शनिवार, 27 अक्टूबर 2018

भारत के पास



3. जब कहीं भ्रमण करने का कोई साधन स्कूटर मोटर साईकल, जहाज वगैरह नहीं थे. तब भारत के पास बडे बडे वायु विमान हुआ करते थे। (इसका उदाहरण आज भी अफगानिस्तान में निकला महाभारत कालीन विमान है. जिसके पास जाते ही वहाँ के सैनिक गायब हो जाते हैं। जिसे देखकर आज का विज्ञान भी हैरान है).....

4. जब डाक्टर्स नहीं थे. तब सहज में स्वस्थ होने की बहुत सी औषधियों का ज्ञाता था, भारत देश सौर ऊर्जा की शक्ति का ज्ञाता था भारत देश। चरक और धनवंतरी जैसे महान आयुर्वेद के आचार्य थे भारत देश में......

5. जब लोगों के पास हथियार के नाम पर लकडी के टुकडे हुआ करते थे. उस समय भारत देश ने आग्नेयास्त्र, प्राक्षेपास्त्र, वायव्यअस्त्र बडे बडे परमाणु हथियारों का ज्ञाता था भारत......

6. हमारे इतिहास पर रिसर्च करके ही अल्बर्ट आईंसटाईन ने अणु परमाणु पर खोज की है.....

7. आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके नासा अंतरिक्ष में ग्रहों की खोज कर रहा है......

8. आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके रशिया और अमेरीका बडे बडे हथियार बना रहा है.. ...

9. आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके रूस, ब्रिटेन, अमेरीका, थाईलैंड, इंडोनेशिया बडे बडे देश बचपन से ही बच्चों को संस्कृत सिखा रहे हैं स्कूलों मे.....

10.आज हमारे इतिहास पर रिसर्च करके वहाँ के डाक्टर्स बिना इंजेक्शन, बिना अंग्रेजी दवाईयों के केवल ओमकार का जप करने से लोगों के हार्ट अटैक, बीपी, पेट, सिर, गले छाती की बडी बडी बिमारियाँ ठीक कर रहे हैं। ओमकार थैरपी का नाम देकर इस नाम से बडे बडे हॉस्पिटल खोल रहे हैं.
और हम किस दुनिया में जी रहे हैं?? अपने इतिहास पर गौरव करने की बजाय हम अपने इतिहास को भूलते जा रहे हैं। हम अपनी महिमा को भूलते जा रहे हैं।
हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं....

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

महाकाल" से शिव ज्योतिर्लिंगों के बीच कैसा सम्बन्ध है..

to Shri Banke Bihari Temple, Vrindavan
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की भारत में ऐसे शिव मंदिर है जो केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक एक सीधी रेखा में बनाये गये है। आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसा कैसा विज्ञान और तकनीक था जिसे हम आज तक समझ ही नहीं पाये? उत्तराखंड का केदारनाथ, तेलंगाना का कालेश्वरम, आंध्रप्रदेश का कालहस्ती, तमिलनाडू का एकंबरेश्वर, चिदंबरम और अंततः रामेश्वरम मंदिरों को 79° E 41’54” Longitude के भौगोलिक सीधी रेखा में बनाया गया है।
यह सारे मंदिर प्रकृति के 5 तत्वों में लिंग की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे हम आम भाषा में पंच भूत कहते है। पंच भूत यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष। इन्ही पांच तत्वों के आधार पर इन पांच शिव लिंगों को प्रतिष्टापित किया है। जल का प्रतिनिधित्व तिरुवनैकवल मंदिर में है, आग का प्रतिनिधित्व तिरुवन्नमलई में है, हवा का प्रतिनिधित्व कालाहस्ती में है, पृथ्वी का प्रतिनिधित्व कांचीपुरम में है और अतं में अंतरिक्ष या आकाश का प्रतिनिधित्व चिदंबरम मंदिर में है! वास्तु-विज्ञान-वेद का अद्भुत समागम को दर्शाते हैं ये पांच मंदिर।
भौगॊलिक रूप से भी इन मंदिरों में विशेषता पायी जाती है। इन पांच मंदिरों को योग विज्ञान के अनुसार बनाया गया था, और एक दूसरे के साथ एक निश्चित भौगोलिक संरेखण में रखा गया है। इस के पीछे निश्चित ही कॊई विज्ञान होगा जो मनुष्य के शरीर पर प्रभाव करता होगा। इन मंदिरों का करीब चार हज़ार वर्ष पूर्व निर्माण किया गया था जब उन स्थानों के अक्षांश और देशांतर को मापने के लिए कोई उपग्रह तकनीक उपलब्ध ही नहीं था। तो फिर कैसे इतने सटीक रूप से पांच मंदिरों को प्रतिष्टापित किया गया था? उत्तर भगवान ही जाने।
केदारनाथ और रामेश्वरम के बीच 2383 किमी की दूरी है। लेकिन ये सारे मंदिर लगभग एक ही समानांतर रेखा में पड़ते है। आखिर हज़ारों वर्ष पूर्व किस तकनीक का उपयॊग कर इन मंदिरों को समानांतर रेखा में बनाया गया है यह आज तक रहस्य ही है। श्रीकालहस्ती मंदिर में टिमटिमाते दीपक से पता चलता है कि वह वायु लिंग है। तिरूवनिक्का मंदिर के अंदरूनी पठार में जल वसंत से पता चलता है कि यह जल लिंग है। अन्नामलाई पहाड़ी पर विशाल दीपक से पता चलता है कि वह अग्नि लिंग है। कंचिपुरम के रेत के स्वयंभू लिंग से पता चलता है कि वह पृथ्वी लिंग है और चिदंबरम की निराकार अवस्था से भगवान के निराकारता यानी आकाश तत्व का पता लगता है।
अब यह आश्चर्य की बात नहीं तो और क्या है कि ब्रह्मांड के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करनेवाले पांच लिंगो को एक समान रेखा में सदियों पूर्व ही प्रतिष्टापित किया गया है। हमें हमारे पूर्वजों के ज्ञान और बुद्दिमत्ता पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास ऐसा विज्ञान और तकनीक था जिसे आधुनिक विज्ञान भी नहीं भेद पाया है। माना जाता है कि केवल यह पांच मंदिर ही नहीं अपितु इसी रेखा में अनेक मंदिर होगें जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी रेखा में पड़ते है। इस रेखा को “शिव शक्ति अक्श रेखा” भी कहा जाता है। संभवता यह सारे मंदिर कैलाश को द्यान में रखते हुए बनाया गया हो जो 81.3119° E में पड़ता है!? उत्तर शिवजी ही जाने। ...
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कमाल की बात है "महाकाल" से शिव ज्योतिर्लिंगों के बीच कैसा सम्बन्ध है......??
उज्जैन से शेष ज्योतिर्लिंगों की दूरी भी है रोचक-
उज्जैन से सोमनाथ- 777 किमी
उज्जैन से ओंकारेश्वर- 111 किमी
उज्जैन से भीमाशंकर- 666 किमी
उज्जैन से काशी विश्वनाथ- 999 किमी
उज्जैन से,मल्लिकार्जुन- 999 किमी
उज्जैन से केदारनाथ- 888 किमी
उज्जैन से त्रयंबकेश्वर- 555 किमी
उज्जैन से बैजनाथ- 999 किमी
उज्जैन से रामेश्वरम- 1999 किमी
उज्जैन से घृष्णेश्वर - 555 किमी
हिन्दु धर्म में कुछ भी बिना कारण के नही होता था ।
उज्जैन पृथ्वी का केंद्र माना जाता है । जो सनातन धर्म में हजारों सालों से केंद्र मानते आ रहे है इसलिए उज्जैन में सूर्य की गणना और ज्योतिष गण ना के लिए मानव निर्मित यंत्र भी बनाये गये है करीब 2050 वर्ष पहले ।
और जब करीब 100 साल पहले पृथ्वी पर काल्पनिक रेखा (कर्क)अंग्रेज वैज्ञानिक द्वारा बनायीं गयी तो उनका मध्य भाग उज्जैन ही निकला । आज भी वैज्ञानिक उज्जैन ही आते है सूर्य और अन्तरिक्ष की जानकारी के लिये।जय श्री महाँकाल राजा की 🚩🚩🚩🚩🚩

🤵🏻 *मैनेजमेंट लेसन:*

🤵🏻 *मैनेजमेंट लेसन:*
एक दिन एक कुत्ता 🐕 जंगल में रास्ता खो गया..
तभी उसने देखा, एक शेर 🦁 उसकी तरफ आ रहा है..
कुत्ते की सांस रूक गयी..
"आज तो काम तमाम मेरा..!"
He thought, & applied A lesson of
MBA..
फिर उसने सामने कुछ सूखी हड्डियाँ  पड़ी देखी..
वो आते हुए शेर की तरफ पीठ कर के बैठ गया..
और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा,
और जोर जोर से बोलने लगा..
"वाह ! शेर को खाने का मज़ा ही कुछ और है..
एक और मिल जाए तो पूरी दावत हो जायेगी !"
और उसने जोर से डकार मारी..
इस बार शेर सोच में पड़ गया..
उसने सोचा-
"ये कुत्ता तो शेर का शिकार करता है ! जान बचा कर भागने मे ही भलाइ है !"
और शेर वहां से जान बचा के भाग गया..
पेड़ पर बैठा एक बन्दर 🐒 यह सब तमाशा देख रहा था..
उसने सोचा यह अच्छा मौका है,
शेर को सारी कहानी बता देता हूँ ..
शेर से दोस्ती भी हो जायेगी,
और उससे ज़िन्दगी भर के लिए जान का खतरा भी दूर हो जायेगा..
वो फटाफट शेर के पीछे भागा..
कुत्ते ने बन्दर को जाते हुए देख लिया और समझ गया की कोई लोचा है..
उधर बन्दर ने शेर को सारी कहानी बता दी, की कैसे कुत्ते ने उसे बेवकूफ बनाया है..
शेर जोर से दहाडा -
"चल मेरे साथ, अभी उसकी लीला ख़तम करता हूँ"..
और बन्दर को अपनी पीठ पर बैठा कर शेर कुत्ते की तरफ चल दिया..
Can you imagine the quick "management" by the DOG...???
कुत्ते ने शेर को आते देखा तो एक बार फिर उसके आगे जान का संकट आ गया,
मगर फिर हिम्मत कर कुत्ता उसकी तरफ पीठ करके बैठ गया l
He applied Another lesson of MBA ..
और जोर जोर से बोलने लगा..
"इस बन्दर को भेजे 1 घंटा हो गया..
साला एक शेर को फंसा कर नहीं ला सकता !"
यह सुनते ही शेर ने बंदर को वही पटका और वापस पिछे भाग गया ।
(Moral 1:-Don't loose your confidence in the difficult conditions.
Moral 2:-Be a Smart Worker rather than a Hard Worker.
Moral 3:-There are many such monkeys around us, try to identify them..)
😃Happy living😃

परमात्मा का आभार करो

एक पुरानी सी इमारत में था वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो।
एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला। गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक सामान वाली चिट्ठी खोली तो वह चिठ्ठी को एकटक देखते ही रह गए। एक बार तो उनका मन भटक गया। उन्हें अपनी आँखों के सामने तारे चमकते हुए नज़र आए किन्तु शीघ्र ही उन्होंने अपनी तंत्रिकाओं पर नियंत्रण पा लिया। आटे-दाल-चावल आदि के बाद पत्नी ने लिखा था, *"बेटी का विवाह 20 तारीख़ को है, उसके दहेज का सामान।"* कुछ देर सोचते रहे फिर बाकी चीजों की क़ीमत लिखने के बाद दहेज के सामने लिखा, '' *यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।*''
एक-दो रोगी आए थे। उन्हें वैद्यजी दवाई दे रहे थे। इसी दौरान एक बड़ी सी कार उनके दवाखाने के सामने आकर रुकी। वैद्यजी ने कोई खास तवज्जो नहीं दी क्योंकि कई कारों वाले उनके पास आते रहते थे। दोनों मरीज दवाई लेकर चले गए। वह सूटेड-बूटेड साहब कार से बाहर निकले और नमस्ते करके बेंच पर बैठ गए। वैद्यजी ने कहा कि अगर आपको अपने लिए दवा लेनी है तो इधर स्टूल पर आएँ ताकि आपकी नाड़ी देख लूँ और अगर किसी रोगी की दवाई लेकर जाना है तो बीमारी की स्थिति का वर्णन करें।
वह साहब कहने लगे "वैद्यजी! आपने मुझे पहचाना नहीं। मेरा नाम कृष्णलाल है लेकिन आप मुझे पहचान भी कैसे सकते हैं? क्योंकि मैं 15-16 साल बाद आपके दवाखाने पर आया हूँ। आप को पिछली मुलाकात का हाल सुनाता हूँ, फिर आपको सारी बात याद आ जाएगी। जब मैं पहली बार यहाँ आया था तो मैं खुद नहीं आया था अपितु ईश्वर मुझे आप के पास ले आया था क्योंकि ईश्वर ने मुझ पर कृपा की थी और वह मेरा घर आबाद करना चाहता था। हुआ इस तरह था कि मैं कार से अपने पैतृक घर जा रहा था। बिल्कुल आपके दवाखाने के सामने हमारी कार पंक्चर हो गई। ड्राईवर कार का पहिया उतार कर पंक्चर लगवाने चला गया। आपने देखा कि गर्मी में मैं कार के पास खड़ा था तो आप मेरे पास आए और दवाखाने की ओर इशारा किया और कहा कि इधर आकर कुर्सी पर बैठ जाएँ। अंधा क्या चाहे दो आँखें और कुर्सी पर आकर बैठ गया। ड्राइवर ने कुछ ज्यादा ही देर लगा दी थी।
एक छोटी-सी बच्ची भी यहाँ आपकी मेज़ के पास खड़ी थी और बार-बार कह रही थी, '' चलो न बाबा, मुझे भूख लगी है। आप उससे कह रहे थे कि बेटी थोड़ा धीरज धरो, चलते हैं। मैं यह सोच कर कि इतनी देर से आप के पास बैठा था और मेरे ही कारण आप खाना खाने भी नहीं जा रहे थे। मुझे कोई दवाई खरीद लेनी चाहिए ताकि आप मेरे बैठने का भार महसूस न करें। मैंने कहा वैद्यजी मैं पिछले 5-6 साल से इंग्लैंड में रहकर कारोबार कर रहा हूँ। इंग्लैंड जाने से पहले मेरी शादी हो गई थी लेकिन अब तक बच्चे के सुख से वंचित हूँ। यहाँ भी इलाज कराया और वहाँ इंग्लैंड में भी लेकिन किस्मत ने निराशा के सिवा और कुछ नहीं दिया।"
आपने कहा था, "मेरे भाई! भगवान से निराश न होओ। याद रखो कि उसके कोष में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है। आस-औलाद, धन-इज्जत, सुख-दुःख, जीवन-मृत्यु सब कुछ उसी के हाथ में है। यह किसी वैद्य या डॉक्टर के हाथ में नहीं होता और न ही किसी दवा में होता है। जो कुछ होना होता है वह सब भगवान के आदेश से होता है। औलाद देनी है तो उसी ने देनी है। मुझे याद है आप बातें करते जा रहे थे और साथ-साथ पुड़िया भी बनाते जा रहे थे। सभी दवा आपने दो भागों में विभाजित कर दो अलग-अलग लिफ़ाफ़ों में डाली थीं और फिर मुझसे पूछकर आप ने एक लिफ़ाफ़े पर मेरा और दूसरे पर मेरी पत्नी का नाम लिखकर दवा उपयोग करने का तरीका बताया था।
मैंने तब बेदिली से वह दवाई ले ली थी क्योंकि मैं सिर्फ कुछ पैसे आप को देना चाहता था। लेकिन जब दवा लेने के बाद मैंने पैसे पूछे तो आपने कहा था, बस ठीक है। मैंने जोर डाला, तो आपने कहा कि आज का खाता बंद हो गया है। मैंने कहा मुझे आपकी बात समझ नहीं आई। इसी दौरान वहां एक और आदमी आया उसने हमारी चर्चा सुनकर मुझे बताया कि खाता बंद होने का मतलब यह है कि आज के घरेलू खर्च के लिए जितनी राशि वैद्यजी ने भगवान से माँगी थी वह ईश्वर ने उन्हें दे दी है। अधिक पैसे वे नहीं ले सकते।
मैं कुछ हैरान हुआ और कुछ दिल में लज्जित भी कि मेरे विचार कितने निम्न थे और यह सरलचित्त वैद्य कितना महान है। मैंने जब घर जा कर पत्नी को औषधि दिखाई और सारी बात बताई तो उसके मुँह से निकला वो इंसान नहीं कोई देवता है और उसकी दी हुई दवा ही हमारे मन की मुराद पूरी करने का कारण बनेंगी। आज मेरे घर में दो फूल खिले हुए हैं। हम दोनों पति-पत्नी हर समय आपके लिए प्रार्थना करते रहते हैं। इतने साल तक कारोबार ने फ़ुरसत ही न दी कि स्वयं आकर आपसे धन्यवाद के दो शब्द ही कह जाता। इतने बरसों बाद आज भारत आया हूँ और कार केवल यहीं रोकी है।
वैद्यजी हमारा सारा परिवार इंग्लैंड में सेटल हो चुका है। केवल मेरी एक विधवा बहन अपनी बेटी के साथ भारत में रहती है। हमारी भान्जी की शादी इस महीने की 21 तारीख को होनी है। न जाने क्यों जब-जब मैं अपनी भान्जी के भात के लिए कोई सामान खरीदता था तो मेरी आँखों के सामने आपकी वह छोटी-सी बेटी भी आ जाती थी और हर सामान मैं दोहरा खरीद लेता था। मैं आपके विचारों को जानता था कि संभवतः आप वह सामान न लें किन्तु मुझे लगता था कि मेरी अपनी सगी भान्जी के साथ जो चेहरा मुझे बार-बार दिख रहा है वह भी मेरी भान्जी ही है। मुझे लगता था कि ईश्वर ने इस भान्जी के विवाह में भी मुझे भात भरने की ज़िम्मेदारी दी है।
वैद्यजी की आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं और बहुत धीमी आवाज़ में बोले, '' कृष्णलाल जी, आप जो कुछ कह रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा कि ईश्वर की यह क्या माया है। आप मेरी श्रीमती के हाथ की लिखी हुई यह चिठ्ठी देखिये।" और वैद्यजी ने चिट्ठी खोलकर कृष्णलाल जी को पकड़ा दी। वहाँ उपस्थित सभी यह देखकर हैरान रह गए कि ''दहेज का सामान'' के सामने लिखा हुआ था '' यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।''
काँपती-सी आवाज़ में वैद्यजी बोले, "कृष्णलाल जी, विश्वास कीजिये कि आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि पत्नी ने चिठ्ठी पर आवश्यकता लिखी हो और भगवान ने उसी दिन उसकी व्यवस्था न कर दी हो। आपकी बातें सुनकर तो लगता है कि भगवान को पता होता है कि किस दिन मेरी श्रीमती क्या लिखने वाली हैं अन्यथा आपसे इतने दिन पहले ही सामान ख़रीदना आरम्भ न करवा दिया होता परमात्मा ने। वाह भगवान वाह! तू महान है तू दयावान है। मैं हैरान हूँ कि वह कैसे अपने रंग दिखाता है।"
वैद्यजी ने आगे कहा,सँभाला है, एक ही पाठ पढ़ा है कि सुबह परमात्मा का आभार करो, शाम को अच्छा दिन गुज़रने का आभार करो, खाते समय उसका आभार करो, सोते समय उसका आभार करो।

बरहस्पति के दान व उपाय

बरहस्पति के दान व उपाय
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को देव गुरु कहा गया है। गुरु को धर्म, दर्शन, ज्ञान और संतान का कारक माना जाता है। बृहस्पति ग्रह शांति से संबंधित कई उपाय हैं, जिन्हें करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। जन्म कुंडली में बृहस्पति की अनुकूल स्थिति से धर्म, दर्शन और संतान की प्राप्ति होती है। गुरु को वैदिक ज्योतिष में आकाश तत्व का कारक माना गया है। इसका गुण विशालता, विकास और व्यक्ति की कुंडली और जीवन में विस्तार का संकेत होता है। गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव से संतान प्राप्ति में बाधा, पेट से संबंधित बीमारी और मोटापा आदि परेशानी होती है। अगर आप बृहस्पति के अशुभ प्रभाव से पीड़ित हैं तो बृहस्पति ग्रह शांति के लिए ये उपाय करें। इन कार्यों को करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी और अशुभ प्रभाव दूर होंगे।
वेश-भूषा एवं जीवन शैली से जुड़े बृहस्पति ग्रह शांति के उपाय
पीला, क्रीम कलर और ऑफ़ व्हाइट रंग उपयोग में लाया जा सकता है।
गुरु ब्राह्मण एवं अपने से बड़े लोगों का सम्मान करें। यदि आप महिला हैं तो अपने पति का सम्मान करें।
अपने बच्चे और बड़े भाई से अच्छे संबंध बनाएँ।
किसी से झूठ न बोलें।
ज्ञान का वितरण करें।
विशेषतः सुबह किये जाने वाले बृहस्पति ग्रह के उपाय
भगवान शिव की आराधना करें।
वामन देव की पूजा करें।
शिव सहस्रनाम स्तोत्र का जाप करें।
श्रीमद् भागवत पुराण का पाठ करें।
बृहस्पति के लिये व्रत
शीघ्र विवाह, धन, विद्या आदि की प्राप्ति के लिए गुरुवार के दिन व्रत धारण करें।
बृहस्पति शांति के लिये दान करें
बृहस्पति ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान गुरुवार के दिन बृहस्पति के होरा और गुरु के नक्षत्रों (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व भाद्रपद) में शाम को करना चाहिए।
दान की जाने वाली वस्तुएँ हैं- केसरिया रंग, हल्दी, स्वर्ण, चने की दाल, पीत वस्त्र, कच्चा नमक, शुद्ध घी, पीले पुष्प, पुखराज रत्न एवं किताबें।
बृहस्पति के लिए रत्न
ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह शांति के लिए पुखराज रत्न को धारण किया जाता है। गुरु धनु और मीन राशि का स्वामी है। अतः धनु और मीन राशि के जातकों के लिए पुखराज रत्न शुभ होता है।
श्री गुरु यंत्र
बृहस्पति के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए गुरु यंत्र को गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा एवं इसके नक्षत्र के समय धारण करें।
बृहस्पति के लिये जड़ी
गुरु ग्रह (बृहस्पति) के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पीपल की जड़ धारण करें। इस जड़ को गुरु की होरा और गुरु के नक्षत्र में धारण करें।
बृहस्पति के लिये रुद्राक्ष
गुरु ग्रह (बृहस्पति) की शुभता के लिए 5 मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभदायक होता है।
पाँच मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः।
ॐ ह्रां आं क्षंयों सः ।।
बृहस्पति मंत्र
बृहस्पति देव से शुभ आशीष पाने के लिए गुरु बीज मंत्र का जाप करें। मंत्र - ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः!
वैसे तो गुरु मंत्र को कम से कम 19000 बार इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए, परंतु देश-काल-पात्र पद्धति के अनुसार कलयुग में इसे 76000 बार करने की सलाह दी गई है।
गुरु की कृपा दृष्टि पाने के लिए आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं - ॐ बृं बृहस्पतये नमः!
ऊपर दिए गए बृहस्पति शांति के उपाय बहुत ही कारगर हैं। ये गुरु ग्रह शांति के उपाय वैदिक ज्योतिष पर आधारित हैं, जिन्हें जातक आसानी से कर सकते हैं। यदि कोई जातक विधि अनुसार बृहस्पति को मजबूत करने के उपाय को करता है तो उसे न केवल बृहस्पति के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उसे गुरु और स्वयं ब्रह्मा जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस लेख में आपको बृहस्पति दोष के उपाय के साथ-साथ उन्हें करने की विधि भी बतायी गई है जिसके अनुसार, आप गुरु मंत्र या गुरु यंत्र को स्थापित कर सकते हैं।
ज्योतिष में गुरु को शुभ ग्रह की श्रेणी में रखा गया है। हालाँकि किसी क्रूर ग्रह से पीड़ित होने पर अथवा अपनी नीच राशि मकर में होने पर गुरु के फल नकारात्मक भी हो सकते हैं। यदि आपका गुरु शुभ स्थिति में है अथवा अपनी उच्च राशि (कर्क) में बैठा है तो आप गुरु ग्रह शांति के उपाय कर सकते हैं। इससे आपके ज्ञान में वृद्धि होगी और धर्म कर्म के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। बृहस्पति मंत्र का जाप करने से जातकों को संतान सुख एवं अपने गुरुजनों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
नोट रत्न कुंडली मे गुरु की स्थिति देखकर ही धारण करे 
जय महाकाल 
जय श्रीराम
*काला जादू से बचने के उपाय*
*क्या आप काले जादू पर विश्वास करते है? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आप हाँ या ना दोनों मे दे सकते है। लेकिन हकीकत ये है की इस काले जादू शब्द ने दुनिया भर मे लोगों के दिमाग मे अपनी जगह बना ली है। बहुत से लोग इससे डरते है और काले जादू से दूर ही रहना चाहते है। जैसे की ये काला-जादू शब्द ही अपने आप मे बड़ा नकरात्मक एहसास दिलाता है, और बुरे कामों के लिए इस्तेमाल के रूप मे जाना जाता है। लोग अक्सर इससे डरते तो है, पर वही इस विषय पर आधारित TV सिरियल व फिल्मों को बड़े चाव से देखते है।*
*नींबू, मिर्ची, सिंदूर, लोहे की पिन व गुड़ियों जैसी चीज़ों का प्रयोग काले-जादू के दौरान बड़ा किया जाता है। जो देखने मे रोचक व भयानक दोनों ही लगते है।जब एक इंसान ऊर्जा का इस्तेमाल किसी गलत काम के लिए करता है तो वो अक्सर वो इस काले-जादू का सहारा लेकर सामने वाले का बुरा करना चाहता है। हमने ऊपर ऊर्जा की बात की, जिसका इस्तेमाल भी इंसान अच्छे या बुरे रूप मे कर सकता है। यानि इंसान चाहे तो इस ऊर्जा को देवी रूप या फिर शैतानी रूप मे बना सकता है। पर इससे पहले की हम आपको काले-जादू के प्रभाव से बचने के उपाय बताए, ये जान लेना भी उतना ही जरूरी है कि अक्सर कई बाते सिर्फ हमारे दिमाग की उपज होती है। जैसे की आप कही जाते वक़्त रास्ते मे अचानक नींबू-मिर्ची देख ले,या फिर चावल के साथ सिंदूर बिखरा हुआ देख ले- तो ये चीज़े यकीनन दिमाग मे एक गलत संदेश डालती है।यानि दिमागी तौर पर किसी इंसान को परेशान करने का ये आसान तरीका है।जिसमे बिना कुछ किए बस इंसान के रास्ते मे इनमे से कोई सामान रख दिया जाये। वो सोच-सोचकर ही हर दिन परेशान हो जाएगा।*
*दूसरी तरफ ये कहना बिलकुल गलत नहीं होगा की काले-जादू का इस्तेमाल ज़्यादातर वो लोग ही करते है, जिनहे हर काम का परिणाम जल्दी चाहिए होता है। जो जैसे-तैसे सफलता को प्राप्त करना चाहते है।एक आम इंसान के जैसे रहकर,लंबे समय तक किए जाने वाला परिश्रम इन्हे राज़ नहीं आता। तो चलिये आपको हम कुछ ऐसे उपाय बताते है जिसके इस्तेमाल से आप काले-जादू के प्रभाव को दूर कर सकते है। अगर आपको लग रहा हो की किसी ने आप पर काला-जादू कर दिया है, जिसकी वजह से आपके सारे काम रुक रहे है, या बार-बार परेशान आ रही है तो इन उपाय को आजमा कर देख सकते है।*
*पहले उपाय के रूप मे आप हनुमान चालीसा का सहारा ले और हर मंगलवार मंदिर भी जाये। हर सभी हनुमान चालीसा की ताकत से रु-ब-रु है की कैसे इसके पाठ से भूत-पिचास भी दूर रहते है। काले जादू के प्रभाव को खत्म करने के लिए आप धतुरे के पौधे का इस्तेमाल भी कर सकते है। इस उपाय के लिए आप पुष्य नक्षत्र में एक धतूरे के पौधे को जड़ से उखाड़कर, फिर उसे जमीन मे उल्टा लगा दे, जिसमे उसकी जड़े ऊपर नज़र आए। इसके अलावा एक उपाय है कि आप अमावस्या और पूर्णिमा के दिन बाहर जाकर किसी के भी साथ पार्टी या खाना खाने से बचे।अगर आपको अपने ऊपर काले-जादू होने का संदेह है।मांस-मदिरा से खास तौर से दूर रहे।*
*काले जादू के असर से दूर रहने के लिय कई लोग शक्तिशाली कवच धारण करने के अलावा अपने-अपने घरों मे सिद्ध यंत्रों की स्थापना भी करते है। ताकि घर व जीवन मे शांति और खुशी बने रहे। इसके अलावा एक उपाय के बारे मे यकीनन आप लोगों ने जरूर सुना होगा कि बहुत से लोग काले-जादू के प्रभाव को खतम करने के लिए गोमूत्र का सहारा भी लेते है। कुछ लोग अपने घर में गोमूत्र का छिड़काव करवाते है। वैसे भी हमरे शास्त्रों मे गोमूत्र को पवित्र माना गया है, क्योंकि गाय मे सभी देवी-देवताओ का वास होता है। एक अन्य बात अवश्य ध्यान रखे की अक्सर जादू टोटका लोग चौक पर करते है। यदि आप कभी किसी ऐसे रास्ते से गुजरे जहां आपतिजनक कुछ दिखे तो उसपर से न गुजरे, या उस पर गलती से भी कदम न रखे। इसी तरफ नकारात्मक शक्ति को अपने घर से दूर रखने के लिए आप घर के दरवाजे पर नींबू-मिर्ची बांध सकते है। कई बार आपने वैसे देखा भी होगा की बहुत से लोग ऐसा करते है, और यहाँ तक की चप्पल व किसी शैतान का मुखोटा भी घर के बाहर लटका देता है, ताकि उनके घर को किसी की बुरी नज़र न लगे।*
*जादू-टोटके से बचाव के लिए आप शनिवार के दिन एक कटोरी में तेल लेकर, उसमें अपना चेहरा देखकर, किसी जरुरतमंद व्यक्ति या मंदिर मे उस तेल का दान कर दे। अगर आपको लगता है की हर बार किए जा रहे प्रयास विफल होते जा रहे है, मन मे अशांति बनी रहती है या घर का महोल पहले जैसा नहीं रहा, अब माहौल काफी खराब होते जा रहा है। जब पूर्ण विश्वास लगे की किसी की बुरी नज़र के आप शिकार हो चुके है तो ऐसे मे आप एक बर्तन में सरसों का तेल लेकर आग पर उसे गर्म करले, फिर इसमें चमड़े का एक टुकड़ा डालें। जब उसमे से धुआं निकलने लगे तब ऊपर से नींबू, तीन काली चूड़ी, थोड़ी सी फिटकरी और एक कील डाल दें उस बर्तन मे। सब कुछ डालने के बाद उस बर्तन को सिर के ऊपर से सात बार घुमा ले और इसके बाद इसे किसी गड्डे मे दबा दें, फिर ऊपर से एक कील ठोंक दें। ऐसा करने से व्यक्ति नकारात्मक शक्ति से अपना बचाव कर पता है।*
*अंत मे हम उम्मीद करते है की आप अपने जीवन मे कभी भी शक्ति का प्रयोग नकारात्मक रूप मे नहीं करेंगे। शक्ति एक ऐसे चीज़ है जिसका प्रयोग इंसान अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकता है, वो न बुरी होती है न अच्छी, पर हाँ वो दोनों हो सकती है। तो इसका इस्तेमाल कैसे करे ये आपकी सोच पर निर्भर करता है।*

शुक्र ग्रह शांति, मंत्र एवं उपाय

शुक्र ग्रह शांति, मंत्र एवं उपाय
वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को लाभदाता ग्रह कहा जाता है। यह प्रेम, जीवनसाथी, सांसारिक वैभव, प्रजनन और कामुक विचारों का कारक है। शुक्र ग्रह शांति के लिए कई उपाय बताये गये हैं। जिन लोगों की कुंडली में शुक्र उच्च भाव में रहता है उन्हें जीवन में भौतिक संसाधनों का आनंद प्राप्त होता है। वहीं कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर होने से आर्थिक कष्ट, स्त्री सुख में कमी, डायबिटीज़ और सांसारिक सुखों में कमी आने लगती है। ज्योतिष में शुक्र ग्रह शांति के लिए दान, पूजा-पाठ और रत्न धारण किये जाते हैं। शुक्र से जुड़े इन उपायों में शुक्रवार का व्रत, दुर्गाशप्तशी का पाठ, चावल और श्वेत वस्त्र का दान आदि करने का विधान है। अगर आपकी कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर है, तो उन उपायों को अवश्य करें। इन कार्यों को करने से शुक्र ग्रह से शुभ फल की प्राप्ति होगी और अशुभ प्रभाव दूर होंगे।
वेश-भूषा एवं जीवन शैली से जुड़े शुक्र ग्रह शांति के उपाय
चमकदार सफेद एवं गुलाबी रंग का प्रयोग करें।
प्रियतम एवं अन्य महिलाओं का सम्मान करें। यदि आप पुरुष हैं तो अपनी पत्नी का आदर करें।
कलात्मक क्रियाओं का विकास करें।
चरित्रवान बनें।
विशेषतः सुबह किये जाने वाले शुक्र ग्रह के उपाय
माँ लक्ष्मी अथवा जगदम्बे माँ की पूजा करें।
भगवान परशुराम की आराधना करें।
श्री सूक्त का पाठ करें।
शुक्र के लिये व्रत
अशुभ शुक्र की शांति के लिए शुक्रवार के दिन उपवास रखें।
शुक्र शांति के लिये दान करें
पीड़ित शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं को शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा एवं इसके नक्षत्रों (भरानी, पूर्व फाल्गुनी, पूर्व षाढ़ा) के समय दान करना चाहिए।
दान करने वाली वस्तुएँ- दही, खीर, ज्वार, इत्र, रंग-बिरंगे कपड़े, चांदी, चावल इत्यादि।
शुक्र के लिए रत्न
शुक्र ग्रह के लिए हीरा धारण किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार वृषभ और तुला दोनों शुक्र की राशि हैं। अतः इन राशि के जातकों के लिए हीरा पहनना शुभ होता है।
शुक्र यंत्र
शुक्र यंत्र की पूजा से प्रेम जीवन, व्यापार और धनलाभ में वृद्धि होती है। शुक्र यंत्र को शुक्रवार को शुक्र की होरा एवं शुक्र के नक्षत्र के समय धारण करें।
शुक्र ग्रह के लिये जड़ी
शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए अरंड मूल अथवा सरपंखा मूल धारण करें। अरंड मूल/सरपंखा मूल को शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा अथवा शुक्र के नक्षत्र में धारण किया जा सकता है।
शुक्र के लिये रुद्राक्ष
शुक्र के लिये 6 मुखी रुद्राक्ष / 13 मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभदायक होता है।
तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः।
ॐ रं मं यं ॐ।
शुक्र मंत्र
जीवन में आर्थिक संपन्नता, प्रेम और आकर्षण में बढ़ोत्तरी के लिए शुक्र बीज मंत्र "ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः" का उच्चारण करना चाहिए।
इस मंत्र को कम से कम 16000 बार उच्चारण करना चाहिए और देश-काल-पात्र सिद्धांत के अनुसार कलयुग में इस मंत्र को 64000 बार जपने के लिए कहा गया है।
आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं - ॐ शुं शुक्राय नमः।
वैदिक ज्योतिष में दिए गए शुक्र शांति के उपाय को नियम के अनुसार करने से जातकों को भौतिक सुखों का आनंद प्राप्त होता है। इसके साथ ही जातकों के जीवन में ऐश्वर्य, धन, एवं समृद्धि का आगमन होता है और व्यक्ति के कलात्मक गुणों का विकास होता है। चूंकि ज्योतिष में शुक्र का संबंध कला से जोड़ा गया है। अतः जो व्यक्ति कला की विभिन्न विधाओं से जुड़ा है तो ऐसे लोगों को शुक्र दोष के उपाय करने चाहिए। इससे उन्हें इस क्षेत्र में अपार सफलता प्राप्त होगी। इस आलेख में मजबूत शुक्र के टोटके बहुत ही सरल रूप में बताए गए हैं जिन्हें आप आसानी से कर सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र ग्रह को वृषभ और तुला का स्वामी कहा जाता है। अर्थात इन राशियों के जातकों को शुक्र ग्रह के आसान उपाय करने चाहिए। शास्त्रो में कहा गया है कि शुक्र ग्रह माँ लक्ष्मी जी का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए जो व्यक्ति शुक्र व्रत का पालन करता है उसे माता लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जय महाकाल
जय श्रीराम
आज 10 बजे से पूर्व अपनी पत्नी को गुलाब का डियो या शाम को कोई सुहाग का सामान जरूर दे बहुत प्रेम बन जायेगा