शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

कुछ बातें भोजन से जुड़ीं

कुछ बातें भोजन से जुड़ीं
भोजन लेने के बाद हमारा व्यवहार कैसा हो, इस पर ध्यान रखें ये बातें-
* लंच के साथ या तुरंत बाद मठा में सेंधा नमक तथा जीरा डालकर पीने की आदत बनाएं। यह भोजन को शीघ्र पचाने में मदद करेगा। अतिरिक्त शक्ति मिलेगी।
* डिनर के साथ या बाद में गर्म दूध लेना आरंभ करें। यह पाचन क्रिया को तीव्र कर बल प्रदान करेगा।
* भोजन के बाद दुर्गन्धपूर्ण वातावरण में कभी न जाएं। न ही दुर्गन्धित भोजन या पदार्थ को सूंघे। भोजन के बाद जोर-जोर से हंसना भी मना है। वमन का भय होगा। -दिन के भोजन के बाद छोटी-सी 15-20 मिनट की नींद ले सकें तो अच्छा। रात्रि के भोजन के बाद सौ कदम चलने की सलाह दी जाती है। सुश्रुत ग्रंथ में आता है कि इसके बाद बायीं करवट ही सोना चाहिए।
* भाव प्रकाश के निर्देश में थोड़ी भिन्नता है। भोजन के बाद थोड़ा टहलना चाहिए, फिर सीधे लेटें। दस-ग्यारह गहरी सांसे लें, फिर दायीं करवट लेटें। 7-8 सांसे लें। तब बायीं करवट आ जाएं। अब भी 10 लम्बी सांसे लें, फिर सोने का प्रयत्न करें। ईश्वर में ध्यान लगाएं।
* बताया जाता है कि हमारी नाभि से ऊपर बायीं ओर अग्नि का स्थान है इसीलिए बायीं करवट लेटें। भोजन पचेगा।
* रात्रि का भोजन कर, बिना टहलने से मोटापा आता है। टहलने और लेटने के सही ढंग अपनाएं।
* जब हम सीधा सोते हैं तो शरीर को बल मिलता है व बायीं करवट लेटने से आयु में वृध्दि होती है।
* ऋषि हारीत के दर्शन के अनुसार भोजन के बाद जो किसी भी कारण से भागता है। वह मृत्यु को करीब बुलाता है। चलें जरूर मगर धैर्यपूर्वक।
* भोजन के बाद चीनी और सौफ या हल्का मीठा पान खाने से भोजन के प्रति रूचि बढ़ती है तथा यह जल्दी पचता है।
* भोजन के साथ या तुरंत बाद दूध पीना हितकर है। पान खाना भी किन्तु दूध के बाद पान न खाएं।
* भोजन के तुरंत बाद भारी, शारीरिक काम या कोई व्यायाम कभी न करें।
* थका हुआ, पसीने से लथपथ व्यक्ति तुरंत भोजन न करे। थोड़ा विश्राम कर लें, फिर भोजन करें, हाथ-पांच धोकर।

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

पूजा विषय

पूजा विषय
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1 घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।
2 शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादाफलदायक है।
3 कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।
4 मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं। पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।
5 स्त्रियों के बायें हाथ में रक्षाबंधन किया जाता हैं।
6 पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती हैं अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।
7 तांबे के बरतन में दूध , दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।
8 आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं। दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता हैं।
9 कुशा के अग्रभाग से देवताओं पर जल नहीं छिड़के।
10 देवताओं को अंगूठे से नहीं मले। चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।
11 पुष्पों को बाल्टी , लोटा , जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
12 भगवान के चरणों की चार बार , नाभि की दो बार , मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।
13 भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा , नगारा , झांझर , थाली , घड़ावल , शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।
14 लोहे के पात्र से भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।
15 हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें। समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए। छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं। पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।
16 मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए। माला रूद्राक्ष , तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं। माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।
17 जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें। तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए। माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए। ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।
18 जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति , दौड़ते हुए , शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं। बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं। एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें। जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
19 जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।
20 जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
21 संक्रान्ति , द्वादशी , अमावस्या , पूर्णिमा , रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
22 दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
23 यज्ञ , श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं। शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, किन्तु रविवार को परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।
24 कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं। भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए। देवता की प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।
25 किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।
26 एकादशी, अमावस्या, कृष्ण चतुर्दशी , पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए।
27 बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य , कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं। यदि शिखा नहीं हो तो स्थान को स्पर्श कर लेना चाहिए।
28 शिवजी की जलहारी उत्त्राभिमुख रखें।
29 शंकर को बिलवपत्र , विष्णु को तुलसी , गणेश को दूर्वा , लक्ष्मी को कमल , दुर्गा को रक्तपुष्प प्रिय हैं।
30 शंकर को शिवरात्रि के सिवाय कुंकुम नहीं चड़ाते हैं।
31 शिवजी को कुंद, विष्णु को धतूरा, देवी को आक तथा मदार और सूर्य को तगर के फूल नहीं चढ़ावे।
2 अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एकबार धोकर चढ़ावे।
33 नये बिल्वपत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्वपत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।
34 विष्णु को चांवल , गणेश को तुलसी , दुर्गा और सूर्य को बिल्वपत्र नहीं चढ़ावें।
35 पत्र-पुष्य-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें। किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें। पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें। सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।
36 गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ला चतुर्थी को चढ़ती हैं।
37 पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता हैं।
38 दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होता।
39 सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।
40 पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।
41 पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी और घंटा , धूप तथा दाहिनी ओर शंख , जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें। घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता के दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।

सोमवार, 30 नवंबर 2015

आर्थिक तंगी से मुक्ति एवं धन लाभ के कुछ सरल उपायl



आर्थिक तंगी से मुक्ति एवं धन लाभ के कुछ सरल उपायl
1-आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।
2- कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाए ।
3- सरसो के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।
4- हनुमान जी के आगे चमेली के तेल से दीपक जलाए । कर्ज से मुक्ति मिलेगी ।
5- गुरूवार को दो लड्डू विष्णु जी की मूर्ति के आगे रखे जल्द ही रुके हुए काम बने लगेंगे ।
6- शनिवार को शाम को पीपल के नीचे दिया जलाए । व्यपार में तरक्की होने लगेगी
7- मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी
8- अगर काम में रुकावट आ रही है तो मंगलवार के दिन अपने ऊपर से सात बार नारियल उतारकर किसी बहते पानी में डाल दे
9- लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।
10- लक्ष्मी के वास के लिए घर में तुलसी का पौधा लगाए ।

शनिवार, 28 नवंबर 2015

मैं किडनी ट्रांसप्लांट से कैसे बचा।

अनुभव : – मैं किडनी ट्रांसप्लांट से कैसे बचा।
How I Avoid Kidney Transplant.
जिन लोगो को डॉकटरो ने किडनी ट्रांसप्‍लांट की सलाह दी हो, या डायलसिस चल रहा हो तो उन्हे किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के पहले इस दवा का प्रयोग जरूर करके देखना चाहिए हो सकता है कि ट्रांसप्‍लांट की नौबत ना आए। बता रहे हैं श्री ओम प्रकाश जी जिनको यही समस्या 2009 में आई थी, और डॉक्टर ने उनको किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए बोल दिया था। तो उन्होंने ना ही सिर्फ अपनी किडनी को स्वस्थ किया बल्कि ऐसे अनेक लोगो को भी इसका दम्भ झेलने से बचाया।
आइये जानते हैं श्री ओम प्रकाश सिंह जी से….
किडनी ट्रांसप्लांट करवाना बहुत महंगा हैं, और कुछ लोग तो ये अफोर्ड नहीं कर सकते, और जो कर भी सकते हैं तो किडनी ट्रांसप्लांट के बाद पहले जैसा जीवन नहीं बन पाता। मैं 17 अक्टोबर 2009 से किडनी की समस्या से झूझ रहा था अप्रैल 2012 मे मुंम्बई के नानावाती हॉस्पिटल के डॉक्टर शरद शेठ से ट्रांसप्लांट की बात भी तय हो चुकी थी लेकिन इसी दरमियान अखिल भारतीय शिक्षकेतर कर्मचारी संघ के महासचिव डॉक्टर आर बी सिंह से मुलाकात हो गई और उन्होने कहा की यह काढ़ा 15 दिन पीने के बाद अपना फैसला लेना है के आपको क्या करना है, मैने उनकी बात मानकर काढ़े का उपयोग किया और एक हफ्ते के बाद चलने फिरने मे सक्षम हो गया तब से में अभी तक पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ कोई दवा भी नही लेता हूँ और ना ही कोई खाने पीने का परहेज ही करता हूँ, और ना ही किसी प्रकार की कमजोरी महसूस करता हु।
तो कौन सा हैं वो काढ़ा आइये जानते हैं।
काढ़ा बनाने की विधि:
पाव (250 ग्राम) गोखरू कांटा (ये आपको पंसारी से मिल जायेगा) लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए और कांटा फेंक दीजिए। इस काढे को सुबह शाम खाली पेट हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए। शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद। काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रोटिन पूर्ववत ही रखिए।
15 दिन के अंदर यदि आपके अंदर अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाए तो डॉक्टर की सलाह लेकर दवा बंद कर दीजिए।जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है। मुझे उम्मीद है की ट्रांसप्लांट का विचार त्याग देंगे जैसा मैने किया है।
मेरा ये अनुभव नवभारत टाइम्स में भी छाप चूका हैं। जिसके बाद मुझे बहुत फोन आये और 3-400 लोगो को मैंने ये बताया भी। जिसमे से 90 % से ऊपर लोगो को आराम मिला।
और अगर आप भी ये प्रयोग करना चाहे तो निश्चिन्त हो कर करिये और अगर ऊपर लिखा हुआ समझ में ना आये या किसी प्रकार की शंका हो तो मुझसे मेरे फोन नंबर 8097236254 पर भी सहायता मांग सकता है।
आपको आराम मिले तो आप दूसरे भाइयो को भी इसी प्रकार बताइये।

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

मैने कई बार शनि देव के बारे मे बताया है

मैने कई बार शनि देव के बारे मे बताया है आज बताते है की कौन जातक नौकरी करता है और कौन करवाता है यानी नौकर चाकर होते है इनका सीधा सबंध शनि देव से है जब भी शनि देव नीचगत हो या खराब हो साथ मे परम मित्र शुक्र भी मंगल व सुर्य से पिडित हो तो जातक काम अपना खोलेगा तो कर्जा ही देगा राहू 12 मे होगा तो काम बदलता रहेगा पर कभी न सफल होता है न समझ पाता है ऐसे हाल मे गुलामी यानी नौकरी करनी पडती है पर वहाॅ भी धन सचंय नही हो पाता । सभी राशियो का अपना एक अधिकार रहता है शनि देव और केतू एक साथ अपना साथ निभाते है कर्म दोनो का सूचक है शनि का बलवान होना यानी केतू का बलवान होना पर यदि गुरू पिडित हो तो फलहीन रहेगा नौकरीनौकरी करवाना और नौकरी करना दो अलग अलग बातें है। जन्म कुन्डली में अगर शनि नीच का है तो नौकरी करवायेगा,और शनि अगर उच्च का है तो नौकरों से काम करवायेगा। तुला का शनि उच्च का होता है और मेष का शनि नीच का होता है। मेष राशि से जैसे जैसे शनि तुला राशि की तरफ़ बढता जाता है उच्चता की ओर अग्रसर होता जाता है,और तुला राशि से शनि जैसे जैसे आगे जाता है नीच की तरफ़ बढता जाता है,अपनी अपनी कुन्डली में देख कर पता किया जा सकता है कि शनि की स्थिति कहां पर है। और जिस स्थान पर शनि होता है उस स्थान के साथ शनि अपने से तीसरे स्थान पर,सातवें स्थान पर और दसवें स्थान पर अपना पूरा असर देता है। इसके साथ हीशनि पर राहु केतु मन्गल अगर असर दे रहे है तो शनि के अन्दर इन ग्रहों का भी असर शुरु हो जाता है,मतलब जैसे शनि नौकरी का मालिक है,और शनि वृष राशि का है,वृष राशि धन की राशि है और भौतिक सामान की राशि है,वृष राशि से अपनी खुद की पारिवारिक स्थिति का पता किया जाता है। वृष राशि में शनि नीच का होगा लेकिन उच्चता की तरफ़ बढता हुआ होगा,इसके प्रभाव से जातक धन और भौतिक सामान के संस्थान के प्रति काम करने के लिये उत्सुक रहेगा,इसके साथ ही शनि की तीसरी निगाह कर्क राशि पर होगी,कर्क राशि चन्द्रमा की राशि है,और कर्क राशि के लिये माता मन मकान पानी पानी वाली वस्तुयें चांदीचावल जनता और वाहन आदि के बारे में जाना जाताहै,तो जातक का ध्यान काम करने के प्रति भौतिक साधनों तथा धन के लिये इन क्षेत्रों में सबसे पहले ध्यान जायेगा। उसके बाद शनि की सातवीं निगाह वृश्चिक राशि पर होगी,यह भी जल की राशि है और मंगल इसका स्वामी है। यह मृत्यु के बाद प्राप्त धन की राशि है,जो सम्पत्ति मौत के बाद प्राप्त होती है उसके बारे में इसी राशि से जाना जाता है। किसी की सम्पत्ति को बेचकर उसके बीच से प्राप्त कियेजाने वाले कमीशन की राशि है,तो जातक जब नौकरी करेगा तो उसका ध्यान इन कामों की तरफ़ भी जायेगा। काम करवाने के लिऐ शनि का अच्छा होना साथ ही केतू अहम है जैसे शनि मृत्यु है वैसे केतू उसके बाद मोक्ष का है यानी शनि कर्म है और कराने का काम केतू का । जिसका चौथा भाव बलि या उसका स्वामि पूर्ण बल मे हो दसवा पूर्ण फल मे हो ऐसे जातक के पास सारी सुविधा होती है । पर जिनका राहू 11-12 घर जाऐगा वो अपनी जन्म भूमि से दूर काम करेगा 12 मे तो दूसरे देशो की यात्रा और वही का काम देगा ॥

अगर आप चाहते हैं कि आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाए तो

अगर आप चाहते हैं कि आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाए तो नीचे लिखे उपाय करें। यह उपाय आपके दुर्भाग्य कौ सौभाग्य में बदल देंगे।उपाय1- बरगद(बड़) के पत्ते को गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें।2- घर के मुख्य द्वार के ऊपर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकारलगाएं कि उनका मुख घर के अंदर की ओर रहे। उस पर सुबह दूर्वा अवश्य अर्पित करें।3- धन संबंधी कार्य सोमवार एवं बुधवार को करें।4- नए कार्य, व्यवसाय, नौकरी, रोजगार आदि शुभ कार्यों के लिए जाते समय घर की कोई महिला एक मुठ्ठी काले उड़द उस व्यक्ति के ऊपर से उतार कर भूमि पर छोड़ दे तो हर कार्य में सफलता मिलेगी।5- गरीब, असहाय, रोगी व किन्नरों की सहायता दान स्वरूप अवश्य करें। यदि संभव हो तो किन्नरों को दिए पैसे में से एक सिक्का वापस लेकर अपने कैश बॉक्स या लॉकर में रखें। इससे बहुत लाभ होगा।6- काली हल्दी की एक गांठ शुभ मुहूर्त में प्राप्त कर अपने घर में, व्यवसायी अपने कैशबॉक्स में तथा व्यापारी अपने गल्ले में रखें।7- रवि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बहेड़े की जड़ या एक पत्ता तथा शंखपुष्पी की जड़ लाकर घर में रखें। चांदी की डिब्बी में रखें तो और भी शुभ रहेगा।

दमा या अस्थमा से बचें -

Muktiya
• दमा या अस्थमा से बचें -
यह रोग मुख्यत: पौष्टिक भोजन की कमी, बहुत ज्यादा शारीरिक परिश्रम करने, धूल-धुँये से भरे हुए वातावरण में रहने से, सीलन एवं दुर्गन्ध भरे वातावरण मे रहने से, उपदंश या ज्यादा एलोपैथी दवाइयों के सेवन आदि के कारण हो जाता है।
अक्सर मेरे पास ऐसे भी मरीज आते हैं, जिन्होंने चर्म रोग, एक्जीमा, सोरायसिस आदि कोई भी बीमारी को एलोपैथी दवा से दबा दिया, फिर उसके परिणाम स्वरुप उनको दमा, हार्ट की बीमारी या घुटने की गंभीर बीमारी हो जाती है. फिर उन्हें जीवन भर कष्ट भोगना पड़ता है. अतः कभी भी किसी भी चर्मरोग के ऊपर कोई भी ऑइंटमेंट नहीं लगाये या उसे दबाने की दवाई न खाएं, नहीं तो उसका दुष्परिणाम आपको जिन्दगी भर भुगतना पड़ेगा.
इस रोग में जरा से श्रम से ही रोगी का दम फूल जाना, अधिक बलगम निकलना, खाँसी आना, खाँसी बार-बार तथा बडी तेज उठती है, गले से साँय-साँय की आवाज आती है, छाती में दर्द और खिंचाव बना रहता है, दमा, हँफनी, साँस फूलना, बैचैनी, घबराहट, साँस लेने व निकालने में बहुत कष्ट, लेटने में साँस फूलना, सर आगे झुकाकर बैठने से आराम मिलना आदि परेशानी होती हैं. ठण्ड में यह रोग बहुत बढ़ जाता है।
इस रोग का उपचार इस तरह करें -
1. आप सल्फर 200 को सुबह 7 बजे, दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को आठ बजे Nux Vom 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से सिर्फ एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें.
2. HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं 11की दो गोली दिन में तीन से चार बार लें.
3. या ब्रोंकाइल अस्थमा के लिए HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं 28 की दो गोली दिन में तीन से चार बार तक ली जा सकती है.
4. या बलगम बिलकुल नहीं निकलने पर HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं 97 की दो गोली दिन में तीन से चार बार तक ली जा सकती है.
5. साथ ही DROX 3 की दस बूँद आधे कप पानी में दिन में चार बार लें. दमा की तीव्र अवस्था में एक कांच के गिलास पानी भर कर उसमे 20 बूँद DROX 3 की डालकर हर दस-दस मिनिट से मरीज को दे सकते हैं.
6. बायो काम्ब नं. 2 की छह पिल्स भी दिन में चार बार चूसें. आपातकाल में इसे भी हर घंटे कुनकुने पानी से ले सकते हैं.
7. बहुत ज्यादा दर्द और तकलीफ होने पर इन तीनो दवाइयों को हर एक घंटे में बदल-बदल कर भी ले सकते हैं.
8. जो लोग दमा और अन्य रोगों से पीड़ित हैं और अंग्रेजी दवाइयां ले रहे हैं, वे उन्हें एक दम से बंद न करें और उपरोक्त इन दवाइयों को तीन माह तक लेने के बाद अपने डॉक्टर की सलाह से उन्हें धीरे-धीरे कम कर सकते हैं.
• शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग –
हमेशा स्वस्थ रहने के लिए कोई भी व्यक्ति या परिवार अगर निम्न उपचार द्वारा अपने शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग करता है और खान-पान तथा एक्सरसाइज भी निम्न अनुसार लेता है, तो उसे कभी भी कैंसर, डायबटीज, ह्रदय रोग, लिवर रोग, किडनी फेल्यर, टी.बी., फेफड़े के रोग, चर्म रोग आदि कोई भी गंभीर बीमारी नहीं होगी और वह आजीवन सपरिवार स्वस्थ, प्रसन्न और खुशहाल रह सकेगा -
1. सबसे पहले आप सुबह 7 बजे कुल्ला करके सल्फर 200 को, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें.
2. इन दवाइयों को लेने के एक हफ्ते बाद हर 15-15 दिन में सोरिनम 200 का मात्र एक-एक पांच बूँद का डोज चार बार तक ले, ताकि आपके शरीर के अंदर जमा दवाई और दूसरे अन्य केमिकल और पेस्टीसाइड के विकार दूर हो सकें और आपके शरीर के सभी ह्रदय, फेफड़े, लीवर, किडनी आदि मुख्य अंग सुचारू रूप से कार्य कर सकेंगे. बच्चों और ज्यादा वृद्धों में ये सभी दवा 30 की पावर में दें.
3. अगर कब्ज रहता हो, तो होम्योलेक्स या HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं. 67 की एक या आधी गोली रोज रात एक सफ्ताह तक 9.30 बजे लें. इसके बाद हर व्यक्ति को चाहिए कि वह इसे हर हफ्ते एक या आधी गोली रात्रि 9.30 बजे ले.
4. आप सुबह दो से चार गिलास कुनकुना पानी पीकर 5 मिनिट तक कौआ चाल (योग क्रिया) करें.
5. साथ ही पांच या अधिक से अधिक दस बार तक सूर्य नमस्कार करें. फिर 200 से 500 बार तक कपाल-भांति करें. इसके बाद प्राणायाम करें.
6. रोज सुबह और रात को 15-15 मिनिट का शवासन भी करें.
7. फिर एक घंटे बाद अगर सूट करे, तो कम से कम एक माह तक नारियल पानी लें.
8. सुबह और शाम को अगर संभव हो, तो एक घंटा अवश्य घूमें.
9. रात को सोते समय अष्टावक्र गीता में बताये अनुसार दो मिनिट के लिए “मैं स्वयं ही तीन लोक का चैतन्य सम्राट हूँ” ऐसा जाप करें.
10. उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के चार्ज किये और मिलाकर बने चुम्बकित जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में रोज दिन में 3 बार उपयोग करें.
11. रोज सुबह उच्च शक्ति चुम्बकों को हथेलियों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए लगायें और रात्रि को खाने के दो घंटे बाद पैर के तलुवों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए दक्षिणी चुम्बक को बायीं ओर और उत्तरी चुम्बक को दाहिनी ओर लगाये.
12. गेंहू, जौ, देसी चना और सोयाबीन को सम भाग मिलाकर पिसवा ले और उसकी रोटी सादे मसाले की रेशेदार सब्जी से खाएं. दाल का प्रयोग कम कर दें. बारीक आटे व मैदे से बनी वस्तुएं, तली वस्तुएं एव गरिष्ठ भोजन का त्याग करे।
13. सुबह-शाम चाय के स्थान पर नीबू का रस गरम पानी में मिला कर पिएं।
14. खाने में सिर्फ सेंधे नमक का प्रयोग करें.
15. रात को सोने से पहले पेट को ठण्डक पहुँचायें। इसके लिए खाने के चार घंटे बाद एक नेपकिन को सामान्य ठन्डे पानी से गीली करके पेट पर रखें और हर दो मिनिट में पलटते रहें. 15 मिनिट से 20 मिनिट तक इसे करें.
16. मैथी दाना 250 ग्राम, अजबाइन 100 ग्राम और काली जीरी 50 ग्राम को पीस कर इस चूर्ण को कुनकुने पानी से रात्रि 9.30 बजे एक चम्मच लें.
17. रात्रि को खाना और जमीकंद खाना, शराब पीना व धूम्रपान अगर करते हों या तम्बाखू खाते हों, तो इन्हें बंद करें. शाकाहारी भोजन ही लें.
18. अपने शरीर की सालाना ओवरहालिंग के लिए साल में एक बार अपने आसपास के किसी भी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में जाकर वहां का दस दिन का कोर्स करें.
19. अपने घर के बुजुर्ग लोगों की रोज एक घंटे के लिये सेवा और मदद करें.
20. अपने आसपास की झोपड़पट्टी में रहने वाले किसी गरीब व्यक्ति की हर हफ्ते जाकर मदद करें.
21. अध्यात्मिक कैप्सूल के रूप में मेरी पुस्तक मुक्तियाँ की एक-एक मुक्ति तीन माह तक रोज पढ़ें. इससे आपकी नेगेटिव एनर्जी कम होगी और पॉजिटिव एनर्जी बहुत तेजी से बढेगी.
22. मेरी स्वस्थ रहे, स्वस्थ करें, मुक्तियाँ और अन्य कई पुस्तकों को मेरे समाधान ग्रुप से निशुल्क डाउन लोड करें. आप चाहे तो अपना email address मेरे मेसेज बाक्स में दे दे, तो मैं आपको डायरेक्ट मेल कर दूंगा.
23. होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब नम्बर से मिलती हैं. इनके नम्बर ध्यान से लिखें. साथ ही होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब में कन्फ्यूज न हों. इन्हें साफ़-साफ़ लिखें.
24. किसी भी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तत्काल दिखायें.
25. होम्योपैथी की दवाइयों को मुंह साफ़ करके कुल्ला करके लेना चाहिए. इनको लेते समय किसी भी तरह की सुगन्धित चीजों और प्याज, लहसुन, काफी, हींग और मांसाहार आदि से बचे और दवा लेने के आधा घंटा पहले और बाद में कुछ न लें.
26. हर दिन नई एलोपथिक दवाइयां बन रही हैं और अधिकांश पुरानी दवाइयों के घातक और खतरनाक परिणामों के कारण इन्हें कुछ ही वर्षों में भारत को छोड़ कर विश्व के कई देशों में बेन भी किया जा रहा है.
27. हमें भी चाहिये कि हम मात्र एलोपथिक दवाइयों पर ही निर्भर न रहकर योगासन, सूर्य किरण भोजन, अमृत-जल या सूर्य किरण जल चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, बायोकेमिक दवाइयाँ आदि निर्दोष प्रणालियों को अपना कर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित करें.
28. इस तरह दवा मुक्त विश्व का निर्माण करना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य है और इसके लिए आप सभी का सहयोग चाहिये, जो आप मेरे इन सन्देशों को दूर-दूर तक फैला कर मुझे दे सकते हैं.
29. मेरी सभी स्वास्थ्य सम्बन्धी, लोक कल्याण, मानवाधिकार और आध्यात्मिक पोस्ट और पुस्तकों को देखने और उन्हें डाउनलोड करने के लिए आप मेरे ग्रुप “HEALTH CARE स्वस्थ रहो, स्वस्थ करो” और “Samadhan समाधान” से जुड़ सकते हैं और अपने दोस्तों को भी जोड़ सकते हैं.
30. मेरे नये आध्यात्मिक ग्रुप “कहान गुरु आस्था परिवार Kahan Guru Aastha Parivar” में आप सभी का स्वागत है. अतः मेरे इस इस शाश्वत कल्याणकारी ग्रुप से खुद भी जुड़े और अपने संगी-साथी को भी जोड़कर उनका भी अपने निज-परमात्मा के चैतन्य-चमत्कार से परिचय करवाएं.