि। ऐसे दृश्यों से बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें।
5- घर के मुख्य द्वार पर सफेद आंकड़े का पौधा लगाने से उस घर के सदस्यों पर कोई तांत्रिक अथवा ऊपरी बाधा असर नहीं करती। साथ ही उस घर में धन का अभाव नहीं रहता।
6 - रोज सुबह श्रीआदित्य ह्रदयस्त्रोत का पाठ करें। सूर्य यंत्र का निर्माण करके तीन माला रोज नीचे लिखे सूर्य मंत्र का जप करें। ऐसा करने से ह्रदय रोग में काफी लाभ होगा।
मंत्र- ऊँ घृणि: सूर्याय नम:
7- आषाढ़ शुक्ल पंचमी के दिन जो अपनी कमर से सिरिस की जड़ बांधता है और चावल का पानी पीता है। उसे सर्पदंश का भय नहीं होता।

सोमवार, 24 अगस्त 2015

दुर्घटना योग

आज बात करते है दुर्घटना योग की आज की लाइफ मे भाग दौड आम बात है अकसर लोग दुर्घटना का शिकार होते है एक तो कभी कभी एक हर बार होता हो ऐ बडो के साथ छोटो मे भी होता है यानी बच्चे अकसर चोट खाते है भले ही ऐ आम बात है लेकिन अधिकतर को चोट नही लगती और कुछ को थोडे से चोट लग जाती है। 
अष्टम भाव में मंगल, राहु, केतु, शनि शत्रु राशि के स्थित हों और नवांश में भी उनकी स्थिति अच्छी नहीं हो और किसी शुभग्रहों की दृष्टि उन पर नहीं हो तो दुर्घटनाएं गम्भीर होती है। वही मगंल शनी की युति आठवे मे हो तो अकसर वाहनो से चोट खाता है यही युति चौथे मे हो राहू आठवे हो चद्र केतू साथ हो नीचगत हो तो जातक का झगडालू स्वभाव होता है लडने मे झगडे मे चोट खाता है और देता है । मगंल देव शनि और सुर्य चौथे मे शत्रुगत हो नीचगत हो केतू बुध साथ हो तो पिता की समपत्ती के लिऐ भाईयो मे टकराव होता है मारकाट कोर्ट केस भटकता है ।वही अकेला मगंल आठवे मे नीचगत हो तो आग से भय रहता है । चोट देने मे केतू देव और गुरू भी साथ देते अकसर खराब हालाद मे हल्की सी चोट पर भी हड्डी मे चोट देता है टूटना काफी समय मे वो जुडती है । ऐसे लोगो के हड्डीयो मे दर्द रहता है । जन्म से यदि केतू देव कुडली मे पिडित हो शनी के साथ हो तो बच्चे को चोट लगती रहती है वो कुत्ते को भी रोटी देगा तो कुत्ता भी काट लेगा यानी कुछ चीज छेडेगा तो वो खराब होगी ही लेकिन खुद पर भी चोट लगती है ।केतू देव और शनी देव जब भी एक साथ खराब होगे तो बिमारी ही अचानक देता रहता है या वो बिमार रहते है दशा या गोचरफल मे आते ही अचानक कोई न कोई बिमारी देगा लेकिन रिर्पोट मे कुछ नी आता वही शनी देव के खराब हालाद मे मकान बनाते ही बिमारी और दुर्घटना देने लगता है ।

गोमती चक्र



गोमती चक्र एक ऐसा पत्थर है जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है। यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका यह बहुत प्रभावशाली है। इसके कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
1- यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।
2- यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।
3- यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे।
4- यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंद दें, मतभेद समाप्त हो जाएगा।
5- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
6- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
7- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
8- गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपकी शत्रु भी मित्र बन जाएगा।
9- अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दें तो यह एक तरह से आपके परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।
10- चार गोमती चक्र को अगर रोगी के बिस्तर के साथ बांध दें तो कुछ ही दिनों में रोगी स्वस्थ होने लगेगा। रोगी के पूर्ण स्वस्थ होने पर इन्हें सुबह के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे गाढ़ दें।
11- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में इस दिन रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।

रविवार, 23 अगस्त 2015

ग्रह बाधा निवारण स्नान विधि दे

ऊँ नमो आदेश गुरु जी को आदेश मैं आपका दोस्त पंडित नरेश नाथ आपको आज विचित्र ग्रह बाधा निवारण स्नान विधि दे रहा हूँ जिस का चमत्कार आप संवय देख सकते हैं ग्रह से बचने के लिए हम तंत्र मंत्र य॔त्र का सहारा लेते है और खर्च भी बहुत आता हैं पर इस विधि से आप आसानी से सुखी जीवन जी सकते हैं 
आपको एक मिट्टी की हांडी ढक्कन के साथ लेनी हैं उसमें 
1 केवल एक मुट्ठी चावल
2 केवल एक मुट्ठी सरसों 
3 एक ही मुट्ठी नगर मोथा
4 एक ही मुट्ठी सुखा आंवला
5 (21) दूर्वा घास के पीस
6(21) तुलसी के पत्ते
7 [21]बील के पत्ते
8 [2] पीस सबूत हल्दी
इन सबको हांडी मे डाल पानी भरे और रोज सुबह नहाने के पानी में एक कटोरी जल नहाने के पानी में मिला ले और एक कटोरी जल फीर से हांडी में डाल दे ऐसा 40 दिन करें यदि इस से दुर्गंध आए तो इससे पौधे की जड में डाल कर नयी सामग्री भर दे 40 दिन में आपको सुखद अनुभव होगा आपकी जो समस्या अब तक दूर नही हुई वह अब दूर होगी